ब्रह्मांड-रसायन, तत्वों का वितरण, ग्रहीय विभेदन व रेडियोजनिक समस्थानिक

यह अध्याय भूविज्ञान एवं भूभौतिकी (GG) पेपर के भाग B1 (भूविज्ञान के उन्नत विषय) के भू-रसायन शीर्षक के पहले आधे भाग का उत्तर देता है: “तत्वों का नाभिकसंश्लेषण व ब्रह्मांडीय प्रचुरता; उल्कापिंडों का वर्गीकरण व घटक; भूपर्पटी, मैंटल व क्रोड में प्रमुख, गौण व सूक्ष्म मात्रिक तत्वों की भू-रासायनिक आत्मीयताएँ व वितरण; ग्रहीय विभेदन व पृथ्वी का भू-रासायनिक विकास; भूपर्पटी व मैंटल का रेडियोजनिक (दीर्घजीवी) समस्थानिक विकास (Rb-Sr, Sm-Nd, U-Th-Pb), मैंटल भंडार”। यह पढ़ाता है कि तत्व कैसे बने, उल्कापिंड क्या दर्ज करते हैं, गोल्डश्मिट के वर्ग व विभाजन गुणांक कैसे तय करते हैं कि तत्व कहाँ जाएगा, पृथ्वी क्रोड, मैंटल व भूपर्पटी में कैसे बँटी, और Rb-Sr, Sm-Nd व U-Th-Pb तंत्र आयु व मैंटल भंडारों के बारे में क्या बताते हैं। संख्यात्मक प्रश्न समकाल-रेखा आयु, ε-Nd, U-Pb आयु व बैच गलन हैं, जिनमें प्रत्येक स्थिरांक प्रश्न में ही दिया गया है।

1. नाभिकसंश्लेषण व तत्वों की ब्रह्मांडीय प्रचुरता

महा-विस्फोट (Big Bang) ने केवल हाइड्रोजन व हीलियम बनाए (द्रव्यमान से लगभग 75 व 25 प्रतिशत), साथ में ड्यूटीरियम, ³He व लिथियम के अंश। इनसे भारी प्रत्येक तत्व बाद में तारों के भीतर बना। हाइड्रोजन दहन (प्रोटॉन-प्रोटॉन शृंखला, और भारी तारों में CNO चक्र) हीलियम बनाता है; हीलियम दहन तीन ⁴He नाभिकों को जोड़कर ¹²C बनाता है (ट्रिपल-अल्फा प्रक्रिया); विशाल तारे फिर क्रमशः कार्बन, नियॉन, ऑक्सीजन व सिलिकॉन जलाते हैं और लौह-शिखर (iron peak) के नाभिकों (Fe, Ni) पर रुक जाते हैं। हर चरण पिछले से अधिक गर्म व छोटा होता है, और विशाल तारा क्रोड-पतन अतिनवतारे (supernova) के रूप में समाप्त होता है।

लौह-शिखर के आगे संलयन ऊर्जा नहीं छोड़ता, अतः भारी नाभिक न्यूट्रॉन-ग्रहण से बनते हैं। s-प्रक्रिया (धीमी, विकसित अल्प-द्रव्यमान AGB तारों में) में प्रत्येक ग्रहण के बाद बीटा-क्षय हो जाता है, इसलिए पथ स्थायित्व-घाटी के साथ चलता है और Sr, Ba व Pb बनाता है। r-प्रक्रिया (तीव्र, न्यूट्रॉन-तारा विलयनों व कुछ अतिनवतारों में) में क्षय से पहले अनेक न्यूट्रॉन ग्रहण हो जाते हैं, जिससे Au व Pt का बड़ा भाग तथा समस्त U व Th बनता है। Li, Be व B नाज़ुक हैं, तारों के भीतर नष्ट हो जाते हैं, और मुख्यतः भारी नाभिकों के ब्रह्मांडीय-किरण विखंडन (cosmic-ray spallation) से बनते हैं।

  • द्रव्यमान संख्या के साथ प्रचुरता लौह-शिखर तक तीव्रता से घटती है और फिर समतल हो जाती है; हाइड्रोजन व हीलियम सौरमंडल के द्रव्यमान का लगभग 98 प्रतिशत हैं।
  • सम परमाणु-क्रमांक वाले तत्व अपने विषम पड़ोसियों से अधिक प्रचुर हैं (ओड्डो-हार्किन्स नियम), इसीलिए दुर्लभ मृदा पैटर्न कॉन्ड्राइट से सामान्यीकृत होने पर समतल होते हैं।
  • Li, Be व B अपने पड़ोसियों से बहुत नीचे हैं, और न्यूट्रॉन संख्या 50, 82 व 126 (Sr, Ba व Pb के निकट) के शिखर न्यूट्रॉन-ग्रहण के द्योतक हैं।

ब्रह्मांडीय प्रचुरताएँ सौर प्रकाशमंडल (photosphere) व CI कॉन्ड्राइट से आती हैं, जो वाष्पशील तत्वों (H, C, N, O, उत्कृष्ट गैसें) व Li को छोड़कर प्रत्येक तत्व में प्रकाशमंडल से मेल खाते हैं; इन्हें 10⁶ Si परमाणुओं के प्रति सामान्यीकृत किया जाता है। पृथ्वी की संरचना ब्रह्मांडीय नहीं है: उसने अपनी अधिकांश हाइड्रोजन, हीलियम व अन्य वाष्पशील गँवा दीं।

🎯 लौह-शिखर क्यों?
प्रति न्यूक्लिऑन बंधन ऊर्जा द्रव्यमान के साथ बढ़कर ⁵⁶Fe व ⁶²Ni के निकट अधिकतम होती है। इससे हल्के नाभिकों का संलयन ऊर्जा छोड़ता है; भारी नाभिकों का संलयन ऊर्जा खाता है। जिस विशाल तारे ने लौह-क्रोड बना लिया है उसके पास आगे संलयन-ईंधन नहीं बचता, अतः क्रोड ढह जाता है।

2. उल्कापिंड: वर्गीकरण व घटक

उल्कापिंड क्षुद्रग्रहों के टुकड़े हैं (कुछ चंद्रमा व मंगल से आते हैं) और आरंभिक सौरमंडल को सुरक्षित रखते हैं। पहला विभाजन यह है कि जनक पिंड पिघला या नहीं: कॉन्ड्राइट अपिघले व आदिम हैं, जबकि एकॉन्ड्राइट, पाषाण-लौह व लौह उन पिंडों से आते हैं जो पिघले व विभेदित हुए।

उल्कापिंड वर्ग
वर्गसमूहपरिभाषक लक्षणयह क्या बताता है
कॉन्ड्राइटकार्बनी (CI, CM, CV, CO)कॉन्ड्रूल व आधात्री, पर CI में कोई कॉन्ड्रूल नहीं; CI में जलयुक्त खनिज व कार्बनिक पदार्थ हैंCI सौर प्रकाशमंडल से मेल खाता है: ब्रह्मांडीय संदर्भ
कॉन्ड्राइटसाधारण (H, L, LL)ओलिवीन, पायरॉक्सीन, Fe-Ni धातु, ट्रॉइलाइट; H, L, LL कुल लोहे को उच्च से निम्न श्रेणी में रखते हैंसबसे सामान्य पतन; अपने क्षुद्रग्रह जनक में तप्त हुए
कॉन्ड्राइटएन्स्टैटाइट (EH, EL)एन्स्टैटाइट, Fe-Ni धातु, असामान्य सल्फाइडअत्यंत अपचयी परिस्थितियों में बने
एकॉन्ड्राइटHED, SNC, चंद्र, अन्यकोई कॉन्ड्रूल नहीं; आग्नेय संरचनाएँHED क्षुद्रग्रह वेस्टा से, SNC मंगल से आते हैं
पाषाण-लौहपैलासाइट, मेसोसिडेराइटपैलासाइट: Fe-Ni धातु में ओलिवीन क्रिस्टल; मेसोसिडेराइट: सिलिकेट-धातु ब्रेक्सियाविभेदित पिंडों की धातु व सिलिकेट
लौहहेक्साहेड्राइट, ऑक्टाहेड्राइट, एटैक्साइटFe-Ni मिश्रधातु (कैमेसाइट, टैनाइट); ऑक्टाहेड्राइट में विडमानश्टेटन पैटर्न दिखता हैपिघले, विभेदित पिंडों के धात्विक क्रोड

कॉन्ड्राइट के चार निर्माण-खंड हैं। कॉन्ड्रूल मिलीमीटर-माप की सिलिकेट बूँदें हैं जो सौर नीहारिका में पिघलीं और शीघ्र ठंडी हुईं। CAI (कैल्सियम-ऐलुमिनियम-समृद्ध अंतर्वेशन) कोरंडम, हिबोनाइट, स्पिनेल व मेलिलाइट जैसे उच्चतापसह खनिज हैं और लगभग 4.567 Ga पर सबसे पुराने आयु-निर्धारित ठोस हैं। सूक्ष्मकणीय आधात्री (matrix) वाष्पशील-समृद्ध पदार्थ रखती है, और धातु व सल्फाइड कण (कैमेसाइट, टैनाइट, ट्रॉइलाइट) समूह पूरा करते हैं। शैलिकी प्रकार (petrologic type) (1 से 6) जनक पिंड का इतिहास दर्ज करता है: प्रकार 3 सबसे कम परिवर्तित है, प्रकार 1 व 2 में जलीय परिवर्तन बढ़ता है, और प्रकार 4 से 6 में तापीय कायांतरण बढ़ता है।

📖 पृथ्वी की आयु कैसे ज्ञात हुई
1950 के दशक में क्लेयर पैटरसन ने दिखाया कि उल्कापिंडों का सीसा, कैन्यन डायब्लो लौह उल्कापिंड के ट्रॉइलाइट सहित, और पार्थिव सीसा एक Pb-Pb समकाल-रेखा पर स्थित हैं जो पृथ्वी की आयु लगभग 4.55 Ga देती है। CAI पर हुए कार्य ने बाद में सौरमंडल की आयु लगभग 4.567 Ga तक परिष्कृत की।
⚠️ कॉन्ड्राइट, कॉन्ड्रूल, एकॉन्ड्राइट
कॉन्ड्राइट एक शैल है, कॉन्ड्रूल उसके भीतर की बूँद है, और एकॉन्ड्राइट बिना कॉन्ड्रूल वाला पिघला उल्कापिंड है। वर्ग इतिहास व समग्र संरचना से परिभाषित होते हैं, केवल कॉन्ड्रूल से नहीं: CI कॉन्ड्राइट में कॉन्ड्रूल नहीं होते फिर भी वे कॉन्ड्राइट हैं, क्योंकि वे अपिघले हैं और उनकी संरचना सौर है।

3. गोल्डश्मिट का भू-रासायनिक वर्गीकरण व प्रतिस्थापन नियम

वी. एम. गोल्डश्मिट ने तत्वों को उस प्रावस्था के आधार पर वर्गीकृत किया जिसे वे तब पसंद करते हैं जब कोई ग्रह धातु, सल्फाइड, सिलिकेट व गैस में विभेदित होता है।

गोल्डश्मिट के भू-रासायनिक वर्ग
वर्गरुचिउदाहरणकहाँ मिलते हैं
लिथोफाइलऑक्सीजन: सिलिकेट व ऑक्साइडSi, Al, Mg, Ca, Na, K, Ti, Rb, Sr, Ba, REE, Zr, Hf, Nb, Ta, Th आदिभूपर्पटी व मैंटल
साइडरोफाइलधात्विक लोहाFe, Ni, Co, Mo, Re, Au, प्लैटिनम-समूह तत्वअधिकांश क्रोड में; मैंटल में अवक्षीण
कैल्कोफाइलसल्फर: सल्फाइडCu, Zn, Pb, Ag, Cd, Hg, As, Sb आदिसल्फाइड खनिज व अयस्क निक्षेप
एटमोफाइलगैस प्रावस्थाH, N, उत्कृष्ट गैसेंवायुमंडल व जलमंडल

कोई तत्व किस क्रिस्टल-स्थल में जाएगा यह गोल्डश्मिट के प्रतिस्थापन नियमों से तय होता है। जिन आयनों की त्रिज्याएँ लगभग 15 प्रतिशत से कम भिन्न हों वे मुक्त रूप से प्रतिस्थापित होते हैं। आवेश में एक इकाई का अंतर तभी स्वीकार्य है जब युग्मित प्रतिस्थापन संतुलन लौटा दे (प्लेजियोक्लेज़ में Ca²⁺Al³⁺ के स्थान पर Na⁺Si⁴⁺)। जब दो आयन एक स्थल हेतु होड़ करें तो उच्चतर आवेश-त्रिज्या अनुपात (आयनिक विभव) वाला पहले लिया जाता है, इसीलिए Mg²⁺ प्रारंभिक ओलिवीन में Fe²⁺ से पहले प्रवेश करता है और बड़ा आयन बाद के क्रिस्टलों हेतु बचता है। Ni²⁺, Mg²⁺ से थोड़ा छोटा होने के कारण, ओलिवीन में उसका स्थान लेता है और शीघ्र ले लिया जाता है।

4. विभाजन गुणांक व भूपर्पटी, मैंटल तथा क्रोड में तत्वों का वितरण

विभाजन गुणांक D = C(खनिज)/C(गलित) बताता है कि कोई तत्व क्रिस्टल व गलित में कैसे बँटता है। संगत (compatible) तत्वों का D > 1 होता है (Ni, Cr व Co ओलिवीन व स्पिनेल में जाते हैं); असंगत (incompatible) तत्वों का D < 1 होता है (K, Rb, Cs, Ba, Th, Nb, Ta व हल्की REE गलित में रहती हैं)। असंगत तत्व LILE (बड़े, कम आवेश: K, Rb, Cs, Sr, Ba, तरलों में गतिशील) व HFSE (छोटे, उच्च आवेश: Zr, Hf, Nb, Ta, Ti, Th, तरलों में अगतिशील) में बँटते हैं। बैच गलन में गलित का C(L)/C₀ = 1/[D + F(1 − D)] होता है, जहाँ F गलित-अंश व D समग्र गुणांक है; D के 0 के निकट होने पर यह लगभग 1/F है, अतः 10 प्रतिशत गलन असंगत तत्व को लगभग दस गुना समृद्ध करता है। प्रभाजी क्रिस्टलन में द्रव C(L)/C₀ = f^(D − 1) का अनुसरण करता है, जहाँ f शेष द्रव का अंश है।

तत्व कहाँ हैं
भंडारपृथ्वी के द्रव्यमान का अंशसंरचनाभू-रासायनिक चरित्र
भूपर्पटी1 प्रतिशत से कममहाद्वीपीय समग्र एंडेसाइटी (लगभग 60 wt% SiO₂), महासागरीय बेसाल्टी; O, Si, Al, Fe, Ca, Na, K, Mg लगभग 98 wt% बनाते हैंK, Rb, Ba, Th व U का असमानुपाती भाग रखती है
मैंटललगभग दो-तिहाईपेरिडोटाइट (ओलिवीन, पायरॉक्सीन, स्पिनेल या गार्नेट); MgO लगभग 38 wt%असंगत तत्वों (भूपर्पटी निष्कर्षण) व साइडरोफाइलों (क्रोड-निर्माण) में अवक्षीण
क्रोडलगभग एक-तिहाई (32 प्रतिशत)Fe-Ni मिश्रधातु जिसमें कुछ प्रतिशत Ni व हल्के तत्व (S, Si, O, C, H) हैंतरल बाह्य क्रोड, ठोस आंतरिक क्रोड; शुद्ध Fe-Ni से हल्का
⚠️ संगतता खनिज-गलित युग्म की होती है
कोई तत्व अमूर्त रूप में संगत या असंगत नहीं होता। मैंटल पेरिडोटाइट के गलने में Sr असंगत है (D < 1), पर प्लेजियोक्लेज़-समृद्ध क्रिस्टलन में संगत (D > 1), और Eu²⁺ प्लेजियोक्लेज़ में Sr का अनुसरण करता है। सदैव पूछें कि कौन-सा खनिज और कौन-सा गलित।

5. ग्रहीय विभेदन व पृथ्वी का भू-रासायनिक विकास

पृथ्वी का अभिवृद्धन सबसे पुराने ठोसों के कुछ करोड़ वर्षों के भीतर ग्रहाणुओं से हुआ। टक्करों की ऊष्मा, अल्पजीवी ²⁶Al (अर्ध-आयु लगभग 0.7 Ma) व ⁶⁰Fe, और बाद में U, Th व ⁴⁰K की ऊष्मा ने उसके बड़े भाग को पिघला दिया, और अभिवृद्धन के अंत में एक विशाल टक्कर से चंद्रमा बना। सघन Fe-Ni धातु डूबकर क्रोड बनी, और समग्र सिलिकेट पृथ्वी (BSE: आदिम मैंटल व भूपर्पटी) शेष रही। साइडरोफाइल तत्व धातु के साथ गए और BSE में अवक्षीण हैं, Ni व Co में मध्यम और Au, Ir व अन्य प्लैटिनम-समूह तत्वों में अत्यंत तीव्र।

दो प्रेक्षण इसका काल-निर्धारण व परीक्षण करते हैं। Hf-W तंत्र में (¹⁸²Hf लगभग 9 Ma अर्ध-आयु से ¹⁸²W में क्षय होता है; Hf लिथोफाइल है और W मध्यम साइडरोफाइल) W क्रोड में गया और Hf मैंटल में रहा, इसलिए कॉन्ड्राइट की तुलना में सिलिकेट पृथ्वी में ¹⁸²W की अधिकता दर्शाती है कि क्रोड तब बना जब ¹⁸²Hf जीवित था, कुछ करोड़ वर्षों के भीतर। दूसरे, मैंटल में अत्यंत साइडरोफाइल तत्व धातु-सिलिकेट साम्य के पूर्वानुमान से कहीं अधिक प्रचुर हैं, जिसकी व्याख्या क्रोड बनने के बाद जुड़ी कॉन्ड्राइटी पदार्थ की अंतिम परत (late veneer) से होती है।

आंशिक गलन फिर असंगत तत्वों को ऊपर ले जाता है। बेसाल्टी गलितों ने प्रथम भूपर्पटियाँ बनाईं, सबडक्शन-संबद्ध मैग्मा-क्रिया व बाद के पुनर्संसाधन ने महाद्वीप बनाए, और अवशेष, क्षीणित मैंटल (depleted mantle), में Rb/Sr कम व Sm/Nd अधिक होता है। गैस-निष्कासन ने वायुमंडल व महासागर दिए; वायुमंडलीय आर्गन मुख्यतः ठोस पृथ्वी में ⁴⁰K के क्षय से बनी रेडियोजनिक ⁴⁰Ar है।

🎯 कॉन्ड्राइटी अनुपात क्यों?
BSE में उच्चतापसह लिथोफाइल तत्वों के अनुपात (Ca/Al, Sm/Nd, Lu/Hf) कॉन्ड्राइटी मानों पर बने रहते हैं, क्योंकि न संघनन ने, न क्रोड-निर्माण ने उन्हें अलग किया। यही CHUR, यानी कॉन्ड्राइटी एकसमान भंडार, का औचित्य है, जो नियोडिमियम समस्थानिकों में संदर्भ के रूप में प्रयुक्त होता है।

6. रेडियोजनिक समस्थानिक: क्षय नियम, समकाल-रेखाएँ व Rb-Sr

स्थिर λ से क्षयित जनक N = N₀e^(−λt) का पालन करता है, अर्ध-आयु t½ = ln 2/λ। समय t में बना रेडियोजनिक संतति D* = N(e^(λt) − 1) है, जहाँ N अब उपस्थित जनक है। संतति तत्व के स्थायी समस्थानिक D(s) से भाग देने पर नमूने के आकार पर निर्भरता मिट जाती है: (D/D(s)) = (D/D(s))₀ + (N/D(s))(e^(λt) − 1)। यह सरल रेखा है। एक ही आयु के सहजात नमूने समकाल-रेखा (isochron) पर आते हैं जिसकी प्रवणता e^(λt) − 1 और अंतःखंड प्रारंभिक अनुपात है।

  • वैध समकाल-रेखा हेतु सहजात नमूने चाहिए जो समान प्रारंभिक अनुपात से आरंभ हुए, ऐसा तंत्र जो निर्माण के बाद बंद रहा, और जनक/संतति अनुपात में वास्तविक विस्तार।
  • प्रवणता आयु देती है, t = ln(1 + प्रवणता)/λ; अंतःखंड प्रारंभिक अनुपात देता है, जो स्रोत (मैंटल या भूपर्पटी) की पहचान कराता है।

Rb-Sr: ⁸⁷Rb बीटा उत्सर्जन से ⁸⁷Sr में क्षयित होता है, λ = 1.42 × 10⁻¹¹ yr⁻¹ (अर्ध-आयु लगभग 49 Ga), और आलेख ⁸⁷Rb/⁸⁶Sr के विरुद्ध ⁸⁷Sr/⁸⁶Sr है। Rb⁺ K⁺ का अनुसरण करता है (अभ्रक, K-फेल्डस्पार) और Sr²⁺ Ca²⁺ का (प्लेजियोक्लेज़)। Rb, Sr से अधिक असंगत है, अतः गलितों व भूपर्पटी में Rb/Sr अधिक और क्षीणित मैंटल में कम होता है। इसलिए भूपर्पटी में रेडियोजनिक Sr तेज़ी से बढ़ता है (पुरानी महाद्वीपीय भूपर्पटी 0.71 से काफ़ी ऊपर), जबकि MORB लगभग 0.703 पर है और सौरमंडल लगभग 0.699 से आरंभ हुआ।

हल उदाहरण। दो सहजात संपूर्ण-शैलों के (⁸⁷Rb/⁸⁶Sr, ⁸⁷Sr/⁸⁶Sr) = (1.0, 0.7150) व (4.0, 0.7450) हैं। प्रवणता (0.7450 − 0.7150)/(4.0 − 1.0) = 0.0100 है, अतः t = ln(1.0100)/(1.42 × 10⁻¹¹) = 7.0 × 10⁸ yr, यानी लगभग 700 Ma। अंतःखंड 0.7150 − 0.0100 × 1.0 = 0.7050 प्रारंभिक अनुपात है: मैंटल के 0.703 से ऊपर का मान स्रोत में भूपर्पटीय योगदान का संकेत दे सकता है।

⚠️ मिश्रण-रेखा समकाल-रेखा का भेस धर सकती है
Rb-Sr आलेख के दोनों अक्षों का हर ⁸⁶Sr समान है, अतः दो घटकों का मिश्रण सरल रेखा देता है, और उसकी प्रवणता का आयु-अर्थ नहीं होता। खनिज समकाल-रेखाएँ भी शीतलन दर्ज करती हैं, क्रिस्टलन नहीं: बायोटाइट Rb-Sr हेतु केवल लगभग 300 °C पर बंद होता है। सदैव जाँचें कि नमूने सहजात हैं और तंत्र बंद है।

7. Sm-Nd व ε संकेतन

Sm-Nd: ¹⁴⁷Sm ऐल्फ़ा उत्सर्जन से ¹⁴³Nd में क्षयित होता है, λ = 6.54 × 10⁻¹² yr⁻¹ (अर्ध-आयु लगभग 106 Ga), ¹⁴⁴Nd से सामान्यीकृत। Sm व Nd पड़ोसी दुर्लभ मृदाएँ हैं, अतः अपक्षय व कायांतरण में Sm/Nd कम बदलता है और यह तंत्र मैफ़िक शैलों व आर्कियन भू-भागों का अच्छा आयु-निर्धारण करता है। गलन में Nd अधिक असंगत है, अतः गलितों व भूपर्पटी को निम्न Sm/Nd और क्षीणित मैंटल को उच्च Sm/Nd मिलता है: Sr के विपरीत दिशा। संदर्भ CHUR है: आज ¹⁴³Nd/¹⁴⁴Nd = 0.512638 व ¹⁴⁷Sm/¹⁴⁴Nd = 0.1967, और CHUR(t) = 0.512638 − 0.1967(e^(λt) − 1)।

CHUR से विचलन ε(Nd)(t) = [ (¹⁴³Nd/¹⁴⁴Nd)(नमूना, t) ÷ (¹⁴³Nd/¹⁴⁴Nd)(CHUR, t) − 1 ] × 10⁴ से व्यक्त होता है, जिसमें नमूने का अनुपात इच्छित समय t पर लिया जाता है। धनात्मक ε का अर्थ है ऐसा स्रोत जिसका दीर्घकालिक Sm/Nd कॉन्ड्राइटी से अधिक है (क्षीणित मैंटल; MORB प्रबल धनात्मक), ऋणात्मक ε भूपर्पटीय या समृद्ध स्रोत (पुरानी महाद्वीपीय भूपर्पटी प्रबल ऋणात्मक)। मॉडल आयु T(CHUR) = (1/λ) ln[1 + ((¹⁴³Nd/¹⁴⁴Nd)(S) − 0.512638)/((¹⁴⁷Sm/¹⁴⁴Nd)(S) − 0.1967)] वह समय है जब नमूने का Nd CHUR से मेल खाता था, यानी उसका स्रोत कब मैंटल से अलग हुआ इसका आकलन।

तीन दीर्घजीवी तंत्र
तंत्रक्षय व λ (yr⁻¹)सामान्यीकारक समस्थानिकगलन मेंमहाद्वीपीय भूपर्पटी
Rb-Sr⁸⁷Rb → ⁸⁷Sr, 1.42 × 10⁻¹¹⁸⁶SrRb अधिक असंगत: गलित में Rb/Sr उच्चउच्च ⁸⁷Sr/⁸⁶Sr
Sm-Nd¹⁴⁷Sm → ¹⁴³Nd, 6.54 × 10⁻¹²¹⁴⁴NdNd अधिक असंगत: गलित में Sm/Nd निम्नऋणात्मक ε(Nd)
U-Pb²³⁸U → ²⁰⁶Pb, 1.55125 × 10⁻¹⁰; ²³⁵U → ²⁰⁷Pb, 9.8485 × 10⁻¹⁰²⁰⁴PbU, Pb से अधिक असंगत: ऊपरी भूपर्पटी में U/Pb उच्चऊपरी भूपर्पटी में रेडियोजनिक Pb समस्थानिक

8. U-Th-Pb, Pb-Pb आयुएँ व मैंटल भंडार

U-Th-Pb में तीन शृंखलाएँ (तीसरी, ²³²Th → ²⁰⁸Pb, का λ = 4.9475 × 10⁻¹¹ yr⁻¹) व एक स्थायी संदर्भ, ²⁰⁴Pb, हैं। दोनों यूरेनियम शृंखलाएँ दो घड़ियाँ देती हैं। कॉन्कॉर्डिया आरेख (²⁰⁷Pb/²³⁵U के विरुद्ध ²⁰⁶Pb/²³⁸U) पर संगत आयुएँ वक्र पर होती हैं; जिन ज़िरकॉनों ने सीसा खोया वे एक जीवा, डिस्कॉर्डिया, पर होते हैं, जिसका ऊपरी प्रतिच्छेद क्रिस्टलन-आयु और निचला प्रतिच्छेद सीसा-हानि का काल देता है। ज़िरकॉन बनते समय U ग्रहण करता है पर Pb को अस्वीकार करता है, इसलिए वह मानक U-Pb खनिज है। Pb-Pb आयु ²⁰⁷Pb/²⁰⁶Pb = (1/137.88)(e^(λ235·t) − 1)/(e^(λ238·t) − 1) का उपयोग करती है, जहाँ 137.88 वर्तमान ²³⁸U/²³⁵U है; यह U/Pb अनुपात पर निर्भर नहीं करती और इसलिए हाल की U-हानि से बची रहती है।

महासागरीय द्वीप बेसाल्ट मैंटल भंडारों का प्रतिचयन करते हैं जो क्षीणित MORB मैंटल (DMM: निम्न ⁸⁷Sr/⁸⁶Sr, धनात्मक ε(Nd)) से भिन्न हैं। HIMU में अत्यंत उच्च ²⁰⁶Pb/²⁰⁴Pb (उच्च ²³⁸U/²⁰⁴Pb, μ) व अपेक्षाकृत निम्न ⁸⁷Sr/⁸⁶Sr होता है, जिसे पुनर्चक्रित महासागरीय भूपर्पटी माना जाता है (सेंट हेलेना)। EM1 में निम्न ¹⁴³Nd/¹⁴⁴Nd व निम्न ²⁰⁶Pb/²⁰⁴Pb होता है, जिसे पुनर्चक्रित गहरे-सागरीय अवसाद या निचली भूपर्पटी माना जाता है। EM2 में सर्वाधिक ⁸⁷Sr/⁸⁶Sr होता है, जिसे पुनर्चक्रित स्थलजात अवसाद या ऊपरी भूपर्पटी माना जाता है (सामोआ)। एक साझा, मध्यम-क्षीणित घटक (FOZO या PREMA) भी पहचाना गया है।

🧠 भूपर्पटी: Sr ऊपर, Nd नीचे
गलन Rb व Nd (अधिक असंगत साथियों) को भूपर्पटी में भेजता है। इसलिए भूपर्पटी में Rb/Sr अधिक होता है जिससे उच्च ⁸⁷Sr/⁸⁶Sr बनता है, और Sm/Nd कम होता है जिससे निम्न ¹⁴³Nd/¹⁴⁴Nd व ऋणात्मक ε(Nd) बनता है। क्षीणित मैंटल इसका दर्पण-प्रतिबिंब है, इसलिए महासागरीय बेसाल्ट ε(Nd) बनाम ⁸⁷Sr/⁸⁶Sr में ऋणात्मक ढाल वाले मैंटल सरणी पर आते हैं।

मुख्य बिंदु

  • हल्के तत्व महा-विस्फोट से, लौह-शिखर तक के तत्व तारकीय संलयन से, और भारी तत्व s- व r-प्रक्रिया न्यूट्रॉन-ग्रहण से आते हैं; Li, Be व B विखंडन (spallation) से। CI कॉन्ड्राइट ब्रह्मांडीय प्रचुरता निर्धारित करते हैं, 10⁶ Si परमाणुओं के प्रति सामान्यीकृत।
  • कॉन्ड्राइट अपिघले हैं (कॉन्ड्रूल, आधात्री, CAI, धातु; शैलिकी प्रकार 1 से 6); एकॉन्ड्राइट, पाषाण-लौह व लौह पिघले पिंडों से आते हैं। लगभग 4.567 Ga के CAI सबसे पुराने ठोस हैं।
  • गोल्डश्मिट के वर्ग लिथोफाइल, साइडरोफाइल, कैल्कोफाइल व एटमोफाइल हैं। प्रतिस्थापन त्रिज्या, आवेश व आयनिक विभव से चलता है; D = C(खनिज)/C(गलित) तत्वों को संगत व असंगत में बाँटता है, और बैच गलन C(L)/C₀ = 1/[D + F(1 − D)] देता है।
  • पृथ्वी Fe-Ni क्रोड (उसके द्रव्यमान का लगभग 32 प्रतिशत), पेरिडोटाइट मैंटल व पतली भूपर्पटी में विभेदित हुई; साइडरोफाइल क्रोड में गए, Hf-W तंत्र क्रोड-निर्माण को कुछ करोड़ वर्षों में काल-निर्धारित करता है, और अंतिम परत (late veneer) मैंटल के प्लैटिनम-समूह तत्वों को समझाती है।
  • समकाल-रेखा की प्रवणता e^(λt) − 1 और अंतःखंड प्रारंभिक अनुपात के बराबर होता है; इसके लिए जनक/संतति में विस्तार वाले सहजात, बंद-तंत्र नमूने चाहिए, और मिश्रण-रेखा इसकी नकल कर सकती है। Rb-Sr: λ = 1.42 × 10⁻¹¹ yr⁻¹।
  • भूपर्पटी में Rb/Sr उच्च (उच्च ⁸⁷Sr/⁸⁶Sr) व Sm/Nd निम्न (ऋणात्मक ε(Nd)) होता है; क्षीणित मैंटल इसका उलटा है। ε(Nd)(t) नमूने की तुलना CHUR(t) से प्रति 10⁴ भागों में करता है; कॉन्कॉर्डिया, डिस्कॉर्डिया व Pb-Pb आयुएँ दो यूरेनियम शृंखलाओं से आती हैं। HIMU, EM1 व EM2 समृद्ध OIB भंडार हैं।

अभ्यास प्रश्न (16)

उत्तर खोलने से पहले प्रत्येक प्रश्न हल करें। हर व्याख्या सही विकल्प के साथ लुभावना गलत विकल्प भी बताती है, क्योंकि अंक वहीं जाते हैं।

  1. लौह-शिखर से भारी अधिकांश नाभिक, जैसे बेरियम, सोना व यूरेनियम, किस प्रक्रिया से बने?

    1. विशाल तारों के क्रोड में संलयन, जो भारी नाभिक बनने पर भी ऊर्जा छोड़ता रहता है
    2. न्यूट्रॉन-ग्रहण, धीमी s-प्रक्रिया व तीव्र r-प्रक्रिया में, उसके बाद बीटा-क्षय
    3. अंतरतारकीय नाभिकों का ब्रह्मांडीय-किरण विखंडन, जो छोटे टुकड़ों से भारी तत्व बनाता है
    4. आरंभिक कुछ मिनटों में महा-विस्फोट नाभिकसंश्लेषण, जब सभी स्थायी नाभिक एकत्र हुए
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — न्यूट्रॉन-ग्रहण, धीमी s-प्रक्रिया व तीव्र r-प्रक्रिया में, उसके बाद बीटा-क्षय

    लौह-शिखर के आगे संलयन ऊर्जा सोखता है, इसलिए भारी नाभिक s-प्रक्रिया (धीमी, AGB तारों में) व r-प्रक्रिया (तीव्र, न्यूट्रॉन-तारा विलयनों व कुछ अतिनवतारों में) के न्यूट्रॉन-ग्रहण से बनते हैं। विशाल तारों में संलयन भ्रामक विकल्प है पर वह लौह-शिखर पर रुक जाता है। विखंडन केवल Li, Be व B बनाता है और कम द्रव्यमान के टुकड़े देता है, और महा-विस्फोट ने केवल H, He व Li के अंश बनाए।
  2. CI कार्बनी कॉन्ड्राइट के बारे में कौन-सा कथन सही है?

    1. वे सर्वाधिक तप्त कॉन्ड्राइट हैं, शैलिकी प्रकार 6 के, और उनकी बनावट भली-भाँति साम्यावस्था वाली है
    2. उनमें Fe-Ni धातु के सतत जाल में जड़े प्रचुर बड़े कॉन्ड्रूल होते हैं
    3. उनके अवाष्पशील तत्वों की प्रचुरताएँ सौर प्रकाशमंडल से मेल खाती हैं, यद्यपि उनमें कोई कॉन्ड्रूल नहीं होता
    4. वे क्षुद्रग्रह वेस्टा से व्युत्पन्न पिघले बेसाल्टी एकॉन्ड्राइट हैं और आग्नेय बनावट रखते हैं
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — उनके अवाष्पशील तत्वों की प्रचुरताएँ सौर प्रकाशमंडल से मेल खाती हैं, यद्यपि उनमें कोई कॉन्ड्रूल नहीं होता

    CI कॉन्ड्राइट अपिघले, जल-परिवर्तित (शैलिकी प्रकार 1) हैं और, कॉन्ड्रूल न होने पर भी, अवाष्पशील तत्वों में सौर प्रकाशमंडल से मेल खाते हैं, इसीलिए वे ब्रह्मांडीय संदर्भ निर्धारित करते हैं। भ्रामक भूल यह है कि कॉन्ड्राइट का अर्थ कॉन्ड्रूल की उपस्थिति है; प्रकार 6 जलीय परिवर्तन नहीं बल्कि तापीय कायांतरण दर्शाता, और HED एकॉन्ड्राइट वेस्टा से आते हैं।
  3. एक उल्कापिंड Fe-Ni धातु के सतत जाल में जड़े ओलिवीन क्रिस्टलों से बना है और उसमें कोई कॉन्ड्रूल नहीं है। वह है एक:

    1. पैलासाइट, विभेदित पिंड से आया पाषाण-लौह उल्कापिंड
    2. यूक्राइट, HED समूह का बेसाल्टी एकॉन्ड्राइट
    3. ऑक्टाहेड्राइट, कैमेसाइट व टैनाइट के विडमानश्टेटन पैटर्न वाला लौह उल्कापिंड
    4. H-समूह का साधारण कॉन्ड्राइट जिसके कॉन्ड्रूल कायांतरण में धातु से प्रतिस्थापित हो गए
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — पैलासाइट, विभेदित पिंड से आया पाषाण-लौह उल्कापिंड

    सिलिकेट (ओलिवीन) का Fe-Ni धातु के साथ लगभग तुलनीय अनुपात में मिश्रण पाषाण-लौह की परिभाषा है, और धातु में ओलिवीन पैलासाइट है। ऑक्टाहेड्राइट भ्रामक विकल्प है क्योंकि वह भी Fe-Ni है, पर वह केवल धातु है, ओलिवीन रहित। यूक्राइट कम धातु वाला बेसाल्टी सिलिकेट शैल है, और साधारण कॉन्ड्राइट में कॉन्ड्रूल दिखते।
  4. निम्नलिखित में से कौन-से उल्कापिंड ऐसे जनक पिंडों से आते हैं जो पिघले व विभेदित हुए?

    1. HED समूह का यूक्राइट, एक बेसाल्टी एकॉन्ड्राइट
    2. शैलिकी प्रकार 4 का H-समूह साधारण कॉन्ड्राइट, अपिघला पर तापीय कायांतरित
    3. एक ऑक्टाहेड्राइट लौह उल्कापिंड, Fe-Ni मिश्रधातु
    4. एक CM कार्बनी कॉन्ड्राइट, जल-परिवर्तित पर अपिघला
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — HED समूह का यूक्राइट, एक बेसाल्टी एकॉन्ड्राइट; C — एक ऑक्टाहेड्राइट लौह उल्कापिंड, Fe-Ni मिश्रधातु

    यूक्राइट पिघले पिंड के आग्नेय (बेसाल्टी) शैल हैं, और लौह उल्कापिंड पिघले, विभेदित पिंडों के धात्विक क्रोड हैं। साधारण व कार्बनी कॉन्ड्राइट आदिम हैं: ताप (प्रकार 4) या जल (CM) ने उन्हें बदला, पर वे कभी पिघले नहीं और उन्होंने अपने कॉन्ड्रूल व लगभग-सौर संरचना बनाए रखी।
  5. कौन-सा तत्व प्रबल साइडरोफाइल है और इसलिए क्रोड-निर्माण के कारण सिलिकेट पृथ्वी में अवक्षीण है?

    1. ज़िरकोनियम, उच्चतापसह तत्व जो अत्यंत स्थायी ऑक्साइड व सिलिकेट खनिज बनाता है
    2. ज़िंक, जो अयस्क निक्षेपों में स्फैलेराइट जैसे सल्फाइड खनिजों को पसंद करता है
    3. स्ट्रॉन्शियम, जो प्लेजियोक्लेज़ व कार्बोनेट खनिजों में कैल्सियम का प्रतिस्थापन करता है
    4. इरिडियम, प्लैटिनम-समूह का तत्व जो धात्विक लोहे के साथ मिश्रधातु बनाता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — इरिडियम, प्लैटिनम-समूह का तत्व जो धात्विक लोहे के साथ मिश्रधातु बनाता है

    इरिडियम जैसे प्लैटिनम-समूह तत्वों की लौह-धातु से अत्यंत प्रबल आत्मीयता है और वे क्रोड में चले गए, जिससे मैंटल तीव्रतः अवक्षीण रहा। ज़िरकोनियम व स्ट्रॉन्शियम लिथोफाइल हैं (सिलिकेट व ऑक्साइड में रहते हैं), और ज़िंक कैल्कोफाइल है जो धातु नहीं बल्कि सल्फाइड को पसंद करता है।
  6. ओलिवीन किसी बेसाल्टी गलित से क्रिस्टलित होकर हट रहा है। शेष द्रव में Ni (संगत) व Rb (असंगत) की सांद्रताएँ कैसे बदलती हैं?

    1. दोनों बढ़ते हैं, क्योंकि क्रिस्टल बनने व हटने पर प्रत्येक सूक्ष्म तत्व द्रव में संकेंद्रित होता है
    2. Ni बढ़ता है और Rb घटता है, क्योंकि छोटा Ni²⁺ आयन ओलिवीन जालक से बाहर रखा जाता है जबकि Rb⁺ उसमें समाता है
    3. Ni तीव्रता से घटता है और Rb बढ़ता है, क्योंकि Ni²⁺ ओलिवीन में Mg²⁺ का स्थान लेता है जबकि Rb⁺ फिट नहीं होता
    4. कोई नहीं बदलता, क्योंकि सूक्ष्म तत्व क्रिस्टल-गलित साम्य में भाग नहीं लेते
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — Ni तीव्रता से घटता है और Rb बढ़ता है, क्योंकि Ni²⁺ ओलिवीन में Mg²⁺ का स्थान लेता है जबकि Rb⁺ फिट नहीं होता

    Ni²⁺ (लगभग 0.69 Å) आकार में Mg²⁺ (लगभग 0.72 Å) के निकट है और ओलिवीन हेतु उसका D उच्च है, इसलिए द्रव से Ni निकल जाता है, जबकि बड़े Rb⁺ आयन का D शून्य के निकट है और वह द्रव में संचित होता है। यह विचार कि सभी सूक्ष्म तत्व बढ़ते हैं विभाजन की उपेक्षा करता है; यह कि Ni बढ़ता है प्रतिस्थापन नियम उलट देता है।
  7. एक बेसाल्टी द्रव प्लेजियोक्लेज़-समृद्ध समुच्चय क्रिस्टलित करता है जिसके समग्र D(Sr) = 1.5 व D(Rb) = 0.05 हैं। C(L)/C₀ = f^(D − 1) प्रयोग करें, जहाँ f शेष द्रव का अंश है। f के 1 से 0.5 होने पर द्रव का Rb/Sr अनुपात:

    1. स्थिर रहता है, क्योंकि दोनों तत्व लिथोफाइल हैं और एक-सा व्यवहार करते हैं
    2. लगभग 2.7 गुना बढ़ता है, क्योंकि Rb लगभग 1.9 गुना समृद्ध होता है और Sr घटकर लगभग 0.71 रह जाता है
    3. लगभग 1.9 गुना बढ़ता है, जो अकेले Rb का संवर्धन है क्योंकि प्लेजियोक्लेज़ Sr को अप्रभावित छोड़ता है
    4. लगभग 2.7 गुना घटता है, क्योंकि संगत तत्व अनुपात को नियंत्रित करता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — लगभग 2.7 गुना बढ़ता है, क्योंकि Rb लगभग 1.9 गुना समृद्ध होता है और Sr घटकर लगभग 0.71 रह जाता है

    Rb: 0.5^(0.05 − 1) = 0.5^(−0.95) = 1.93। Sr: 0.5^(1.5 − 1) = 0.5^0.5 = 0.707। अनुपात 1.93/0.707 = 2.73 गुना बदलता है, यानी लगभग 2.7 गुना अधिक। Sr की हानि की उपेक्षा करने पर केवल 1.9 मिलता है, जो भ्रामक भूल है; संगत Sr द्रव से निकलता है, इसलिए Rb/Sr घट नहीं सकता।
  8. Rb-Sr व Sm-Nd तंत्रों के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?

    1. क्योंकि Nd, Sm से अधिक असंगत है, मैंटल का आंशिक गलित अपने स्रोत से निम्न Sm/Nd रखता है
    2. पुरानी महाद्वीपीय भूपर्पटी में प्रायः ऋणात्मक ε(Nd) के साथ उच्च ⁸⁷Sr/⁸⁶Sr होता है
    3. क्षीणित मैंटल का Rb/Sr CHUR से अधिक होता है, इसलिए वह भूपर्पटी से तेज़ी से रेडियोजनिक Sr बढ़ाता है
    4. Sm-Nd आयुएँ अपक्षय से आसानी से रीसेट हो जाती हैं क्योंकि Sm व Nd जल में सर्वाधिक विलेय तत्वों में हैं
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — क्योंकि Nd, Sm से अधिक असंगत है, मैंटल का आंशिक गलित अपने स्रोत से निम्न Sm/Nd रखता है; B — पुरानी महाद्वीपीय भूपर्पटी में प्रायः ऋणात्मक ε(Nd) के साथ उच्च ⁸⁷Sr/⁸⁶Sr होता है

    गलन अधिक असंगत साथी (Rb, Nd) को गलित में संकेंद्रित करता है, इसलिए गलितों व भूपर्पटी में Sm/Nd निम्न होता है जिससे निम्न ¹⁴³Nd/¹⁴⁴Nd व ऋणात्मक ε(Nd) बनता है, और Rb/Sr उच्च होता है जिससे उच्च ⁸⁷Sr/⁸⁶Sr बनता है। क्षीणित मैंटल का इसका उलटा, निम्न Rb/Sr, होता है, अतः Sr धीरे बढ़ता है। दुर्लभ मृदाएँ अपक्षय में सबसे कम गतिशील तत्वों में हैं, इसीलिए Sm-Nd सुदृढ़ है।
  9. सिलिकेट पृथ्वी में कॉन्ड्राइट की तुलना में रेडियोजनिक ¹⁸²W की थोड़ी अधिकता है। यह देखते हुए कि ¹⁸²Hf (अर्ध-आयु लगभग 9 Ma) ¹⁸²W में क्षयित होता है, हैफ़नियम लिथोफाइल है और टंगस्टन मध्यम साइडरोफाइल, यह क्या दर्शाता है?

    1. क्रोड-निर्माण ¹⁸²Hf के विलुप्त होने के बाद पूर्ण हुआ, इसलिए मैंटल ने अपना समस्त रेडियोजनिक ¹⁸²W रख लिया
    2. क्रोड बनने के बाद अंतिम परत ने मैंटल को ¹⁸²W-समृद्ध कॉन्ड्राइटी पदार्थ पहुँचाया
    3. टंगस्टन लिथोफाइल है और हैफ़नियम साइडरोफाइल, इसलिए Hf क्रोड में गया जबकि W मैंटल में रहा
    4. क्रोड-निर्माण तब हुआ जब ¹⁸²Hf जीवित था: W क्रोड में गया और Hf मैंटल में ¹⁸²W बनाने हेतु रुका
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — क्रोड-निर्माण तब हुआ जब ¹⁸²Hf जीवित था: W क्रोड में गया और Hf मैंटल में ¹⁸²W बनाने हेतु रुका

    Hf मैंटल में रहता है जबकि W अंशतः धातु के साथ जाता है, इसलिए मैंटल को उच्च Hf/W अनुपात मिला। यदि यह ¹⁸²Hf के जीवित रहते हुआ तो मैंटल का ¹⁸²Hf ¹⁸²W में क्षयित होकर अधिकता छोड़ गया, अतः क्रोड कुछ अर्ध-आयुओं, यानी कुछ करोड़ वर्षों, में बना। विलुप्ति के बाद बनने पर कोई विसंगति नहीं रहती, जो भ्रामक पाठ है, और कॉन्ड्राइट निम्न-¹⁸²W संदर्भ हैं, अधिकता का स्रोत नहीं।
  10. आर्क मैग्मा Nb व Ta की तुलना में Ba व Sr में समृद्ध होते हैं। कौन-सा स्पष्टीकरण सही है?

    1. प्रविष्ट पटल से निकले जलीय तरल गतिशील LILE (Ba, Sr) ले जाते हैं पर अगतिशील HFSE (Nb, Ta) नहीं, जो पटल में रह जाते हैं
    2. Ba व Sr उच्च क्षेत्र-सामर्थ्य तत्व हैं और प्रविष्ट पटल के जलीय तरलों द्वारा मैंटल-वेज में कुशलता से ले जाए जाते हैं
    3. Nb व Ta वाष्पशील तत्व हैं जो सतह पर आर्क मैग्मा के उद्गार में गैस के रूप में निकल जाते हैं
    4. Ba व Sr साइडरोफाइल तत्व हैं जो क्रोड के रिसाव से आर्क मैंटल में जुड़ते हैं
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — प्रविष्ट पटल से निकले जलीय तरल गतिशील LILE (Ba, Sr) ले जाते हैं पर अगतिशील HFSE (Nb, Ta) नहीं, जो पटल में रह जाते हैं

    बड़े, कम आवेश वाले LILE जैसे Ba व Sr निर्जलित होते पटल से निकले जलीय तरलों में सरलता से घुलते हैं, जबकि छोटे, उच्च आवेश वाले HFSE जैसे Nb व Ta उनमें अगतिशील होते हैं, जिससे आर्क मैग्मा का Nb-Ta गर्त बनता है। Ba व Sr LILE हैं, HFSE नहीं, और लिथोफाइल हैं, साइडरोफाइल नहीं; Nb व Ta उच्चतापसह हैं, वाष्पशील नहीं।
  11. दो सहजात संपूर्ण-शैल नमूने (⁸⁷Rb/⁸⁶Sr, ⁸⁷Sr/⁸⁶Sr) = (2.0, 0.7290) व (8.0, 0.8010) पर आलेखित होते हैं। λ(⁸⁷Rb) = 1.42 × 10⁻¹¹ yr⁻¹ लें और यथार्थ संबंध प्रवणता = e^(λt) − 1 प्रयोग करें। समकाल-रेखा आयु, Ma में निकटतम 10 Ma तक, ____ है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 840

    प्रवणता = (0.8010 − 0.7290)/(8.0 − 2.0) = 0.0720/6.0 = 0.01200। तब t = ln(1.01200)/(1.42 × 10⁻¹¹) = 0.011929/(1.42 × 10⁻¹¹) = 8.40 × 10⁸ yr = 840 Ma। (अंतःखंड 0.7290 − 0.0120 × 2.0 = 0.7050 प्रारंभिक अनुपात है।) यथार्थ लघुगणक के स्थान पर प्रवणता/λ लेने पर 845 Ma मिलता, इसीलिए यथार्थ संबंध निर्दिष्ट है।
  12. एक ग्रेनाइट 2,000 Ma पूर्व प्रारंभिक ¹⁴³Nd/¹⁴⁴Nd = 0.510252 के साथ क्रिस्टलित हुआ। CHUR हेतु वर्तमान ¹⁴³Nd/¹⁴⁴Nd = 0.512638 व ¹⁴⁷Sm/¹⁴⁴Nd = 0.1967 लें, λ(¹⁴⁷Sm) = 6.54 × 10⁻¹² yr⁻¹ और यथार्थ रूप e^(λt) के साथ। 2,000 Ma पर ग्रेनाइट का ε(Nd), निकटतम पूर्ण संख्या तक, ____ है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 4

    e^(λt) − 1 = e^(0.01308) − 1 = 0.013166। 2,000 Ma पर CHUR = 0.512638 − 0.1967 × 0.013166 = 0.510048। ε(Nd) = (0.510252/0.510048 − 1) × 10⁴ = 0.000400 × 10⁴ ≈ +4.0, अतः 4। तुलना क्रिस्टलन के समय के CHUR से करनी है, वर्तमान 0.512638 से नहीं, जिससे भ्रामक रूप से बड़ा ऋणात्मक मान मिलता।
  13. एक मैंटल स्रोत में किसी तत्व का 0.50 ppm है जिसका समग्र विभाजन गुणांक D = 0.01 है। बैच गलन हेतु C(L)/C₀ = 1/[D + F(1 − D)] और गलित-अंश F = 0.10 लेते हुए, गलित में सांद्रता, ppm में एक दशमलव स्थान तक, ____ है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 4.6

    C(L)/C₀ = 1/[0.01 + 0.10 × (1 − 0.01)] = 1/(0.01 + 0.099) = 1/0.109 = 9.174। C(L) = 0.50 × 9.174 = 4.587, जो 4.6 ppm पूर्णांकित होता है। संक्षिप्त 1/F = 10 (केवल D = 0 हेतु वैध) से 5.0 मिलता।
  14. एक संगत ज़िरकॉन का रेडियोजनिक ²⁰⁶Pb/²³⁸U परमाणु अनुपात 0.30 है। λ(²³⁸U) = 1.55125 × 10⁻¹⁰ yr⁻¹ लें और संबंध ²⁰⁶Pb/²³⁸U = e^(λt) − 1 प्रयोग करें। उसकी आयु, Ma में निकटतम 10 Ma तक, ____ है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 1690

    t = ln(1 + 0.30)/λ = 0.262364/(1.55125 × 10⁻¹⁰) = 1.691 × 10⁹ yr = 1691 Ma, जो निकटतम 10 Ma तक 1690 Ma है। 0.30/λ (लगभग 1934 Ma) लेना चरघातांकी की उपेक्षा करता है और आयु को अधिक आँकता है।
  15. क्षेत्र-संबंध दर्शाते हैं कि एक ग्रेनाइट लगभग 2,700 Ma पर क्रिस्टलित हुआ और उसके ज़िरकॉनों ने एक ही घटना में सीसा खोया। वे कॉन्कॉर्डिया वक्र पर 2,700 Ma पर ऊपरी प्रतिच्छेद व 600 Ma पर निचले प्रतिच्छेद वाली डिस्कॉर्डिया बनाते हैं। निचला प्रतिच्छेद किसका काल देता है?

    1. ग्रेनाइट का क्रिस्टलन, क्योंकि ज़िरकॉन निचले प्रतिच्छेद पर बढ़ना आरंभ करता है
    2. वर्तमान दिन, क्योंकि सीसा-हानि सदैव हाल की प्रक्रिया होती है
    3. सीसा-हानि की एकल घटना, जैसे कोई कायांतरी घटना, लगभग 600 Ma पूर्व
    4. पृथ्वी की आयु, क्योंकि प्रत्येक जीवा को वक्र के मूल-बिंदु तक पीछे बढ़ाया जाता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — सीसा-हानि की एकल घटना, जैसे कोई कायांतरी घटना, लगभग 600 Ma पूर्व

    एक ही आयु के ज़िरकॉनों से सीसा-हानि की एकल घटना में ऊपरी प्रतिच्छेद क्रिस्टलन-आयु देता है और निचला प्रतिच्छेद हानि का काल, यहाँ लगभग 600 Ma पूर्व। शून्य के निकट निचला प्रतिच्छेद हाल की या सतत हानि दर्शाता, जो भ्रामक सामान्यीकरण है; जीवा पृथ्वी की आयु नहीं बताती, और यहाँ ज़िरकॉन-वृद्धि का काल ऊपरी प्रतिच्छेद से मिलता है।
  16. किसी शैल-समूह की क्रिस्टलन-आयु देने हेतु Rb-Sr संपूर्ण-शैल समकाल-रेखा के लिए कौन-सी शर्तें आवश्यक हैं?

    1. नमूने सहजात हैं और समान प्रारंभिक ⁸⁷Sr/⁸⁶Sr से आरंभ हुए
    2. सभी नमूनों का आज समान ⁸⁷Rb/⁸⁶Sr है, ताकि वे एक सघन गुच्छ के रूप में आलेखित हों
    3. Rb-Sr तंत्र क्रिस्टलन के बाद से बंद रहा है
    4. नमूनों के ⁸⁷Rb/⁸⁶Sr में मापनीय विस्तार है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — नमूने सहजात हैं और समान प्रारंभिक ⁸⁷Sr/⁸⁶Sr से आरंभ हुए; C — Rb-Sr तंत्र क्रिस्टलन के बाद से बंद रहा है; D — नमूनों के ⁸⁷Rb/⁸⁶Sr में मापनीय विस्तार है

    रेखा के लिए ऐसे बिंदु चाहिए जो उसके अनुदिश फैले हों, उन सहजात नमूनों से जिनका प्रारंभिक अनुपात समान हो और जिन्होंने बंद तंत्र की तरह व्यवहार किया हो। यदि सभी नमूनों का ⁸⁷Rb/⁸⁶Sr समान होता तो वे एक गुच्छ बनाते और कोई प्रवणता फिट न हो पाती, अतः समान अनुपात विधि को समर्थन नहीं बल्कि विफल करते हैं।