प्लेट विवर्तनिकी: सीमाएँ, गतियाँ, चुंबकीय अभिलेख, प्लूम व संख्यात्मक प्रश्न

यह अध्याय भूविज्ञान एवं भूभौतिकी (GG) पेपर के भाग A के शीर्षक “प्लेट विवर्तनिकी” का उत्तर देता है: “प्लेट सीमाओं के प्रकार; प्लेट गतियाँ व चालक क्रियाविधियाँ; प्लेट सीमाओं पर प्रक्रियाएँ – ज्वालामुखीयता, भूकंपीयता, पर्वतजनन, सागर-नितल प्रसरण व चुंबकीय विसंगतियाँ तथा पुराचुंबकत्व, पश्च-चाप बेसिनों का निर्माण; महाद्वीपीय भ्रंशन (रिफ्टिंग), मैंटल प्लूम, तप्त स्थल; प्लेट गतियों से संबंधित संख्यात्मक प्रश्न”। यह तीन सीमा-प्रकार, यूलर-ध्रुव गति व चालक बल, सागर-नितल प्रसरण व पुराचुंबकत्व का चुंबकीय अभिलेख, कटकों, अधःक्षेपण मंडलों व संघट्टनों की प्रक्रियाएँ, पश्च-चाप बेसिन, भ्रंश-घाटियाँ, प्लूम व तप्त-स्थल पथ पढ़ाता है। संख्यात्मक प्रश्न विसंगति-आयु व दूरी से प्रसरण-दर, यूलर ध्रुव के परितः सापेक्ष वेग, नति से पुरा-अक्षांश (tan I = 2 tan λ), समुद्री पर्वत-शृंखला की आयु, तथा अधःक्षेपण-काल व खाई-दूरी हैं।

1. प्लेटें व प्लेट सीमाओं के प्रकार

स्थलमंडल दृढ़ प्लेटों में टूटा है जो दुर्बल दुर्बलतामंडल पर गति करती हैं: सामान्यतः सात प्रमुख गिनी जाती हैं (प्रशांत, उत्तर अमेरिकी, दक्षिण अमेरिकी, यूरेशियाई, अफ़्रीकी, भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई व अंटार्कटिक) और कई लघु, जैसे Nazca, Cocos, Caribbean, फ़िलीपीन सागर, अरब व Juan de Fuca। प्लेटों के आंतरिक भाग स्थिर हैं; लगभग सभी भूकंप, ज्वालामुखी व पर्वत-निर्माण सीमाओं पर संकेंद्रित हैं। सापेक्ष गति के आधार पर तीन प्रकार हैं।

प्लेट सीमाओं के तीन प्रकार
प्रकारसापेक्ष गति व परिणामउदाहरण
अपसारीप्लेटें दूर जाती हैं; नया स्थलमंडल बनता है; कटक या भ्रंश-घाटी, उथले सामान्य-भ्रंश भूकंप व बेसाल्टमध्य-अटलांटिक कटक, पूर्वी प्रशांत उभार, पूर्वी अफ़्रीकी भ्रंश-घाटी
अभिसारी: महासागर–महासागर व महासागर–महाद्वीपसघन महासागरीय प्लेट अधःक्षेपित होती है; खाई, ज्वालामुखी चाप, Benioff मंडल व बड़े प्रणोद भूकंपMariana, Aleutian, एंडीज़, अंडमान–सुमात्रा
अभिसारी: महाद्वीप–महाद्वीपउत्प्लावी महाद्वीपीय स्थलमंडल अधःक्षेपित नहीं होता; संघट्टन भू-पर्पटी को मोटा कर पर्वत-पट्टी व सिवनी बनाता हैहिमालय, आल्प्स
रूपांतरप्लेटें एक-दूसरे के पार सरकती हैं; स्थलमंडल न बनता है, न नष्ट होता है; नतिलंब-सर्पी भ्रंशनSan Andreas भ्रंश, न्यूज़ीलैंड का Alpine भ्रंश

रूपांतर भ्रंश दो कटक-खंडों, या कटक व खाई, को जोड़ता है; वह केवल विस्थापित कटक-शीर्षों के बीच सक्रिय होता है, और उसका निष्क्रिय विस्तार विभंग मंडल (fracture zone) है। त्रि-संधि (triple junction) वह बिंदु है जहाँ तीन प्लेटें मिलती हैं, जैसे Afar में, जहाँ लाल सागर, Aden की खाड़ी व मुख्य इथियोपियाई भ्रंश-घाटी मिलती हैं। भारत दो अभिसारी प्रकार दिखाता है: हिमालय भारत का यूरेशिया से संघट्टन है, और अंडमान–निकोबार–सुमात्रा सीमा अधःक्षेपण मंडल है जहाँ भारतीय प्लेट बर्मा–सुंडा पक्ष के नीचे उतरती है (2004 का सुमात्रा–अंडमान भूकंप, परिमाण लगभग 9.1, इसी पर टूटा)।

2. प्लेट गतियाँ व यूलर ध्रुव

यूलर प्रमेय के अनुसार गोले पर एक दृढ़ प्लेट की दूसरी के सापेक्ष गति पृथ्वी के केंद्र से जाती अक्ष के परितः घूर्णन है। उसका सतही सिरा यूलर ध्रुव है और दर कोणीय वेग ω है। ध्रुव से कोणीय दूरी θ पर रैखिक चाल v = ω R sin θ है, जिसमें ω प्रति इकाई समय रेडियन में है: ध्रुव पर शून्य और उससे 90° पर अधिकतम। अतः कटक के अनुदिश प्रसरण-दर ध्रुव से दूरी के साथ बदलती है, और रूपांतर भ्रंश उसके परितः लघु वृत्तों पर पड़ते हैं। R = 6,371 km के साथ चाप का 1° = 111.2 km है, और 1 cm/yr = 10 mm/yr = 10 km/Myr।

पूर्ण प्रसरण-दर वह दर है जिस पर दोनों प्लेटें अलग होती हैं; अर्ध-दर प्रत्येक की अक्ष से दूर जाने की दर है, और सममित प्रसरण में पूर्ण दर अर्ध-दर की दोगुनी होती है। विशिष्ट पूर्ण दरें मध्य-अटलांटिक कटक पर लगभग 2 से 4 cm/yr और पूर्वी प्रशांत उभार पर लगभग 15 cm/yr तक हैं; प्लेट-चालें 1 से 10 cm/yr हैं। भारत अब लगभग 5 cm/yr से उत्तर-उत्तर-पूर्व चल रहा है, पर संघट्टन से पहले 15 से 20 cm/yr से चलता था। सापेक्ष वेग चुंबकीय विसंगतियों, रूपांतर दिगंशों व GPS से मिलते हैं और सदिश की तरह जुड़ते हैं: किसी स्थिर निर्देश-तंत्र में एक-दूसरे की ओर सीधे 4 व 3 cm/yr से चलती दो प्लेटें 7 cm/yr से अभिसरित होती हैं। निरपेक्ष गति के लिए तप्त-स्थल जैसा निर्देश-तंत्र चाहिए।

3. चालक क्रियाविधियाँ

प्लेटें मैंटल संवहन की ठंडी, सुदृढ़ ऊपरी सीमा-परत हैं, और उन्हें चलाने वाले बल उसी संवहन के अंग हैं। स्लैब-पुल (slab pull) उस ठंडे, सघन अधःक्षेपित स्लैब का प्लेट पर खिंचाव है जो उससे जुड़ा है, और प्रायः सबसे बड़ा बल है। रिज-पुश (ridge push) उठे हुए कटक का, और पुराने होते स्थलमंडल के मोटे होती स्थलमंडल–दुर्बलतामंडल सीमा पर फिसलने से, गुरुत्वीय धक्का है; यह कई गुना छोटा है। आधार पर मैंटल कर्षण मैंटल-प्रवाह के अनुसार चला या रोक सकता है, और खाई-चूषण (trench suction) अध्यारोही प्लेट को खाई की ओर खींचता है। प्रतिरोधी बल अधःक्षेपण अंतरापृष्ठ पर घर्षण, संघट्टन व डूबते स्लैब के प्रति मैंटल का श्यान प्रतिरोध हैं।

साक्ष्य चालों में है। लंबे अधःक्षेपित स्लैबों से जुड़ी प्लेटें, जैसे प्रशांत, Nazca व भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई, सबसे तेज़ चलती हैं, जबकि कम अधःक्षेपी सीमा वाली प्लेटें, जैसे अफ़्रीकी, उत्तर अमेरिकी व अंटार्कटिक, सबसे धीमी; चाल प्लेट के क्षेत्रफल के बजाय अधःक्षेपी सीमा की लंबाई का अनुसरण करती है। महासागरीय स्थलमंडल पुराना होने पर ठंडा होता है और कुछ करोड़ वर्ष बाद नीचे के दुर्बलतामंडल से सघन हो जाता है, अतः डूब सकता है।

⚠️ प्लेटें संवहन-कोष्ठों पर तैरते बेड़े नहीं हैं
संवहन-कोष्ठों पर पट्टे की तरह निष्क्रिय ढोई जाती प्लेटों का पुराना चित्र स्वीकृत चित्र नहीं है। प्लेटें संवहन की ठंडी सीमा-परत हैं, और स्लैब-पुल व रिज-पुश वे ढंग हैं जिनसे संवहन उन पर कार्य करता है। मैंटल कर्षण स्लैब-पुल से कम महत्त्वपूर्ण है।

4. सागर-नितल प्रसरण, चुंबकीय विसंगतियाँ व पुराचुंबकत्व

Hess (1960–62) ने प्रस्तावित किया कि नई भू-पर्पटी कटकों पर बनती है, पार्श्व में खिसकती है और खाइयों पर नष्ट होती है। साक्ष्य यह है कि सागर-नितल की आयु कटक-अक्षों से सममित बढ़ती है व मुख्य महासागरीय बेसिनों में कहीं भी लगभग 200 Ma से अधिक नहीं है, अवसाद कटक के निकट पतला व दूर मोटा है, और तल आयु के साथ गहरा होता है। बेसाल्ट Curie तापमान (मैग्नेटाइट हेतु लगभग 580 °C) से ठंडा होते समय उस क्षण के क्षेत्र की दिशा में तापीय अवशेषी चुंबकत्व प्राप्त करता है। क्षेत्र अनियमित अंतरालों पर उत्क्रमित होता है; अंतिम उत्क्रमण, Brunhes–Matuyama, लगभग 0.78 Ma पर हुआ।

जहाज़ से खींचा चुंबकत्वमापी कुल क्षेत्र नापता है और एक प्रादेशिक मॉडल घटाता है। धनात्मक विसंगति वर्तमान (सामान्य) दिशा में चुंबकित भू-पर्पटी दर्शाती है, जिसका क्षेत्र वर्तमान क्षेत्र में जुड़ता है; ऋणात्मक विसंगति उत्क्रमित भू-पर्पटी दर्शाती है। परिणाम कटक के समांतर व उसके सममित धारियों का प्रतिरूप है (Vine व Matthews, और Morley, 1963)। धारियों का दिनांकित ध्रुवता काल-मापनी से मिलान तल की आयु व प्रसरण-दर: अर्ध-दर = x/t, पूर्ण दर = 2x/t देता है, जहाँ x अक्ष से आयु t की विसंगति की दूरी है। 1 Myr में 1 km की दूरी 1 mm/yr है।

पुराचुंबकत्व शैलों में जमी क्षेत्र-दिशा को पढ़ता है। अनेक हज़ार वर्षों के औसत में क्षेत्र भूकेंद्रित अक्षीय द्विध्रुव की तरह व्यवहार करता है, अतः नति I व उस अक्षांश λ में, जिस पर शैल बना, tan I = 2 tan λ संबंध है: I विषुवत् पर 0° व ध्रुव पर 90° है। सामान्य ध्रुवता में I उत्तरी गोलार्ध में धनात्मक (अधोमुखी) व दक्षिणी में ऋणात्मक है; उत्क्रमित ध्रुवता दोनों चिह्न पलट देती है। दिक्पात पुराध्रुव की ओर संकेत करता है। नति पुरा-अक्षांश देती है पर पुरा-देशांतर नहीं, क्योंकि अक्षीय द्विध्रुव क्षेत्र सभी देशांतरों पर समान है। भिन्न महाद्वीपों के आभासी ध्रुव-विचरण पथ तब मिल जाते हैं जब महाद्वीपों का साथ-साथ पुनर्निर्माण किया जाए। उदाहरण: अब 10° उ. पर स्थित सामान्य-ध्रुवता का बेसाल्ट जिसकी I = 45° है, उसका tan λ = 0.5, अतः λ = 26.6° उ.: उसकी प्लेट बनने के बाद से 16.6°, लगभग 1,840 km, दक्षिण की ओर खिसकी है।

5. प्लेट सीमाओं पर प्रक्रियाएँ

कटक। ऊपर उठता पेरिडोटाइट दाब-ह्रास से पिघलता है, जिससे थोलीआइटी बेसाल्ट (MORB) बनता है, और भू-पर्पटी उथले, छोटे, सामान्य-भ्रंश भूकंपों से बिंधी रहती है। अधःक्षेपण मंडलों में खाई, अग्र-चाप, ज्वालामुखी चाप व प्रायः पश्च-चाप होता है। स्लैब भूकंपों के ढलवाँ Benioff–Wadati मंडल के अनुदिश उतरता है जो लगभग 700 km तक पहुँचता है, पृथ्वी के सबसे गहरे भूकंप। लगभग 100 km गहराई पर स्लैब से मुक्त जल मैंटल-पाचर (mantle wedge) का गलनांक घटाता है (फ़्लक्स गलन), और कैल्क-क्षारीय, एंडेसाइटी चाप ज्वालामुखी वहाँ स्थित हैं जहाँ स्लैब लगभग 100 से 120 km गहरा है। जकड़ा हुआ प्लेट अंतरापृष्ठ, मेगाथ्रस्ट, सबसे बड़े भूकंप उत्पन्न करता है।

पर्वतजनन दो प्रकार का है। महासागर–महाद्वीप सीमाओं पर एंडीज़ (कॉर्डिलेरी) प्रकार में मैग्मीय चाप व वलन-प्रणोद पट्टी साथ होती हैं। संघट्टन पर्वत-पट्टियों में, महासागर के बंद होने के बाद, उत्प्लावी महाद्वीपीय स्थलमंडल मोटा होता है (भू-पर्पटी लगभग 70 km), प्रणोद-पटल एक पर एक चढ़ते हैं, और सिवनी जोड़ को चिह्नित करती है: हिमालय में मुख्य सीमांत, मुख्य सीमा व मुख्य केंद्रीय प्रणोद तथा Indus–Tsangpo सिवनी। भारत–यूरेशिया संघट्टन लगभग 50 Ma पर शुरू हुआ और जारी है।

पश्च-चाप बेसिन द्वीप-चाप के पीछे अध्यारोही प्लेट के विस्तारण से बनते हैं। कारण स्लैब-रोलबैक (slab rollback) है: जब पुराना, तीव्र ढाल का स्लैब प्लेटों के अभिसरण से तेज़ डूबता है, खाई महासागर की ओर पीछे हटती है और चाप के पीछे की प्लेट को खींचती है, जब तक पश्च-चाप प्रसरण से नई महासागरीय भू-पर्पटी न बन जाए, जैसे Mariana गर्त, Lau बेसिन, जापान सागर व अंडमान सागर में। Uyeda व Kanamori के दो अंत-प्रकार इसे समेटते हैं: Mariana प्रकार (पुराना, तीव्र ढाल का स्लैब, रोलबैक, विस्तारी पश्च-चाप) तथा Chile प्रकार (युवा, उत्प्लावी, मंद ढाल का स्लैब, प्रबल युग्मन, संपीडन, बड़े भूकंप, पश्च-चाप बेसिन नहीं)।

6. महाद्वीपीय भ्रंशन, मैंटल प्लूम व तप्त स्थल

भ्रंशन (रिफ्टिंग) महाद्वीपीय स्थलमंडल को पतला कर तोड़ता है। सक्रिय भ्रंशन में तप्त मैंटल ऊर्ध्वप्रवाह पहले भू-पर्पटी को गुंबदाकार उठाता है और फिर विस्तारण चलाता है; निष्क्रिय भ्रंशन में सुदूर-क्षेत्र का विस्तारी प्रतिबल स्थलमंडल को पतला करता है और ज्वालामुखीयता बाद में आती है। चरण हैं पतला होना, सामान्य भ्रंशन जो द्रोणियाँ (graben) बनाता है, द्वि-मोडल (bimodal) व क्षारीय ज्वालामुखीयता, और विस्तारण जारी रहने पर विखंडन, नई महासागरीय भू-पर्पटी व निष्क्रिय सीमाओं सहित। उदाहरण पूर्वी अफ़्रीकी भ्रंश-घाटी, Baikal, Rio Grande व Rhine हैं, और लाल सागर व Aden की खाड़ी इसी प्रकार बने युवा महासागर हैं।

मैंटल प्लूम मैंटल की गहराई से, संभवतः क्रोड–मैंटल सीमा से, उठता संकरा, तप्त, उत्प्लावी ऊर्ध्वप्रवाह है, जिसका बड़ा शीर्ष व पतली पूँछ होती है। शीर्ष दाब-ह्रास से पिघलकर बाढ़ बेसाल्ट उद्गारित करता है, जैसे लगभग 66 Ma के Deccan Traps। जब प्लेट लगभग स्थिर पूँछ के ऊपर चलती है, वह तप्त-स्थल पथ छोड़ती है, ज्वालामुखियों की शृंखला जो सक्रिय ज्वालामुखी से दूर पुरानी होती जाती है: Hawaiian–Emperor शृंखला का मोड़ लगभग 47 Ma पर है, और Deccan–Réunion पथ Chagos–Laccadive कटक व Mascarene पठार से होकर Réunion के सक्रिय ज्वालामुखी तक जाता है। प्लूम के साक्ष्यों में आयु-क्रमी शृंखलाएँ, बड़े उभार, उच्च ³He/⁴He अनुपात व टोमोग्राफ़ी में निम्न-वेग स्तंभ हैं।

⚠️ तप्त स्थल प्लेट सीमा नहीं है, पर उस पर स्थित हो सकता है
Hawaii प्रशांत प्लेट के भीतर, Yellowstone एक महाद्वीप के भीतर है, और Iceland मध्य-अटलांटिक कटक पर है, जहाँ प्लूम व कटक संपाती हैं। पथ प्लूम के ऊपर प्लेट की दिशा व चाल देता है, प्लूम की चाल नहीं। प्रत्येक तप्त स्थल का गहरा प्लूम होना सिद्ध नहीं है।

7. प्लेट गतियों के संख्यात्मक प्रश्न

प्लेट-गति संख्यात्मक प्रश्नों हेतु संबंध
प्रश्नसंबंधसावधानी
प्रसरण-दरअर्ध-दर = x/t; पूर्ण दर = 2x/tबताएँ कौन-सी दर; 1 km/Myr = 1 mm/yr
यूलर ध्रुव के परितः वेगv = ω R sin θरेडियन लें, या 1° = 111.2 km
पुरा-अक्षांशtan λ = ½ tan I; दूरी = Δλ × 111.2 km/°I का चिह्न ध्रुवता व गोलार्ध पर निर्भर
तप्त-स्थल शृंखलाआयु t = d/vv प्लूम के ऊपर प्लेट की चाल है
अधःक्षेपणस्लैब लंबाई = गहराई/sin(ढाल); काल = लंबाई/दर; क्षैतिज दूरी = गहराई/tan(ढाल)स्लैब को अपने ढाल के अनुदिश अभिसरण-दर से चलता माना जाता है

प्रसरण। आयु 20 Ma की एक विसंगति एक ओर अक्ष से 480 km पर है: अर्ध-दर 480/20 = 24 km/Myr = 24 mm/yr, पूर्ण दर 48 mm/yr। यूलर ध्रुव। ω = 0.6°/Myr व ध्रुव से 40° पर बिंदु हेतु v = 0.6 × 111.2 × sin 40° = 42.9 km/Myr = 4.3 cm/yr। तप्त-स्थल शृंखला। सक्रिय ज्वालामुखी से 1,500 km पर एक समुद्री पर्वत 25 Myr पुराना है, अतः प्लेट-चाल 60 km/Myr = 6 cm/yr है, और 2,100 km दूर का समुद्री पर्वत 2,100/60 = 35 Myr पुराना है।

अधःक्षेपण। एक स्लैब 30° ढाल पर 6 cm/yr = 60 km/Myr से धँसता है। 300 km गहराई तक पहुँचने के लिए वह 300/sin 30° = 600 km चलता है, जिसमें 600/60 = 10 Myr लगते हैं, और उस गहराई के ऊपर का ज्वालामुखी खाई से क्षैतिज रूप से 300/tan 30° = 520 km पर स्थित है। अधिक विशिष्ट चाप-गहराई 120 km व उसी ढाल पर दूरी 208 km है। गणना से पहले कोण व दर की इकाइयाँ सदैव जाँचें।

⚠️ प्रचलित भूलें
पूर्ण दर पूछे जाने पर अर्ध-दर बताना (2 का गुणक); ω R sin θ में रेडियन की जगह अंश लेना; ध्रुवता जाँचे बिना नति का चिह्न लेना; और अभिसरण-दर से स्लैब-लंबाई की जगह गहराई को भाग देना।

मुख्य बिंदु

  • तीन सीमा-प्रकार हैं: अपसारी (नया स्थलमंडल), अभिसारी (महासागर–महासागर, महासागर–महाद्वीप, महाद्वीप–महाद्वीप) व रूपांतर (न बनता, न नष्ट होता)। रूपांतर यूलर ध्रुव के परितः लघु वृत्तों पर पड़ते हैं, और त्रि-संधियाँ तीन प्लेटों को जोड़ती हैं।
  • प्लेट गति यूलर ध्रुव के परितः घूर्णन है, v = ω R sin θ, जिसमें 1° = 111.2 km व 1 cm/yr = 10 km/Myr। स्लैब-पुल सबसे बड़ा चालक बल है, रिज-पुश छोटा है, और प्लेटें मैंटल संवहन की ठंडी सीमा-परत हैं।
  • चुंबकीय धारियाँ कटकों के सममित हैं: धनात्मक विसंगतियाँ सामान्य रूप से चुंबकित भू-पर्पटी हैं। अर्ध-दर = x/t व पूर्ण दर = 2x/t। पुराचुंबकत्व पुरा-अक्षांश देने हेतु tan I = 2 tan λ का उपयोग करता है, पुरा-देशांतर नहीं, और ध्रुवता के साथ चिह्न पलटता है।
  • कटक दाब-ह्रास से MORB में पिघलते हैं; चाप स्लैब से मुक्त जल से पिघलते हैं, लगभग 700 km तक के Benioff मंडल के ऊपर। संघट्टन पर्वत-पट्टियाँ भू-पर्पटी को लगभग 70 km तक मोटा करती हैं, जैसे हिमालय में। पश्च-चाप बेसिन Mariana-प्रकार के अधःक्षेपण में स्लैब-रोलबैक से बनते हैं।
  • भ्रंश-घाटियाँ सक्रिय (पहले प्लूम-गुंबदन) या निष्क्रिय (सुदूर-क्षेत्र प्रतिबल) हैं, और विस्तारण जारी रहने पर विखंडन में समाप्त होती हैं। मैंटल प्लूम का शीर्ष बाढ़ बेसाल्ट (Deccan) उद्गारित करता है और पूँछ आयु-क्रमी तप्त-स्थल पथ बनाती है (Réunion से Chagos–Laccadive कटक)।
  • संख्यात्मक प्रश्न: समुद्री पर्वत-शृंखलाओं हेतु t = d/v, स्लैब लंबाई = गहराई/sin(ढाल) व काल = लंबाई/दर, खाई-दूरी = गहराई/tan(ढाल)। गणना से पहले अर्ध या पूर्ण दर, इकाइयाँ व ध्रुवता जाँचें।

अभ्यास प्रश्न (17)

उत्तर खोलने से पहले प्रत्येक प्रश्न हल करें। हर व्याख्या सही विकल्प के साथ लुभावना गलत विकल्प भी बताती है, क्योंकि अंक वहीं जाते हैं।

  1. किस प्रकार की प्लेट सीमा पर स्थलमंडल न बनता है, न नष्ट होता है, और प्लेटें एक-दूसरे के पार सरकती हैं?

    1. अपसारी सीमा, जैसे मध्य-अटलांटिक कटक
    2. अभिसारी सीमा, जैसे एंडीज़ की खाई
    3. रूपांतर सीमा, जैसे San Andreas भ्रंश
    4. संघट्टन सीमा, जैसे हिमालय
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — रूपांतर सीमा, जैसे San Andreas भ्रंश

    रूपांतर सीमा पर प्लेटें नतिलंब-सर्पी भ्रंश के अनुदिश क्षैतिज रूप से एक-दूसरे के पार सरकती हैं, अतः कोई स्थलमंडल न बनता है, न खपता है। कटक उसे बनाते हैं, और अधःक्षेपण व संघट्टन उसे खपाते या मोटा करते हैं।
  2. किसी विशेषता का उसके प्लेट-सीमा परिवेश के साथ कौन-सा युग्मन सही है?

    1. हिमालय: महासागर–महासागर अभिसरण जो द्वीप-चाप बनाता है
    2. पूर्वी अफ़्रीकी भ्रंश-घाटी: महाद्वीप के भीतर आरंभिक अपसारी सीमा
    3. मध्य-अटलांटिक कटक: रूपांतर सीमा जिसके अनुदिश प्लेटें सरकती हैं
    4. एंडीज़: महाद्वीप–महाद्वीप संघट्टन जिसमें अधःक्षेपण नहीं है
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — पूर्वी अफ़्रीकी भ्रंश-घाटी: महाद्वीप के भीतर आरंभिक अपसारी सीमा

    पूर्वी अफ़्रीकी भ्रंश-घाटी महाद्वीपीय विस्तारण है जो नए महासागर तक जा सकता है। हिमालय महाद्वीप–महाद्वीप संघट्टन है, मध्य-अटलांटिक कटक अपसारी है (रूपांतरों से विस्थापित), और एंडीज़ महासागर–महाद्वीप अधःक्षेपण सीमा है।
  3. लंबे अधःक्षेपित स्लैबों से जुड़ी प्लेटें (प्रशांत, Nazca, भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई) सबसे तेज़ चलती हैं, जबकि कम अधःक्षेपी सीमा वाली प्लेटें (अफ़्रीकी, अंटार्कटिक) सबसे धीमी। यह प्रतिरूप किस चालक बल का सर्वाधिक समर्थन करता है?

    1. रिज-पुश, क्योंकि सबसे लंबी कटक-सीमाओं वाली प्लेटें ही सबसे तेज़ चलती हैं
    2. प्लेट के क्षेत्रफल के अनुपाती आधार कर्षण, क्योंकि सबसे बड़ी प्लेटें ही सबसे तेज़ चलती हैं
    3. चंद्रमा का ज्वारीय कर्षण, जो प्रत्येक प्लेट को लगभग समान चाल से लगातार पश्चिम की ओर धकेलता है
    4. स्लैब-पुल, ठंडे, सघन स्लैब की ऋणात्मक उत्प्लावकता जो प्लेट को खींचती है
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — स्लैब-पुल, ठंडे, सघन स्लैब की ऋणात्मक उत्प्लावकता जो प्लेट को खींचती है

    तेज़ प्लेटें वे हैं जिनका स्लैब लंबा अधःक्षेपित है, जो स्लैब-पुल की ओर इंगित करता है। लंबी कटक-सीमाओं वाली प्लेटें, जैसे अफ़्रीकी व अंटार्कटिक, धीमी हैं, जो रिज-पुश को मुख्य बल मानने के विरुद्ध है। क्षेत्रफल के अनुपाती आधार कर्षण बड़ी अफ़्रीकी, यूरेशियाई व अंटार्कटिक प्लेटों को तेज़ बनाता, पर वे धीमी हैं, और चंद्रमा-चालित पश्चिमी धक्का प्लेटों में भेद नहीं करता।
  4. प्लेट गति को चलाने वाले बलों के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?

    1. प्लेट गति मुख्यतः पृथ्वी के घूर्णन से उठे Coriolis बल से चलती है
    2. स्लैब-पुल वह बल है जो प्लेट से जुड़ा ठंडा, सघन अधःक्षेपित स्लैब उस पर लगाता है
    3. अधःक्षेपित स्लैब इसलिए डूबता है कि वह आसपास के मैंटल से अधिक तप्त, अतः अधिक सघन है
    4. रिज-पुश उठे हुए कटक तथा स्थलमंडल के मोटे होते आधार पर प्लेट के फिसलने से उत्पन्न होता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — स्लैब-पुल वह बल है जो प्लेट से जुड़ा ठंडा, सघन अधःक्षेपित स्लैब उस पर लगाता है; D — रिज-पुश उठे हुए कटक तथा स्थलमंडल के मोटे होते आधार पर प्लेट के फिसलने से उत्पन्न होता है

    स्लैब-पुल व रिज-पुश दोनों वास्तविक चालक बल हैं, जिनमें स्लैब-पुल बड़ा है। Coriolis बल बहुत दुर्बल है और चालक नहीं है। स्लैब इसलिए डूबता है कि वह आसपास के मैंटल से अधिक ठंडा, अतः अधिक सघन है, क्योंकि अधिक तप्त पिंड कम सघन होता।
  5. समुद्र-तल पर खींचा गया चुंबकत्वमापी महासागरीय भू-पर्पटी की एक धारी पर धनात्मक चुंबकीय विसंगति दर्ज करता है। यह क्या दर्शाता है?

    1. वहाँ की भू-पर्पटी उत्क्रमित अंतराल में चुंबकित हुई थी, और उसका क्षेत्र पृथ्वी के वर्तमान क्षेत्र को प्रबल करता है
    2. वहाँ की भू-पर्पटी वर्तमान क्षेत्र की दिशा में चुंबकित है, अतः उसका क्षेत्र वर्तमान क्षेत्र में जुड़ता है
    3. वहाँ की भू-पर्पटी कटक-शीर्ष की सबसे युवा भू-पर्पटी है, चाहे वह जिस दिशा में चुंबकित हुई हो
    4. वहाँ की भू-पर्पटी ने अपना चुंबकत्व खो दिया है, क्योंकि वह बाद में अपने खनिजों के Curie तापमान से ऊपर तप्त हुई थी
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — वहाँ की भू-पर्पटी वर्तमान क्षेत्र की दिशा में चुंबकित है, अतः उसका क्षेत्र वर्तमान क्षेत्र में जुड़ता है

    धनात्मक विसंगति भू-पर्पटी के क्षेत्र व प्रादेशिक क्षेत्र का योग है, जो वहाँ अधिक है जहाँ भू-पर्पटी वर्तमान क्षेत्र की ही (सामान्य) दिशा में चुंबकित है। उत्क्रमित भू-पर्पटी घटाती है और ऋणात्मक विसंगति देती है। भू-पर्पटी की आयु चिह्न तय नहीं करती, और चुंबकत्व खो चुकी भू-पर्पटी कोई विसंगति न देती।
  6. 20 Ma आयु की एक चुंबकीय विसंगति एक पार्श्व पर कटक-अक्ष से 480 km पर है, और प्रसरण सममित है। पूर्ण प्रसरण-दर, mm/yr में, ____ है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 48

    अर्ध-दर = 480 km/20 Myr = 24 km/Myr = 24 mm/yr, क्योंकि 1 km/Myr, 1 mm/yr है। पूर्ण दर अर्ध-दर की दोगुनी, 48 mm/yr, है। 24 बताने पर अर्ध-दर आती है।
  7. भूकेंद्रित अक्षीय द्विध्रुव क्षेत्र में बने एक बेसाल्ट का माध्य नति व दिक्पात भलीभाँति निर्धारित है। वह क्या निर्धारित करता है, इस बारे में कौन-सा कथन सही है?

    1. नति पुरा-अक्षांश देती है, पर पुरा-देशांतर निर्धारित नहीं होता, क्योंकि द्विध्रुव क्षेत्र प्रत्येक देशांतर पर समान है
    2. दिक्पात स्थल का पुरा-अक्षांश देता है, जबकि ध्रुवता ज्ञात होने पर नति उसका पुरा-देशांतर देती है
    3. पुरा-अक्षांश व पुरा-देशांतर दोनों केवल नति से प्राप्त होते हैं, क्योंकि क्षेत्र देशांतरों के बीच भिन्न होता है
    4. नति गहरे मैंटल के ऊपर प्लेट की निरपेक्ष चाल निश्चित करती है, किसी निर्देश-तंत्र से स्वतंत्र
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    उत्तर: A — नति पुरा-अक्षांश देती है, पर पुरा-देशांतर निर्धारित नहीं होता, क्योंकि द्विध्रुव क्षेत्र प्रत्येक देशांतर पर समान है

    अक्षीय द्विध्रुव में क्षेत्र केवल अक्षांश पर निर्भर है, अतः नति (tan I = 2 tan λ) अक्षांश देती है, जबकि देशांतर का कोई चिह्न नहीं बचता। दिक्पात स्थल का ऊर्ध्वाधर अक्ष के परितः घूर्णन दर्ज करता है, अक्षांश नहीं, और एक नति प्लेट की निरपेक्ष चाल के बारे में कुछ नहीं कहती, जिसके लिए निर्देश-तंत्र चाहिए।
  8. 60 Myr पुराना एक लावा-प्रवाह अब 20° उ. पर स्थित है। उसमें सामान्य ध्रुवता का स्थायी चुंबकत्व है जिसकी नति −30° है, और क्षेत्र भूकेंद्रित अक्षीय द्विध्रुव था। पृथ्वी की त्रिज्या 6,371 km लें और केवल स्थिर उत्तरमुखी गति मानें। प्रवाह के बनने के बाद से माध्य उत्तरमुखी प्लेट-चाल, cm/yr में, एक दशमलव स्थान तक, ____ है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: 6.7

    tan λ = ½ tan(−30°) = −0.2887, अतः λ = −16.1°, जो दक्षिणी है क्योंकि ध्रुवता सामान्य है और I ऋणात्मक है। प्रवाह 16.1° द. से 20° उ. तक गया, 36.1° अक्षांश = 36.1 × 111.19 = 4,014 km। चाल = 4,014 km/60 Myr = 66.9 km/Myr = 6.7 cm/yr। λ को +16.1° लेने पर केवल 3.9° गति आती है, जो गलत परिणाम है।
  9. दो प्लेटों की सापेक्ष गति 0.6°/Myr कोणीय वेग वाले यूलर ध्रुव के परितः घूर्णन है। पृथ्वी की त्रिज्या 6,371 km लें। प्लेट सीमा पर ध्रुव से 40° चाप पर स्थित बिंदु पर सापेक्ष चाल, cm/yr में, एक दशमलव स्थान तक, ____ है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: 4.3

    ω = 0.6° = 0.6 × π/180 = 0.010472 rad/Myr के साथ v = ω R sin θ: v = 0.010472 × 6,371 × sin 40° = 66.71 × 0.6428 = 42.9 km/Myr = 4.3 cm/yr। अधिकतम sin 90° लेने पर 6.7 cm/yr आता।
  10. सक्रिय तप्त-स्थल ज्वालामुखी से 1,200 km पर एक समुद्री पर्वत 15 Myr पुराना है। मान लें प्लेट शृंखला की रेखा के अनुदिश स्थिर प्लूम के ऊपर अचर चाल से चली है। सक्रिय ज्वालामुखी से 3,000 km पर स्थित समुद्री पर्वत की आयु, Myr में, एक दशमलव स्थान तक, ____ है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: 37.5

    चाल = 1,200 km/15 Myr = 80 km/Myr (8 cm/yr)। आयु = 3,000/80 = 37.5 Myr। आयु को 3,000/1,200 से गुणा करने पर वही परिणाम आता है, जबकि दूरियाँ जोड़ना भूल है।
  11. एक स्लैब 45° ढाल पर है और अपने ढाल के अनुदिश 8 cm/yr की अभिसरण-दर से उतरता है। स्लैब के किसी बिंदु को खाई से 660 km गहराई तक पहुँचने में लगा समय, Myr में, एक दशमलव स्थान तक, ____ है।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: 11.7

    स्लैब के अनुदिश दूरी = 660/sin 45° = 933.4 km। दर = 8 cm/yr = 80 km/Myr। समय = 933.4/80 = 11.67 Myr, यानी 11.7 Myr। गहराई 660 km को 80 से भाग देने पर 8.25 Myr आता है, जो ढाल की अनदेखी है।
  12. Mariana गर्त जैसे विस्तारी पश्च-चाप बेसिन के निर्माण की सर्वोत्तम व्याख्या कौन-सी प्रक्रिया करती है?

    1. दो महाद्वीपों का संघट्टन, जो ज्वालामुखी चाप के पीछे के क्षेत्र में भू-पर्पटी को मोटा व उत्थित करता है
    2. रिज-पुश का प्रबल संपीडन, जो ज्वालामुखी चाप के पीछे प्लेट को नीचे की ओर मोड़कर बेसिन बनाता है
    3. स्लैब-रोलबैक, जिसमें पुराना, तीव्र ढाल का स्लैब प्लेटों के अभिसरण से तेज़ डूबता है, अतः खाई पीछे हटती है
    4. युवा, उत्प्लावी स्लैब का सपाट अधःक्षेपण जो दोनों प्लेटों को परस्पर जकड़ देता है और अध्यारोही प्लेट को संपीडित करता है
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    उत्तर: C — स्लैब-रोलबैक, जिसमें पुराना, तीव्र ढाल का स्लैब प्लेटों के अभिसरण से तेज़ डूबता है, अतः खाई पीछे हटती है

    जब स्लैब प्लेटों के अभिसरण से तेज़ डूबता है, खाई महासागर की ओर पीछे हटती है और अध्यारोही प्लेट खिंचती है, अतः पश्च-चाप भू-पर्पटी प्रसरण से बनती है। संघट्टन व सपाट, युग्मित अधःक्षेपण संपीडन व उत्थान देते हैं, विस्तारण नहीं, और रिज-पुश इतना दुर्बल है कि प्लेट को मोड़कर बेसिन नहीं बना सकता।
  13. प्रशांत प्लेट पर एक ज्वालामुखी शृंखला की आयु एक सक्रिय ज्वालामुखी से दूरी के साथ लगातार बढ़ती है। सर्वाधिक प्रत्यक्ष निष्कर्ष क्या है?

    1. प्लेट मैंटल के स्थिर तप्त स्रोत के ऊपर चली है, और शृंखला प्लेट की गति के अनुदिश प्रवृत्त है
    2. शृंखला रूपांतर भ्रंश पर है, और प्रत्येक ज्वालामुखी बारी-बारी तब फूटा जब भ्रंश उस बिंदु पर अंतिम बार सरका
    3. शृंखला के नीचे का अधःक्षेपण मंडल प्रत्येक ज्वालामुखी को बारी-बारी पोषित करता रहा, क्योंकि स्लैब प्लेट के नीचे पीछे हटा
    4. शृंखला उस अपसारी सीमा का अनुसरण करती है जो प्लेट के अनुदिश एक दिशा में धीरे-धीरे प्रसारित हुई है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — प्लेट मैंटल के स्थिर तप्त स्रोत के ऊपर चली है, और शृंखला प्लेट की गति के अनुदिश प्रवृत्त है

    एक रेखा के अनुदिश आयु-क्रम स्थिर गलन-विसंगति के ऊपर चलती प्लेट का चिह्न है, जैसे Hawaii शृंखला में, और रेखा गति की दिशा दर्ज करती है। रूपांतर भ्रंश, अधःक्षेपण रोलबैक व प्रसारित कटक किसी प्लेट के मध्य में एक सक्रिय ज्वालामुखी से दूर शृंखला के अनुदिश स्थिर आयु-वृद्धि नहीं देते।
  14. भारत के Deccan Traps का सामान्यतः किस तप्त स्थल से संबंध माना जाता है, जिसके परवर्ती पथ में Chagos–Laccadive कटक है?

    1. Hawaii
    2. Iceland
    3. Yellowstone
    4. Réunion
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — Réunion

    Deccan बाढ़ बेसाल्ट Réunion प्लूम से जुड़े हैं। जैसे भारत उत्तर की ओर बढ़ा, प्लूम ने Chagos–Laccadive कटक व Mascarene पठार छोड़े, जो Réunion के सक्रिय ज्वालामुखी पर समाप्त होते हैं। Hawaii, Iceland व Yellowstone भारत के पथ से बहुत दूर हैं।
  15. अधःक्षेपण मंडल के भूकंपों के बारे में कौन-सा कथन सही है?

    1. भूकंप केवल उथली भू-पर्पटी में, लगभग 100 km से ऊपर आते हैं, क्योंकि उसके नीचे स्लैब अत्यधिक गर्म है
    2. भूकंप-उत्स (hypocentres) एक Benioff–Wadati मंडल परिभाषित करते हैं जो अध्यारोही प्लेट के नीचे लगभग 700 km तक ढलता है
    3. भूकंप-उत्स महासागर की ओर, ज्वालामुखी चाप से दूर, गहरे होते जाते हैं, खाई की दीवार के ढाल के अनुदिश
    4. भूकंप निचले मैंटल में, क्रोड–मैंटल सीमा तक नीचे-नीचे, सर्वत्र सामान्य हैं
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — भूकंप-उत्स (hypocentres) एक Benioff–Wadati मंडल परिभाषित करते हैं जो अध्यारोही प्लेट के नीचे लगभग 700 km तक ढलता है

    ठंडे स्लैब में भूकंप खाई से चाप के नीचे ढलते तल का अनुरेखण करते हैं, और सबसे गहरे लगभग 700 km पर हैं। वे महाद्वीप या चाप की ओर गहरे होते हैं, महासागर की ओर नहीं, वे उथली भू-पर्पटी तक सीमित नहीं हैं, और गहरे निचले मैंटल में कोई नहीं आता।
  16. प्लेट सीमाओं पर मैग्मा-जनन के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?

    1. चाप ज्वालामुखी सीधे खाई-अक्ष के ऊपर स्थित हैं, जहाँ स्लैब पहले नीचे मुड़ता है
    2. मध्य-महासागरीय कटकों पर बेसाल्ट ऊपर उठते मैंटल पेरिडोटाइट के दाब-ह्रास गलन से बनता है
    3. चाप मैग्मा वहाँ बनते हैं जहाँ स्लैब से मुक्त जल मैंटल-पाचर का गलनांक घटाता है
    4. मध्य-महासागरीय कटकों पर गलन मुख्यतः अधःक्षेपित स्लैब से आए जल से प्रेरित होता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — मध्य-महासागरीय कटकों पर बेसाल्ट ऊपर उठते मैंटल पेरिडोटाइट के दाब-ह्रास गलन से बनता है; C — चाप मैग्मा वहाँ बनते हैं जहाँ स्लैब से मुक्त जल मैंटल-पाचर का गलनांक घटाता है

    कटक मैंटल के ऊपर उठने पर दाब-ह्रास से पिघलते हैं, और चाप फ़्लक्स गलन से, क्योंकि स्लैब से आया जल पाचर का सॉलिडस (solidus) तापमान घटाता है। चाप ज्वालामुखी वहाँ हैं जहाँ स्लैब लगभग 100 से 120 km गहरा है, खाई से स्थल की ओर, और कटकों में जल देने वाला कोई अधःक्षेपी स्लैब नहीं है।
  17. महाद्वीपीय भ्रंशन के बारे में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?

    1. निष्क्रिय भ्रंशन सुदूर-क्षेत्र के तनाव से चलता है, और ज्वालामुखीयता स्थलमंडल के पतला होने के बाद आती है
    2. भ्रंश-घाटियाँ तीव्र ढाल वाले उत्क्रम भ्रंशों से घिरी हैं जो भू-पर्पटी को छोटा व मोटा करते हैं
    3. भ्रंश-घाटी की ज्वालामुखीयता सदैव एंडेसाइटी व कैल्क-क्षारीय होती है, जैसी ज्वालामुखीय द्वीप-चापों में होती है
    4. सक्रिय भ्रंशन तप्त, उत्प्लावी मैंटल ऊर्ध्वप्रवाह के ऊपर भू-पर्पटी के गुंबदन से आरंभ होता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — निष्क्रिय भ्रंशन सुदूर-क्षेत्र के तनाव से चलता है, और ज्वालामुखीयता स्थलमंडल के पतला होने के बाद आती है; D — सक्रिय भ्रंशन तप्त, उत्प्लावी मैंटल ऊर्ध्वप्रवाह के ऊपर भू-पर्पटी के गुंबदन से आरंभ होता है

    निष्क्रिय भ्रंशन प्रतिबल-चालित है और सक्रिय भ्रंशन प्लूम-संबंधी गुंबदन से आरंभ होता है। भ्रंश-घाटियाँ सामान्य भ्रंशों से घिरी होती हैं क्योंकि भू-पर्पटी विस्तारित हो रही है, और भ्रंश-घाटी के मैग्मा द्वि-मोडल व प्रायः क्षारीय हैं, चाप-जैसे एंडेसाइट नहीं।