अभियांत्रिकी भूविज्ञान: शैल व मृदा के गुण, भंजन मापदंड, शैल-संहति वर्गीकरण, स्वस्थाने प्रतिबल, संरचनाएँ व ढाल

यह अध्याय भाग B1 के शीर्षक “अभियांत्रिकी भूविज्ञान” का उत्तर देता है: “शैलों व मृदाओं के भौतिक-यांत्रिक गुण; शैल सूचकांक परीक्षण; शैल भंजन मापदंड (मोर-कूलॉम, ग्रिफ़िथ व हॉक-ब्राउन); शैल असांतत्यों की अपरूपण सामर्थ्य; शैल-संहति वर्गीकरण (RMR व Q प्रणालियाँ); स्वस्थाने प्रतिबल; बाँधों, सुरंगों व उत्खनन-स्थलों सहित अभियांत्रिक संरचनाओं के निर्माण में भूवैज्ञानिक कारक; ढाल स्थायित्व का विश्लेषण।” यह भूविज्ञान एवं भूभौतिकी (GG) पेपर के भाग B1 का पहला विषय है। इसके संख्यात्मक प्रश्न सामर्थ्य मापदंड, RQD, RMR व Q, स्वस्थाने प्रतिबल तथा ढालों के सुरक्षा गुणांक हैं।

1. शैलों व मृदाओं के भौतिक-यांत्रिक गुण

भौतिक (सूचकांक) गुण बताते हैं कि पदार्थ क्या है; यांत्रिक गुण बताते हैं कि वह भार का उत्तर कैसे देता है। शैल के लिए मूल गुण घनत्व, इकाई भार, जल-अंश व सरंध्रता n = V_v/V हैं। मृदा में प्रावस्था-संबंध ठोस, जल व वायु को जोड़ते हैं। रिक्ति-अनुपात e = V_v/V_s लेने पर: n = e/(1 + e), e = n/(1 − n), S·e = w·G (S संतृप्ति, w जल-अंश, G ठोस कणों का विशिष्ट गुरुत्व), γ_d = Gγ_w/(1 + e) तथा γ_sat = (G + e)γ_w/(1 + e)। हल उदाहरण: G = 2.70, e = 0.80, γ_w = 9.81 kN/m³ से γ_sat = 3.50 × 9.81/1.80 = 19.1 kN/m³ व γ_d = 14.7 kN/m³ मिलते हैं।

महीन मृदाएँ एटरबर्ग सीमाओं से वर्णित होती हैं: द्रव सीमा w_L, सुघट्य सीमा w_P तथा सुघट्यता सूचकांक PI = w_L − w_P (उच्च PI का अर्थ मृत्तिका-समृद्ध, फूलने-प्रवण)। सामर्थ्य टरज़ागी के प्रभावी प्रतिबल σ′ = σ − u से τ_f = c′ + σ′ tan φ′ द्वारा चलती है, अतः रंध्र-जल दाब u कुल भार बदले बिना मृदा व शैल दोनों को दुर्बल करता है।

  • UCS σ_c: अपरिरुद्ध बेलन का शिखर अक्षीय प्रतिबल (लंबाई : व्यास लगभग 2.5 से 3)। तनन सामर्थ्य σ_t कहीं कम है, σ_c का लगभग दसवाँ भाग।
  • यंग गुणांक E लगभग रैखिक भाग में प्रतिबल ÷ विकृति है; पॉइसन अनुपात ν ऋण पार्श्व विकृति ÷ अक्षीय विकृति है।
  • पर्णित शैल पर्णन के अनुदिश भारित होने पर सबसे दुर्बल होता है, शेल भीगने पर सामर्थ्य खोता है, और संधियुक्त संहति अपनी अक्षत क्रोड से दुर्बल होती है।
⚠️ क्रोड की सामर्थ्य शैल-संहति की सामर्थ्य नहीं है
अक्षत क्रोड का UCS सीधे सुरंग या ढाल की गणना में लेना संधियुक्त संहति की सामर्थ्य को बढ़ाकर आँकता है। नीचे के मापदंड, असांतत्य सामर्थ्य व वर्गीकरण इसी अंतर को पाटते हैं।

2. शैल सूचकांक परीक्षण

सूचकांक परीक्षण त्वरित, सस्ते व अनियमित टुकड़ों पर चलने वाले हैं; वे महँगे प्राचलों (UCS, टिकाऊपन) से सहसंबद्ध हैं पर उनका स्थान नहीं लेते।

  • बिंदु-भार परीक्षण: क्रोड या ढेले को शंक्वाकार प्लेटों के बीच भार P से कुचला जाता है। I_s = P/D_e², जहाँ व्यास D की क्रोड के व्यासीय परीक्षण में D_e² = D² तथा अक्षीय या ब्लॉक परीक्षण में D_e² = 4A/π (A प्लेट-बिंदुओं से गुज़रता न्यूनतम अनुप्रस्थ-काट)। आकार-संशोधित: I_s(50) = F·I_s, F = (D_e/50)^0.45। UCS लगभग I_s(50) का 20 से 25 गुना होता है, यह अँगूठा-नियम है जिसे प्रत्येक शैल हेतु अंशांकित करना होता है।
  • ब्राज़ीलियन परीक्षण (अप्रत्यक्ष तनन): व्यास D व मोटाई t की चकती को व्यास के आर-पार विफलता-भार P तक दबाने पर σ_t = 2P/(πDt) मिलता है; भार संपीडक होने पर भी चकती तनन में फटती है।
  • श्मिट रिबाउंड हैमर: प्रतिक्षेप संख्या R पृष्ठ-कठोरता मापती है और UCS से सहसंबद्ध है, पर दिशा, खुरदरापन, नमी व अपक्षय उसे प्रभावित करते हैं।
  • स्लेक-टिकाऊपन परीक्षण: सुखाए ढेले 2 mm जाली के ड्रम में, जो आंशिक रूप से जल में डूबा है, 10-10 मिनट के दो चक्र घूमते हैं; I_d2 = (बची शुष्क संहति ÷ प्रारंभिक शुष्क संहति) × 100। निम्न मान (शेल, मडस्टोन, अपक्षयित शैल) गीले-सूखे होने पर विखंडन की चेतावनी है।
  • मोरंग परीक्षण (लॉस एंजिल्स अपघर्षण, आघात, संदलन) टूटे अंश का प्रतिशत देते हैं: कम मान का अर्थ अधिक मज़बूत मोरंग।

हल उदाहरण। 50 mm क्रोड पर व्यासीय परीक्षण P = 10 kN पर विफल होता है: I_s = 10 000/2500 = 4.0 MPa; D = 50 mm पर F = 1, अतः I_s(50) = 4.0 MPa और अंशांकन गुणक 24 पर UCS ≈ 96 MPa। 60 mm क्रोड में F = (60/50)^0.45 = 1.086।

⚠️ सूचकांक सामर्थ्य नहीं है
I_s(50) UCS नहीं है, और 20 से 25 केवल मोटा औसत है। चिकनी सूखी सतह पर ऊँची श्मिट संख्या उसके पीछे की संधियों के बारे में कुछ नहीं कहती।

3. शैल भंजन मापदंड: मोर-कूलॉम, ग्रिफ़िथ व हॉक-ब्राउन

भंजन मापदंड वह प्रतिबल-अवस्था (σ₁ ≥ σ₂ ≥ σ₃, संपीडन धनात्मक) है जिस पर शैल विफल होता है। मोर-कूलॉम: अपरूपण किसी तल पर तब विफल होता है जब τ = c + σ_n tan φ (संसंजन c, घर्षण कोण φ)। मुख्य प्रतिबलों में σ₁ = σ_c + σ₃ tan²(45° + φ/2), जहाँ σ_c = 2c cos φ/(1 − sin φ)। अपरूपण-तल में σ₂ समाहित है और वह σ₁ से 45° − φ/2 का कोण बनाता है। आवरण सीधा है, σ₂ की उपेक्षा होती है, और तनन-कट-ऑफ जोड़ा जाता है क्योंकि रेखा तनन सामर्थ्य को बढ़ाकर आँकती है। उदाहरण: c = 20 MPa, φ = 35° से σ_c = 76.8 MPa व tan²(62.5°) = 3.69, अतः σ₃ = 10 MPa पर σ₁ = 76.8 + 36.9 = 113.7 MPa।

ग्रिफ़िथ ने भौतिकी से तर्क किया: शैल में सूक्ष्म दीर्घवृत्तीय दरारें होती हैं, उनके सिरों पर तनन प्रतिबल सांद्रित होता है, और समग्र संपीडन में भी विफलता तब शुरू होती है जब सिरे का प्रतिबल पदार्थ की सामर्थ्य तक पहुँचे। σ₁ + 3σ₃ ≥ 0 हेतु: (σ₁ − σ₃)² = 8σ_t(σ₁ + σ₃); अन्यथा σ₃ = −σ_t। σ₃ = 0 रखने पर σ_c = 8σ_t; अपरूपण रूप τ² = 4σ_t(σ_t + σ_n), एक परवलय। वास्तविक शैलों में अनुपात बड़ा मिलता है क्योंकि संपीडन दरारें बंद करता है और उनके आर-पार घर्षण कार्य करता है (संशोधित ग्रिफ़िथ)।

हॉक-ब्राउन आनुभविक है, अक्षत शैल के त्रिअक्षीय परीक्षणों पर बैठाया गया और शैल-संहतियों तक मापित: σ₁ = σ₃ + σ_ci (m_b σ₃/σ_ci + s)^a। अक्षत शैल हेतु m_b = m_i, s = 1, a = 0.5। संहति हेतु, भूवैज्ञानिक सामर्थ्य सूचकांक GSI (0 से 100) व विक्षोभ गुणक D (0 अविक्षुब्ध, 1 विस्फोट से अत्यधिक क्षतिग्रस्त) के साथ: m_b = m_i exp[(GSI − 100)/(28 − 14D)], s = exp[(GSI − 100)/(9 − 3D)], a = ½ + (e^(−GSI/15) − e^(−20/3))/6। तब σ_c = σ_ci s^a व σ_t = −s σ_ci/m_b। उदाहरण: σ_ci = 80 MPa, m_b = 2, s = 0.01, a = 0.5, σ₃ = 5 MPa से σ₁ = 5 + 80 √(0.125 + 0.01) = 34.4 MPa।

⚠️ तीनों को मिलाइए नहीं
σ_c = 8σ_t केवल ग्रिफ़िथ का है; हॉक-ब्राउन में σ_c = σ_ci s^a। तीनों में से कोई σ₂ का उपयोग नहीं करता।

4. शैल असांतत्यों की अपरूपण सामर्थ्य

असांतत्य (संधि, संस्तरण-तल, पर्णन, भ्रंश) में तनन सामर्थ्य लगभग नहीं होती, अतः निम्न प्रतिबल पर संहति की सामर्थ्य इन सतहों पर सर्पण की सामर्थ्य है। यह खुरदरापन, भित्ति-सामर्थ्य, भराव, जल व अभिलंब प्रतिबल σ_n पर निर्भर है। स्वच्छ चिकनी सतह τ = σ_n tan φ_b का पालन करती है (मूल घर्षण कोण φ_b, c ≈ 0)।

  • पैटन (झुकाव i वाले आरी-दंत उभार): निम्न σ_n पर ब्लॉक दाँतों पर चढ़ता है, τ = σ_n tan(φ_b + i); उच्च σ_n पर दाँत कट जाते हैं और सामर्थ्य c_a + σ_n tan φ_r हो जाती है (द्विरेखीय आवरण)।
  • बार्टन व चौबे: τ = σ_n tan[φ_r + JRC log₁₀(JCS/σ_n)]। JRC संधि-खुरदरापन गुणांक है (चिकने समतल हेतु 0 से खुरदरे तरंगित हेतु लगभग 20), JCS भित्ति की संपीडन सामर्थ्य, φ_r अवशिष्ट घर्षण कोण। σ_n बढ़ने पर खुरदरापन-पद घटता है और σ_n = JCS पर लुप्त हो जाता है।
  • भराव व जल: उभार के आयाम से मोटा भराव सामर्थ्य को नियंत्रित करता है (मृत्तिका-परत मृत्तिका जितनी ही दुर्बल हो सकती है), और जल-दाब u से σ_n के स्थान पर σ_n − u आता है।

हल उदाहरण। JRC = 10, JCS = 100 MPa, σ_n = 1 MPa, φ_r = 30°: खुरदरापन-पद 10 × log₁₀(100) = 20°, अतः τ = tan 50° = 1.19 MPa। σ_n = 10 MPa पर पद 10°, τ = 10 tan 40° = 8.39 MPa, और τ/σ_n 1.19 से घटकर 0.84 रह गया।

🎯 पैमाने का प्रभाव
संधि लंबी होने पर JRC व JCS घटते हैं, क्योंकि बड़े पैमाने की तरंगता कम ढलवाँ और बड़ी भित्तियाँ दुर्बल होती हैं, अतः छोटे नमूनों के परीक्षण लंबी संधि की सामर्थ्य को बढ़ाकर आँकते हैं।

5. शैल-संहति वर्गीकरण: RQD, RMR व Q प्रणाली

वर्गीकरण कुछ प्रेक्ष्य प्राचलों से संहति को अंक देता है और अंक को स्थिर-अवधि, सामर्थ्य व आधार-समर्थन से जोड़ता है। RQD (डीयर) कम से कम 10 cm के स्वस्थ क्रोड-टुकड़ों का योग ÷ क्रोड-चाल, प्रतिशत में है (ड्रिलिंग से बने टूट अपवर्जित)। वर्ग: 25 से नीचे अति निम्न, 25 से 50 निम्न, 50 से 75 मध्यम, 75 से 90 अच्छा, 90 से 100 उत्कृष्ट। प्रति घन मीटर संधियों से RQD ≈ 115 − 3.3 J_v (J_v लगभग 4.5 से कम हो तो 100)।

RMR (बिनियास्की, 1989) पाँच प्राचलों के अंक जोड़ता है: अक्षत UCS (अधिकतम 15), RQD (20), संधि-अंतराल (20), संधि-स्थिति (30) व भूजल (15), मूल योग अधिकतम 100। फिर अभिविन्यास समायोजन घटाया जाता है (अनुकूल हो तो शून्य)। समायोजित RMR के वर्ग तालिका में हैं; वर्ग I शैल 15 m विस्तार पर लगभग 20 वर्ष बिना आधार टिकता है, वर्ग V 1 m पर केवल लगभग आधा घंटा।

RMR वर्ग व उनसे सुझाई शैल-संहति सामर्थ्य
वर्गRMRवर्णनसंसंजन (kPa), घर्षण कोण
I81–100अति उत्तम400 से अधिक, 45° से अधिक
II61–80उत्तम300–400, 35°–45°
III41–60मध्यम200–300, 25°–35°
IV21–40निम्न100–200, 15°–25°
V21 से कमअति निम्न100 से कम, 15° से कम

Q प्रणाली (बार्टन, लीन व लंड, 1974) Q = (RQD/J_n)·(J_r/J_a)·(J_w/SRF) है: सापेक्ष ब्लॉक-आकार (J_n संधि-समूह संख्या), अंतर-ब्लॉक अपरूपण सामर्थ्य (J_r खुरदरापन, J_a परिवर्तन) तथा सक्रिय प्रतिबल (J_w जल-न्यूनन, शुष्क हेतु 1; SRF प्रतिबल-न्यूनन गुणक)। 10 से कम RQD को 10 लिया जाता है। Q लघुगणकीय है, 0.001 से 1000: 0.01 से नीचे अपवादतः निम्न, 0.01–0.1 अत्यंत निम्न, 0.1–1 अति निम्न, 1–4 निम्न, 4–10 मध्यम, 10–40 अच्छा, 40–100 अति अच्छा, 100–400 अत्यंत अच्छा, 400 से ऊपर अपवादतः अच्छा। आधार-समर्थन Q व D_e = विस्तार ÷ ESR से पढ़ा जाता है, जहाँ उत्खनन-समर्थन अनुपात ESR अस्थायी खुले स्थानों हेतु बड़ा और अत्यंत सुरक्षित चाहिए ऐसे खुले स्थानों हेतु छोटा होता है।

हल उदाहरण। Q: RQD = 70, J_n = 9, J_r = 1.5, J_a = 2, J_w = 1, SRF = 1 से Q = (70/9)(0.75)(1) = 5.83, मध्यम। RMR: अंक 7, 13, 10, 20, 10 का योग 60; −5 का अभिविन्यास समायोजन 55 देता है, वर्ग III। दोनों प्रणालियाँ मोटे तौर पर RMR ≈ 9 ln Q + 44 से जुड़ी हैं, और भूजल अंक 15 (शुष्क) लेने व अभिविन्यास समायोजन न करने पर GSI ≈ RMR(1989) − 5।

⚠️ वर्ग समायोजित RMR से तय होता है; Q गुणनफल है
अभिविन्यास-कटौती शैल-संहति को वर्ग-सीमा पार करा सकती है (62 से 57 वर्ग II को III कर देता है)। Q में गीली या परिवर्तित संधि J_w घटाती या J_a बढ़ाती है और Q तेज़ी से गिरता है, क्योंकि Q गुणनफल है, योग नहीं।

6. स्वस्थाने प्रतिबल

गहराई पर शैल उत्खनन से पहले ही प्रतिबलित होता है। ऊर्ध्वाधर प्रतिबल अधिभार का भार है, σ_v = γz (γ = 27 kN/m³ हेतु लगभग 0.027z MPa, z मीटर में)। क्षैतिज प्रतिबल σ_h = kσ_v है। पार्श्वतः परिरुद्ध प्रत्यास्थ संहति k = ν/(1 − ν) देती है (ν = 0.25 हेतु 0.33), जबकि दुर्बल या विसर्पी शैल व अधिक गहराई k = 1 की ओर जाते हैं। सतह के निकट k प्रायः अधिक होता है, क्योंकि विवर्तनिक संपीडन व अपरदनजन्य भार-मुक्ति क्षैतिज प्रतिबल ऊँचा रखती हैं; मापे मान 100/z + 0.3 ≤ k ≤ 1500/z + 0.5 (z मीटर में) में रहते हैं, यह चौड़ी पट्टी गहराई के साथ संकरी होती है।

मापन: जल-दाब भंजन (बोरहोल का सीलबंद अंतराल तब तक दाबित करें जब तक भित्ति न टूटे; भंजन व शट-इन दाब क्षैतिज प्रतिबल देते हैं), ओवरकोरिंग (बोरहोल में चिपके गेज का विकृति-मोचन) तथा फ़्लैट-जैक परीक्षण। उदाहरण: z = 600 m, γ = 27 kN/m³ से σ_v = 16.2 MPa; ν = 0.25 हेतु σ_h = 0.333 × 16.2 = 5.4 MPa।

खुला स्थान प्रतिबल सांद्रित करता है। वृत्ताकार सुरंग (किर्श हल) में भित्ति का स्पर्शरेखीय प्रतिबल शीर्ष (crown) व फ़र्श पर (3k − 1)σ_v तथा पार्श्व-भित्तियों पर (3 − k)σ_v है; k = 1 हेतु चारों ओर 2σ_v। k < 1/3 होने पर शीर्ष पर तनन आता है। σ_c की तुलना में उच्च भित्ति-प्रतिबल सुदृढ़ भंगुर शैल में स्फुटन व शैल-विस्फोट (rockburst) और दुर्बल शैल में निचोड़न (squeezing) करता है। उदाहरण: σ_v = 10 MPa, k = 0.5 से शीर्ष पर 5 MPa और पार्श्व-भित्तियों पर 25 MPa।

⚠️ शीर्ष पर तनन आ सकता है
“भित्ति पर 2σ_v” केवल k = 1 पर सही है। निम्न k पर पार्श्व-भित्तियाँ भारी भारित और छत हल्की भारित या तनन में होती है; उच्च k पर छत क्रांतिक है। संपीडन धनात्मक है, अतः ऋणात्मक परिणाम तनन है।

7. बाँधों, सुरंगों व उत्खनन-स्थलों में भूवैज्ञानिक कारक

  • बाँध। कंक्रीट गुरुत्व बाँधों को स्वस्थ शैल चाहिए; चाप-बाँधों को प्रणोद सहने हेतु सुदृढ़ पार्श्वाधार भी चाहिए; तटबंध-बाँध रिसाव व बैठाव नियंत्रित हों तो दुर्बल नींव सह लेते हैं। बाँध के नीचे का जल ऊर्ध्वमुखी दाब (uplift) बनाता है, जो प्रभावी अभिलंब प्रतिबल व सर्पण-प्रतिरोध घटाता है। पारगम्यता ल्यूजोन परीक्षण से जाँची जाती है: 1 ल्यूजोन 1 MPa पर प्रति मीटर परीक्षण-लंबाई 1 लीटर प्रति मिनट जल-ग्रहण है, जो 10⁻⁷ m/s की कोटि का है। परदा-ग्राउटिंग रिसाव घटाती है और समेकन-ग्राउटिंग नींव को कठोर बनाती है। जलाशय कार्स्ट से रिस सकता है, तटों पर खिसक सकता है, गाद से भर सकता है और विरले ही भूकंप प्रेरित कर सकता है।
  • सुरंगें। आधार-समर्थन (रॉक-बोल्ट, शॉटक्रीट, इस्पात पसलियाँ या अस्तर) चुनने हेतु शैल का वर्गीकरण (RMR, Q) किया जाता है। किसी बड़े भ्रंश या अपरूपण मंडल के अनुदिश व निकट सुरंग न चलाएँ; उसे बड़े कोण पर पार करें। तीव्र नत स्तरित शैल में नति-दिशा के अनुदिश की अक्ष के बजाय नति के आर-पार की अक्ष को वरीयता दें। मुख स्वस्थ शैल में हों, तीव्र ढाल पर ढीले कोलूवियम (colluvium) में नहीं।
  • कटान व उत्खनन-स्थल। स्थिर कोण कटान में उभरती संधियों, अपक्षय की गहराई (शैल पर अवशिष्ट मृदा), भूजल (जल-निकासी, रंध्र-दाब) व विस्फोट-क्षति पर निर्भर है। अपक्षयित शैल पर नींव को स्वस्थ शैल तक अलग-अलग गहराई मिलती है; चूनापत्थर की विलयन-गुहाएँ व प्रसारी मृत्तिका निर्माण से पहले परखी जानी चाहिए।
ℹ️ सुरंगों में भूमि का व्यवहार
निचोड़न (squeezing) उच्च प्रतिबल में दुर्बल शैल का धीमा भीतरी प्रवाह है; फूलना मृत्तिका-खनिजों व एनहाइड्राइट के जल लेने से आता है; शैल-विस्फोट उच्च प्रतिबल में सुदृढ़ शैल की आकस्मिक भंगुर विफलता है। समर्थन चुनने से पहले क्रियाविधि पहचानें।

8. ढाल स्थायित्व का विश्लेषण

सुरक्षा गुणांक FS = प्रतिरोधी ÷ चालक, सीमा-साम्य पर FS = 1। शैल में विफलता का ढंग पहले कटान-तल के सापेक्ष असांतत्य-ज्यामिति से तय होता है (गतिकी विश्लेषण, स्टीरियोनेट पर ध्रुव व घर्षण-वृत्त आलेखित कर)। समतलीय विफलता हेतु ऐसा तल चाहिए जिसकी दिशा कटान-तल की दिशा से लगभग 20° के भीतर हो, जो कटान में उभरे (तल की नति ψ_p कटान-नति ψ_f से कम) और घर्षण कोण से तीव्र हो (ψ_p > φ)। वेज विफलता हेतु दो तल चाहिए जिनकी प्रतिच्छेदन-रेखा कटान से बाहर φ से अधिक कोण पर निमग्न हो। टॉपलिंग हेतु ढाल के भीतर नत तीव्र परतें चाहिए। वृत्ताकार विफलता मृदा, अपशिष्ट या अत्यधिक विखंडित दुर्बल शैल में होती है।

भार W के शुष्क ब्लॉक हेतु, जो क्षेत्रफल A के तल पर ψ_p नति से टिका है: FS = (cA + W cos ψ_p tan φ)/(W sin ψ_p), जो c = 0 हो तो tan φ/tan ψ_p है। तल पर जल-दाब U अभिलंब बल घटाता है; तनन-दरार में जल-प्रणोद V चालक बल बढ़ाता है। ढाल के प्रति मीटर उदाहरण: W = 4000 kN, ψ_p = 35°, φ = 30°, c = 25 kPa, A = 20 m²: FS = (500 + 4000 cos 35° tan 30°)/(4000 sin 35°) = (500 + 1892)/2294 = 1.04।

झुकाव β के अनंत ढाल व गहराई z पर विफलता-तल हेतु: FS = [c + (γ z cos²β − u) tan φ]/(γ z sin β cos β)। शुष्क व असंसंजक होने पर यह tan φ/tan β हो जाता है, गहराई से स्वतंत्र। ढाल के समानांतर रिसाव व सतह पर जल-स्तर हो तो FS = (γ′/γ_sat) tan φ/tan β, शुष्क मान का लगभग आधा। वृत्ताकार विफलता का विश्लेषण फाँक-विधि से, प्रयास-केंद्र के सापेक्ष प्रतिरोधी व चालक आघूर्णों के अनुपात के रूप में, किया जाता है।

⚠️ सर्पण के विरुद्ध स्थिर होना स्थिर होना नहीं है
ढाल के भीतर नत तल समतलीय रूप से नहीं सरक सकता, पर कटान के भीतर नत तीव्र परतें गिर (topple) सकती हैं; φ से चपटा तल केवल शुष्क रहने तक सुरक्षित है। प्रत्येक विधा जाँचें। उपचार कारण के अनुसार हैं: कटान को चपटा या सोपानित करें, जल-निकास करें, बोल्ट या एंकर लगाएँ, शॉटक्रीट करें, ढीले ब्लॉक हटाएँ, या पाद-आधार दें।

मुख्य बिंदु

  • मृदा के प्रावस्था-संबंध: n = e/(1 + e), S·e = wG, γ_sat = (G + e)γ_w/(1 + e); सामर्थ्य σ′ = σ − u से चलती है। क्रोड-सामर्थ्य संधियुक्त संहति को बढ़ाकर आँकती है।
  • सूचकांक परीक्षण: I_s(50) = (D_e/50)^0.45 P/D_e², UCS ≈ 20–25 I_s(50); ब्राज़ीलियन σ_t = 2P/(πDt); स्लेक-टिकाऊपन I_d2 गीले-सूखे होने पर विखंडन मापता है।
  • मोर-कूलॉम रैखिक है, σ₁ = σ_c + σ₃ tan²(45° + φ/2); ग्रिफ़िथ में σ_c = 8σ_t; हॉक-ब्राउन आनुभविक व वक्र है, GSI व D से मापित। कोई भी σ₂ का उपयोग नहीं करता।
  • संधि-सामर्थ्य: पैटन τ = σ_n tan(φ_b + i); बार्टन τ = σ_n tan[φ_r + JRC log₁₀(JCS/σ_n)]। प्रयोगशाला मान लंबी संधियों को बढ़ाकर आँकते हैं; भराव व जल सामर्थ्य घटाते हैं।
  • RQD = 10 cm या अधिक के स्वस्थ टुकड़ों का योग ÷ क्रोड-चाल। RMR पाँच अंक (15, 20, 20, 30, 15) जोड़कर अभिविन्यास घटाता है। Q = (RQD/J_n)(J_r/J_a)(J_w/SRF) गुणनफल है; RMR ≈ 9 ln Q + 44।
  • σ_h = kσ_v, परिरुद्ध होने पर k = ν/(1 − ν); सुरंग-भित्ति प्रतिबल शीर्ष पर (3k − 1)σ_v, पार्श्व-भित्तियों पर (3 − k)σ_v। समतलीय FS = (cA + W cos ψ tan φ)/(W sin ψ); शुष्क असंसंजक अनंत ढाल FS = tan φ/tan β।

अभ्यास प्रश्न (18)

उत्तर खोलने से पहले प्रत्येक प्रश्न हल करें। हर व्याख्या सही विकल्प के साथ लुभावना गलत विकल्प भी बताती है, क्योंकि अंक वहीं जाते हैं।

  1. एक शैल-नमूने की सरंध्रता 0.20 है। उसका रिक्ति-अनुपात, जो रिक्तियों के आयतन को ठोस के आयतन से भाग देकर परिभाषित है, है

    1. 0.20, क्योंकि रिक्ति-अनुपात व सरंध्रता एक ही राशि के दो रूप हैं
    2. 0.25, क्योंकि दी गई सरंध्रता हेतु रिक्ति-अनुपात n/(1 − n) के बराबर होता है
    3. 0.80, क्योंकि रिक्ति-अनुपात आयतन के ठोस भाग के अंश के बराबर होता है
    4. 0.40, क्योंकि रिक्ति-अनुपात सदा शैल की सरंध्रता का दोगुना होता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — 0.25, क्योंकि दी गई सरंध्रता हेतु रिक्ति-अनुपात n/(1 − n) के बराबर होता है

    सरंध्रता n = V_v/V है और रिक्ति-अनुपात e = V_v/V_s, अतः e = n/(1 − n) = 0.20/0.80 = 0.25। e को n के बराबर मान लेना भ्रामक भूल है, पर हरों में अंतर है (कुल आयतन बनाम ठोस आयतन), और n शून्य न हो तो e सदा n से अधिक होता है। 0.80 ठोस-अंश है, रिक्ति-अनुपात नहीं।
  2. स्लेक-टिकाऊपन परीक्षण में एक मडस्टोन नमूना दो चक्रों के बाद अपनी शुष्क संहति का केवल 25 प्रतिशत बचाता है, जबकि एक ग्रेनाइट नमूना 99 प्रतिशत बचाता है। कौन-सा निष्कर्ष सबसे अच्छी तरह समर्थित है?

    1. मडस्टोन गीला-सूखा होने पर आसानी से बिखरेगा, अतः उसके खुले तलों को संरक्षण चाहिए
    2. मडस्टोन की तनन सामर्थ्य अधिक है, क्योंकि ड्रम ने उसके टुकड़ों को महीन कणों में बदल दिया
    3. परीक्षण-परिणाम निरर्थक है, क्योंकि स्लेक-टिकाऊपन केवल 90 प्रतिशत से अधिक RQD वाले शैल पर लागू होता है
    4. ग्रेनाइट की सरंध्रता दोनों में कम है, क्योंकि स्लेक-टिकाऊपन सरंध्रता का प्रत्यक्ष माप है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — मडस्टोन गीला-सूखा होने पर आसानी से बिखरेगा, अतः उसके खुले तलों को संरक्षण चाहिए

    स्लेक-टिकाऊपन सूचकांक गीले, सूखे व लुढ़कने की स्थिति में विखंडन के प्रति प्रतिरोध मापता है, अतः 25 प्रतिशत बनाम 99 प्रतिशत बताता है कि मडस्टोन खुला रहने पर बिखरता है और उसे शॉटक्रीट, सीलिंग या आवरण चाहिए। यह सरंध्रता या तनन सामर्थ्य का माप नहीं है, और ड्रम में संहति-हानि का अर्थ अधिक तनन सामर्थ्य नहीं है (उलटा अपेक्षित है)। परीक्षण ढेलों पर चलता है और उसमें RQD की कोई शर्त नहीं है।
  3. एक शैल मोर-कूलॉम मापदंड का पालन करता है, संसंजन c = 20 MPa व घर्षण कोण φ = 35° (संपीडन धनात्मक; मध्यवर्ती मुख्य प्रतिबल की उपेक्षा)। परिरोधी प्रतिबल σ₃ = 10 MPa पर उसकी अक्षीय सामर्थ्य लगभग है

    1. 56.9 MPa, संसंजन को ही अपरिरुद्ध सामर्थ्य मानकर, गुणक सहित
    2. 79.5 MPa, σ_c के साथ परिरोधी प्रतिबल पर गुणक tan²(45° − φ/2) लेकर
    3. 86.8 MPa, σ_c में बिना किसी घर्षण-गुणक के परिरोधी प्रतिबल जोड़कर
    4. 113.7 MPa, σ_c = 2c cos φ/(1 − sin φ) में σ₃ tan²(45° + φ/2) जोड़कर
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — 113.7 MPa, σ_c = 2c cos φ/(1 − sin φ) में σ₃ tan²(45° + φ/2) जोड़कर

    अपरिरुद्ध सामर्थ्य σ_c = 2 × 20 × cos 35°/(1 − sin 35°) = 76.8 MPa तथा गुणक tan²(62.5°) = 3.69, अतः σ₁ = 76.8 + 10 × 3.69 = 113.7 MPa। 45° − φ/2 लेने से गुणक उलट जाता है (0.27, उत्तर 79.5), उसे छोड़ने पर केवल 10 MPa जुड़ता है (86.8), और c को σ_c मानने से घर्षण-पद छूट जाता है (56.9)।
  4. ग्रिफ़िथ, मोर-कूलॉम व हॉक-ब्राउन भंजन मापदंडों में सही अंतर कौन-सा कथन करता है?

    1. मोर-कूलॉम अपने संसंजन-पद के माध्यम से मध्यवर्ती मुख्य प्रतिबल को ध्यान में लेता है, जबकि अन्य दोनों मापदंड उसकी उपेक्षा करते हैं
    2. ग्रिफ़िथ संपीडन सामर्थ्य को तनन सामर्थ्य गुणा tan²(45° + φ/2) बताता है, जबकि मोर-कूलॉम आठ का निश्चित अनुपात बताता है
    3. हॉक-ब्राउन का आवरण त्रिअक्षीय आँकड़ों पर बैठा और GSI से मापित वक्र है, जबकि मोर-कूलॉम स्थिर c व φ वाली सीधी रेखा है
    4. ग्रिफ़िथ को GSI सहित शैल-संहतियों के त्रिअक्षीय परीक्षणों पर आनुभविक रूप से बैठाया गया, जबकि हॉक-ब्राउन दीर्घवृत्तीय दरारों के सिद्धांत से निकलता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — हॉक-ब्राउन का आवरण त्रिअक्षीय आँकड़ों पर बैठा और GSI से मापित वक्र है, जबकि मोर-कूलॉम स्थिर c व φ वाली सीधी रेखा है

    हॉक-ब्राउन आनुभविक वक्र आवरण है जिसके प्राचल m_b, s व a GSI से मिलते हैं, जबकि मोर-कूलॉम τ–σ_n में स्थिर c व φ सहित रैखिक है। उद्गम बदलने वाले दोनों विकल्प उलटे हैं: ग्रिफ़िथ दरार-सिद्धांत से आता है और हॉक-ब्राउन आनुभविक है। σ₂ वाला दावा असत्य है, क्योंकि तीनों में से कोई σ₂ का उपयोग नहीं करता। आठ का निश्चित अनुपात ग्रिफ़िथ का है, मोर-कूलॉम का नहीं।
  5. 150 cm की क्रोड-चाल में 28, 8, 15, 12, 40, 6 व 22 cm लंबाई के स्वस्थ टुकड़े हैं; शेष चाल खो गई। RQD की मानक परिभाषा (कम से कम 10 cm के टुकड़े) और वर्गों 25 से नीचे अति निम्न, 25 से 50 निम्न, 50 से 75 मध्यम, 75 से 90 अच्छा, 90 से 100 उत्कृष्ट के साथ RQD व वर्ग हैं

    1. 60 प्रतिशत, मध्यम
    2. 78 प्रतिशत, अच्छा
    3. 87 प्रतिशत, अच्छा
    4. 78 प्रतिशत, मध्यम
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — 78 प्रतिशत, अच्छा

    केवल कम से कम 10 cm के टुकड़े गिने जाते हैं: 28 + 15 + 12 + 40 + 22 = 117 cm, अतः RQD = 117/150 × 100 = 78 प्रतिशत, जो 75 से 90 के वर्ग, अच्छा, में है। 8 cm व 6 cm के टुकड़े जोड़ने पर 131 cm व 87 प्रतिशत मिलता है, जो क्रोड-प्राप्ति है, RQD नहीं। केवल 20 cm से लंबे टुकड़े गिनने पर 60 प्रतिशत आता है। 78 प्रतिशत मध्यम नहीं है, क्योंकि मध्यम वर्ग 75 पर समाप्त होता है।
  6. Q प्रणाली में एक स्वच्छ व खुरदरा संधि-समूह मृदु मृत्तिका से लिप जाता है और बहता जल ले जाने लगता है। अन्य प्राचल अपरिवर्तित रहें तो Q पर प्रभाव का कौन-सा वर्णन सही है?

    1. J_r बढ़ता है क्योंकि मृत्तिका-लेप संधि भर देता है और J_w बढ़ता है क्योंकि उसमें जल बहता है, अतः Q बढ़ता है
    2. केवल RQD बदल सकता है, क्योंकि Q केवल ब्लॉक-आकार पर निर्भर है और संधि-भित्ति की स्थिति Q का भाग नहीं है
    3. J_a बढ़ता है और J_w घटता है, अतः अपरूपण सामर्थ्य व सक्रिय प्रतिबल वाले दोनों भागफल घटते हैं और Q घटता है
    4. J_a घटता है क्योंकि मृत्तिका विवर भर देती है, अतः अंतर-ब्लॉक सामर्थ्य बढ़ती है और Q बढ़ता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — J_a बढ़ता है और J_w घटता है, अतः अपरूपण सामर्थ्य व सक्रिय प्रतिबल वाले दोनों भागफल घटते हैं और Q घटता है

    मृत्तिका-लेप परिवर्तन-संख्या J_a बढ़ाता है, जिससे J_r/J_a घटता है, और बहता जल जल-न्यूनन गुणक J_w (शुष्क हेतु 1) घटाता है, जिससे J_w/SRF घटता है। Q गुणनफल है, अतः दोनों परिवर्तन उसे घटाते हैं। खुरदरी संधि J_r बढ़ाती, पर मृदु मृत्तिका-लेप संधि को खुरदरा नहीं बनाता; Q केवल RQD का फलन नहीं है, और मृत्तिका-लेप संधि को सुदृढ़ नहीं, दुर्बल करता है।
  7. 27 kN/m³ इकाई भार के शैल में 800 m गहराई पर शैल को 0.20 पॉइसन अनुपात वाली पार्श्वतः परिरुद्ध प्रत्यास्थ संहति मानकर क्षैतिज प्रतिबल आँका जाता है। क्षैतिज प्रतिबल लगभग है

    1. 5.4 MPa, ν/(1 − ν) गुणा ऊर्ध्वाधर प्रतिबल के बराबर
    2. 4.3 MPa, ν को ही क्षैतिज व ऊर्ध्वाधर प्रतिबल का अनुपात मानकर
    3. 10.8 MPa, प्रत्यास्थ शैल हेतु k = 0.5 को प्रचलित अनुपात मानकर
    4. 21.6 MPa, ऊर्ध्वाधर प्रतिबल के बराबर लिया हुआ (k = 1)
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — 5.4 MPa, ν/(1 − ν) गुणा ऊर्ध्वाधर प्रतिबल के बराबर

    ऊर्ध्वाधर प्रतिबल 27 × 800 = 21.6 MPa है। पार्श्व-परिरोध हेतु k = ν/(1 − ν) = 0.20/0.80 = 0.25, अतः σ_h = 0.25 × 21.6 = 5.4 MPa। केवल ν लेने पर 4.3 MPa आता है, जिसमें हर का (1 − ν) छूट जाता है; k = 1 (समान प्रतिबल) दुर्बल, विसर्पी शैल या बहुत अधिक गहराई हेतु है, इस प्रत्यास्थ स्थिति हेतु नहीं।
  8. प्रत्यास्थ शैल में, जहाँ ऊर्ध्वाधर प्रतिबल 12 MPa व क्षैतिज प्रतिबल 3 MPa (दोनों संपीडक) हैं, एक लंबी वृत्ताकार सुरंग बनाई जाती है। किर्श हल से, संपीडन धनात्मक लेकर, सुरंग-भित्ति पर शीर्ष (crown) व पार्श्व-भित्ति पर स्पर्शरेखीय प्रतिबल क्रमशः हैं

    1. 24 MPa व 24 MPa, क्योंकि भित्ति-प्रतिबल सर्वत्र ऊर्ध्वाधर प्रतिबल का दोगुना होता है
    2. −3 MPa (तनन) व 33 MPa, शीर्ष तनन में और पार्श्व-भित्ति भारी संपीडित
    3. 3 MPa व 33 MPa, शीर्ष का प्रतिबल संपीडक है क्योंकि वह क्षैतिज प्रतिबल के बराबर है
    4. 33 MPa व −3 MPa, शीर्ष पर संपीडक शिखर और पार्श्व-भित्ति में तनन
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — −3 MPa (तनन) व 33 MPa, शीर्ष तनन में और पार्श्व-भित्ति भारी संपीडित

    k = 3/12 = 0.25 के साथ शीर्ष-प्रतिबल (3k − 1)σ_v = (0.75 − 1) × 12 = −3 MPa, यानी तनन, और पार्श्व-भित्ति प्रतिबल (3 − k)σ_v = 2.75 × 12 = 33 MPa है। दोगुने σ_v का नियम केवल k = 1 पर लागू है। दोनों स्थान अदल-बदल देने पर तनन गलत स्थान पर आ जाता है, और शीर्ष को धनात्मक 3 MPa देना 3k − 1 के चिह्न की उपेक्षा है, जो k के 1/3 से कम होने पर ऋणात्मक होता है।
  9. एक शैल-कटान का तल 70° नति का है और संधियों का घर्षण कोण 30° है। कौन-सा असांतत्य समतलीय सर्पण को गतिकी की दृष्टि से संभव बनाता है?

    1. कटान-तल से बाहर की ओर 50° नत व उसकी दिशा के 10° के भीतर दिशा वाला असांतत्य-तल, क्योंकि वह उभरता है और घर्षण कोण से अधिक है
    2. ढाल के भीतर की ओर 50° नत व कटान-तल के समानांतर दिशा वाला असांतत्य-तल, क्योंकि वह घर्षण कोण से अधिक तीव्र है
    3. कटान-तल से बाहर की ओर 50° नत पर कटान-तल की दिशा से 70° पर बैठी दिशा वाला असांतत्य-तल, क्योंकि वह घर्षण कोण से अधिक तीव्र है
    4. कटान-तल से बाहर की ओर 20° नत व उसके समानांतर दिशा वाला असांतत्य-तल, क्योंकि कम नति ब्लॉक को आसानी से मुक्त करती है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — कटान-तल से बाहर की ओर 50° नत व उसकी दिशा के 10° के भीतर दिशा वाला असांतत्य-तल, क्योंकि वह उभरता है और घर्षण कोण से अधिक है

    समतलीय सर्पण हेतु ऐसा तल चाहिए जो कटान में उभरे (उससे बाहर की ओर, कटान-नति 70° से कम पर, नत हो), φ = 30° से अधिक तीव्र हो, और कटान-तल की दिशा के लगभग 20° के भीतर हो ताकि ब्लॉक बिना रोक हिल सके। केवल बाहर की ओर 50° नत व 10° के भीतर दिशा वाला तल तीनों शर्तें पूरी करता है। 20° का तल φ से चपटा है और घर्षण से टिकता है, ढाल के भीतर नत तल कटान में उभर नहीं सकता, और कटान-तल से 70° दिशा वाला तल अपनी ही पार्श्व-भुजाओं से बँधा रहता है।
  10. एक असंसंजक अनंत ढाल का शुष्क अवस्था में सुरक्षा गुणांक 1.40 है। फिर ढाल के समानांतर स्थायी रिसाव बहता है और जल-स्तर भू-सतह पर है। γ_sat = 20 kN/m³ व γ_w = 10 kN/m³ लें। सुरक्षा गुणांक हो जाता है

    1. 1.40, क्योंकि असंसंजक ढाल की सामर्थ्य जल पर निर्भर नहीं करती
    2. 0.90, रिसाव के प्रभाव हेतु निश्चित 0.5 घटाकर प्राप्त
    3. 0.70, क्योंकि FS में γ′/γ_sat = 0.5 का गुणा होता है
    4. 1.05, क्योंकि शुष्क प्रतिरोध का केवल एक-चौथाई भाग खोता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — 0.70, क्योंकि FS में γ′/γ_sat = 0.5 का गुणा होता है

    ढाल के समानांतर रिसाव व सतह पर जल-स्तर हेतु FS = (γ′/γ_sat) tan φ/tan β। यहाँ γ′ = 20 − 10 = 10 kN/m³, अतः γ′/γ_sat = 0.5 और FS = 0.5 × 1.40 = 0.70, जो 1 से कम है, इसलिए ढाल विफल होता है। जल सर्पण-तल पर प्रभावी प्रतिबल घटाता है, अतः शुष्क मान नहीं बचता, और यह गिरावट गुणात्मक गुणक है, निश्चित घटाव नहीं।
  11. शैल सूचकांक परीक्षणों के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?

    1. I_s(50) असंशोधित बिंदु-भार सूचकांक पर आकार-संशोधन F = (D_e/50)^0.45 लगाकर प्राप्त होता है
    2. ब्राज़ीलियन परीक्षण शैल-चकती की तनन सामर्थ्य σ_t = 2P/(πDt) देता है, यद्यपि लगाया गया भार संपीडक है
    3. चिकनी सूखी सतह पर ऊँची श्मिट प्रतिक्षेप संख्या सिद्ध करती है कि उसके पीछे की शैल-संहति की रेटिंग ऊँची है
    4. निम्न स्लेक-टिकाऊपन सूचकांक ऐसे शैल का सूचक है जो गीले-सूखे होने पर विखंडन का अच्छा प्रतिरोध करता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — I_s(50) असंशोधित बिंदु-भार सूचकांक पर आकार-संशोधन F = (D_e/50)^0.45 लगाकर प्राप्त होता है; B — ब्राज़ीलियन परीक्षण शैल-चकती की तनन सामर्थ्य σ_t = 2P/(πDt) देता है, यद्यपि लगाया गया भार संपीडक है

    बिंदु-भार सूचकांक घात 0.45 से 50 mm संदर्भ तक आकार-संशोधित होता है, और ब्राज़ीलियन परीक्षण संपीडक व्यासीय भार को 2P/(πDt) से तनन सामर्थ्य में बदलता है। प्रतिक्षेप संख्या केवल पृष्ठ के निकट की कठोरता दर्शाती है और संहति की संधियों के बारे में कुछ विश्वसनीय नहीं कहती। निम्न स्लेक-टिकाऊपन सूचकांक का अर्थ अच्छे प्रतिरोध का उलटा है: शैल आसानी से टूटता है।
  12. शैल असांतत्यों की अपरूपण सामर्थ्य के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?

    1. छोटे संधि-नमूने पर मापी प्रयोगशाला अपरूपण सामर्थ्य प्रायः लंबी क्षेत्र-संधि की सामर्थ्य को कम आँकती है
    2. बार्टन समीकरण में अभिलंब प्रतिबल बढ़ने पर खुरदरापन-योगदान JRC log₁₀(JCS/σ_n) घटता है
    3. जब मृत्तिका-भराव उभार के आयाम से मोटा हो, तो अपरूपण सामर्थ्य मुख्यतः भराव से निर्धारित होती है
    4. संधि में जल-दाब u प्रभावी अभिलंब प्रतिबल को σ_n + u कर देता है और इस प्रकार सामर्थ्य बढ़ाता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — बार्टन समीकरण में अभिलंब प्रतिबल बढ़ने पर खुरदरापन-योगदान JRC log₁₀(JCS/σ_n) घटता है; C — जब मृत्तिका-भराव उभार के आयाम से मोटा हो, तो अपरूपण सामर्थ्य मुख्यतः भराव से निर्धारित होती है

    σ_n बढ़ने पर JCS/σ_n घटता है, अतः लघुगणकीय खुरदरापन-पद घटता है (और σ_n = JCS पर लुप्त होता है), और उभारों से मोटा भराव भित्तियों को अलग कर देता है, इसलिए सर्पण शैल से नहीं, परत से नियंत्रित होता है। छोटे नमूने अपने आकार के सापेक्ष अधिक खुरदरे होते हैं और लंबी संधियों की सामर्थ्य को बढ़ाकर आँकते हैं (पैमाना प्रभाव), और जल-दाब प्रभावी अभिलंब प्रतिबल को σ_n − u तक घटाता है, बढ़ाता नहीं।
  13. बाँधों व सुरंगों में भूवैज्ञानिक कारकों के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?

    1. निचुड़ने वाली भूमि उच्च प्रतिबल में सुदृढ़ भंगुर शैल की आकस्मिक हिंसक विफलता है
    2. कंक्रीट बाँध के नीचे ऊर्ध्वमुखी दाब उसके आधार पर प्रभावी अभिलंब प्रतिबल व इस प्रकार सर्पण-प्रतिरोध घटाता है
    3. सुरंग को भ्रंश-मंडल के अनुदिश व निकट संरेखित करना सर्वोत्तम है, ताकि उसकी पूरी लंबाई एक ही समान दुर्बल शैल में रहे
    4. 1 ल्यूजोन जल-ग्रहण 1 MPa के परीक्षण-दाब पर प्रति मीटर परीक्षण-लंबाई 1 लीटर प्रति मिनट है
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — कंक्रीट बाँध के नीचे ऊर्ध्वमुखी दाब उसके आधार पर प्रभावी अभिलंब प्रतिबल व इस प्रकार सर्पण-प्रतिरोध घटाता है; D — 1 ल्यूजोन जल-ग्रहण 1 MPa के परीक्षण-दाब पर प्रति मीटर परीक्षण-लंबाई 1 लीटर प्रति मिनट है

    ऊर्ध्वमुखी दाब प्रभावी अभिलंब प्रतिबल व इसलिए आधार पर घर्षण घटाता है, और ल्यूजोन की परिभाषा 1 MPa पर प्रति मीटर 1 L/min है। निचोड़न दुर्बल शैल का धीमा भीतरी प्रवाह है; सुदृढ़ शैल की आकस्मिक हिंसक विफलता शैल-विस्फोट (rockburst) है। सुरंग को भ्रंश-मंडल के अनुदिश व निकट चलाने से उसकी पूरी लंबाई सबसे खराब भूमि में आती है, अतः संरेखण को मंडल को बड़े कोण पर काटना चाहिए।
  14. 60 mm व्यास की क्रोड पर व्यासीय बिंदु-भार परीक्षण P = 18 kN पर विफल होता है। I_s = P/D² (व्यासीय परीक्षण में D_e = D), F = (D_e/50)^0.45 तथा UCS = 22 × I_s(50) लें। UCS, निकटतम पूर्ण MPa में, ____ MPa है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 119

    I_s = 18 000 N / 3600 mm² = 5.00 MPa। F = (60/50)^0.45 = 1.2^0.45 = 1.0855। I_s(50) = 5.00 × 1.0855 = 5.43 MPa। UCS = 22 × 5.43 = 119.4, जो निकटतम पूर्ण संख्या में 119 MPa है। F भूल जाने पर 110 MPa आता है।
  15. एक शैल-संहति हॉक-ब्राउन मापदंड σ₁ = σ₃ + σ_ci (m_b σ₃/σ_ci + s)^a का पालन करती है, जहाँ σ_ci = 80 MPa, m_b = 2, s = 0.01 व a = 0.5। परिरोधी प्रतिबल σ₃ = 5 MPa पर उसकी अक्षीय सामर्थ्य σ₁, एक दशमलव स्थान तक, ____ MPa है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 34.4

    m_b σ₃/σ_ci = 2 × 5/80 = 0.125। s जोड़ने पर 0.135, और 0.135^0.5 = 0.3674। σ₁ = 5 + 80 × 0.3674 = 5 + 29.39 = 34.39, यानी 34.4 MPa। अपरिरुद्ध सामर्थ्य केवल σ_ci s^a = 8 MPa होती, अतः 5 MPa का परिरोध सामर्थ्य को चार गुने से अधिक बढ़ाता है।
  16. एक शैल-संधि में JRC = 12, JCS = 60 MPa व अवशिष्ट घर्षण कोण φ_r = 28° है। बार्टन समीकरण τ = σ_n tan[φ_r + JRC log₁₀(JCS/σ_n)] प्रयोग करें। अभिलंब प्रतिबल σ_n = 0.6 MPa पर शिखर अपरूपण सामर्थ्य, दो दशमलव स्थान तक, ____ MPa है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 0.77

    JCS/σ_n = 60/0.6 = 100, अतः log₁₀ = 2 और खुरदरापन-पद 12 × 2 = 24°। प्रभावी कोण 28° + 24° = 52°। τ = 0.6 × tan 52° = 0.6 × 1.2799 = 0.768, यानी 0.77 MPa। केवल φ_r लेने पर मात्र 0.32 MPa आता।
  17. बार्टन का Q इन मानों से गणित किया जाता है: RQD = 55, J_n = 9, J_r = 2, J_a = 1.5, J_w = 0.5 व SRF = 2.5। Q, एक दशमलव स्थान तक, ____ है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 1.6

    Q = (RQD/J_n)(J_r/J_a)(J_w/SRF) = (55/9)(2/1.5)(0.5/2.5) = 6.111 × 1.333 × 0.2 = 1.63, यानी 1.6, जो निम्न वर्ग (1 से 4) में आता है। तीन भागफल हैं: ब्लॉक-आकार 6.11, अंतर-ब्लॉक अपरूपण सामर्थ्य 1.33 व सक्रिय प्रतिबल 0.2।
  18. भार W = 3000 kN प्रति मीटर ढाल-लंबाई का एक शुष्क शैल-ब्लॉक ψ = 40° नति के तल पर टिका है। तल का क्षेत्रफल A = 15 m² प्रति मीटर, संसंजन c = 20 kPa व घर्षण कोण φ = 35° है। जल व तनन-दरार नहीं है। सुरक्षा गुणांक FS = (cA + W cos ψ tan φ)/(W sin ψ), दो दशमलव स्थान तक, ____ है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 0.99

    प्रतिरोधी बल = cA + W cos ψ tan φ = 20 × 15 + 3000 × 0.7660 × 0.7002 = 300 + 1609 = 1909 kN। चालक बल = W sin ψ = 3000 × 0.6428 = 1928 kN। FS = 1909/1928 = 0.99, अतः ब्लॉक सर्पण की सीमा पर है। संसंजन छोड़ने पर 0.83 आता।