संवेदक व जैव-यंत्रीकरण: ट्रांसड्यूसर, संकेत अनुकूलन, जैव-विभव, शारीरिक मापन, चिकित्सा उपकरण व विद्युत सुरक्षा
2. संकेत अनुकूलन, तथा संवेदन व चिकित्सा में LASER
प्रतिरोधी संवेदक व्हीटस्टोन सेतु में पढ़ा जाता है। उत्तेजन V_s व गेज गुणक GF के साथ छोटी विकृति ε एक सक्रिय भुजा हेतु लगभग V_s·GF·ε/4 (चतुर्थांश सेतु), दो हेतु V_s·GF·ε/2 और चार हेतु V_s·GF·ε (पूर्ण सेतु) निर्गत देती है; अर्ध व पूर्ण सेतु ताप विचलन भी निरस्त करते हैं, क्योंकि वही परिवर्तन आसन्न भुजाओं में आता है। सेतु निर्गत यंत्रीकरण प्रवर्धक को, फिर फ़िल्टरन, पृथक्करण व ADC को जाता है।
- दाबविद्युत संवेदक बड़ी आंतरिक धारिता वाला आवेश स्रोत है, जिसे आवेश प्रवर्धक से पढ़ा जाता है: V_o = −q/C_f, केबल धारिता से स्वतंत्र, और पुनर्निवेश प्रतिरोधक द्वारा तय निम्न-आवृत्ति कट-ऑफ़ 1/(2πR_fC_f) सहित।
- LVDT या धारितीय सेतु ac वाहक से उत्तेजित होता है और कला-संवेदी संसूचक से विमॉडुलित, जो विस्थापन का परिमाण व चिह्न दोनों पुनः प्राप्त करता है।
- थर्मिस्टर को समांतर प्रतिरोधक से रैखिकीकृत किया जाता है, और फ़ोटोडायोड को पार-प्रतिबाधा प्रवर्धक से पढ़ा जाता है, V_o = −I_pR_f।
LASER (विकिरण के उद्दीपित उत्सर्जन द्वारा प्रकाश प्रवर्धन) को लब्धि माध्यम, पम्पन से बनाए रखा गया समष्टि प्रतिलोमन, व प्रकाशिक अनुनादक चाहिए; उसका प्रकाश एकवर्णी, संबद्ध व अत्यंत समांतरित है। संवेदन में यह त्वचा व ऊतक छिड़काव (परफ़्यूज़न) की लेज़र डॉप्लर प्रवाहमिति, प्रकाशिक संबद्धता टोमोग्राफ़ी व तंतु-प्रकाशिक संवेदकों का स्रोत है। चिकित्सा में प्रभाव तरंगदैर्ध्य व शक्ति घनत्व पर निर्भर है: 10.6 µm का CO₂ लेज़र जल द्वारा अवशोषित होकर ऊतक को काटता व वाष्पित करता है; 1064 nm का Nd:YAG लेज़र गहरा पैठता है और स्कंदन करता है; 488 व 514 nm का आर्गन लेज़र हीमोग्लोबिन द्वारा अवशोषित होकर दृष्टिपटल प्रकाश-स्कंदन हेतु प्रयुक्त होता है; 193 nm का ArF एक्साइमर लेज़र अपवर्तक शल्यक्रिया में अल्प ऊष्मा के साथ कॉर्निया का अपक्षरण करता है; और प्रकाशगतिक चिकित्सा प्रकाश-संवेदी औषधि को सक्रिय करने हेतु लेज़र प्रयोग करती है।
3. जैव-विभव व उनका मापन
उत्तेजनीय कोशिकाएँ दसियों मिलीवोल्ट का विराम विभव रखती हैं, भीतर ऋणात्मक, और क्रिया विभव छोड़ती हैं; अनेक कोशिकाओं के एक साथ सक्रिय होने की आयनी धाराएँ शरीर में आयतन चालक के रूप में बहती हैं और त्वचा पर छोटे विभवों के रूप में प्रकट होती हैं। इलेक्ट्रोड उस आयनी धारा को अपने अर्ध-सेल विभव वाले इलेक्ट्रोड–विद्युत-अपघट्य अंतरापृष्ठ पर इलेक्ट्रॉनी धारा में बदलता है। रजत/रजत-क्लोराइड इलेक्ट्रोड लगभग अध्रुवणीय है — आवेश अंतरापृष्ठ को मुक्त रूप से पार करता है, अतः गति-विरूपण व dc ऑफ़सेट छोटे होते हैं — जबकि उत्कृष्ट-धातु इलेक्ट्रोड ध्रुवणीय है और संधारित्र की भाँति अधिक व्यवहार करता है।
| संकेत | स्रोत | सामान्य आयाम व बैंड | कैसे अभिलेखित |
|---|---|---|---|
| ECG | हृदय का विध्रुवण व पुनर्ध्रुवण | लगभग 1 mV; नैदानिक 0.05–100 Hz, निगरानी हेतु संकीर्ण | अंग व वक्ष इलेक्ट्रोड, 12-लीड तंत्र |
| EEG | प्रांतस्था की संयुक्त पश्च-सिनैप्टिक गतिविधि | दसियों µV; डेल्टा < 4, थीटा 4–8, अल्फ़ा 8–13, बीटा 13–30 Hz | अंतरराष्ट्रीय 10–20 स्थापन में कपाल-त्वचा इलेक्ट्रोड |
| EMG | कंकाल पेशी के प्रेरक-इकाई क्रिया विभव | कुछ mV तक; दसियों Hz से कई सौ Hz (सतही) | सतही इलेक्ट्रोड, या एकल इकाइयों हेतु सुई इलेक्ट्रोड |
| ERG | प्रकाश-झलक पर दृष्टिपटल अनुक्रिया | सैकड़ों µV; a- व b-तरंगें | झलक उद्दीपन के साथ कॉर्नियल संस्पर्श-लेंस इलेक्ट्रोड |
| EOG | नेत्र के साथ चलने वाला कॉर्निया-दृष्टिपटल स्थायी विभव | दृष्टि-कोण के साथ लगभग रैखिक; लगभग dc | नेत्रों के बगल व ऊपर/नीचे इलेक्ट्रोड |
| GSR (त्वचा-विद्युत गतिविधि) | अनुकंपी नियंत्रण में स्वेद-ग्रंथि गतिविधि | त्वचा चालकत्व का परिवर्तन, उत्पन्न वोल्टता नहीं | दो अंगुली इलेक्ट्रोडों के आर-पार छोटी स्थिर वोल्टता या धारा |
| PCG | हृद्-ध्वनियाँ — S1 AV कपाटों के बंद होने से, S2 अर्धचंद्र कपाटों से | ध्वनिक, लगभग 20 Hz से कई सौ Hz | वक्ष पर दाबविद्युत या इलेक्ट्रेट माइक्रोफ़ोन |
ECG लीड ज्यामिति। आइंटहोवन की द्विध्रुवी अंग लीडें I = V_LA − V_RA, II = V_LL − V_RA, III = V_LL − V_LA हैं, अतः II = I + III (आइंटहोवन नियम)। विल्सन केंद्रीय टर्मिनल RA, LA व LL का औसत है और एकध्रुवी वक्ष लीडों V1–V6 का संदर्भ है; गोल्डबर्गर की संवर्धित लीडें aVR, aVL व aVF अन्य दो अंगों का औसत प्रयोग करती हैं, संगत एकध्रुवी अंग विभवों की 1.5 गुनी हैं, और उनका योग शून्य है। तीन द्विध्रुवी, तीन संवर्धित व छह वक्ष लीडें 12-लीड ECG बनाती हैं। 25 mm/s के मानक कागज़ पर एक छोटा (1 mm) वर्ग 0.04 s और एक बड़ा (5 mm) वर्ग 0.2 s है, अतः हृदय-दर = 60/RR(s) = 1500/(छोटे वर्गों में RR)। चालित दायाँ-पैर परिपथ प्रतिलोमित उभयनिष्ठ-विधा वोल्टता को धारा-सीमक प्रतिरोधक के माध्यम से रोगी को लौटाकर मेन्स व्यतिकरण घटाता है।
4. रक्तचाप, ताप, प्रवाह, श्वसन व हृद् निर्गम
रक्तचाप। अप्रत्यक्ष मापन कफ़ से बाहु धमनी को अवरुद्ध करता है और उसे धीरे-धीरे ढीला करता है। श्रवण विधि में कोरोटकॉफ़ ध्वनियाँ प्रकुंचन दाब पर आरंभ (चरण I) और अनुशिथिलन दाब पर लुप्त (चरण V) होती हैं। दोलनमितीय विधि कफ़-दाब के दोलन अभिलेखित करती है: उनका अधिकतम माध्य धमनी दाब के निकट आता है, और प्रकुंचन व अनुशिथिलन दोलन-आयाम के आनुभविक अनुपातों से आकलित होते हैं। प्रत्यक्ष मापन धमनी कैथेटर प्रयोग करता है जो लवण-विलयन द्वारा विकृति-गेज ट्रांसड्यूसर से युग्मित है; द्रव स्तंभ द्वितीय-कोटि तंत्र बनाता है जिसकी प्राकृतिक आवृत्ति व अवमंदन तय करते हैं कि तरंगरूप कितनी निष्ठा से पुनरुत्पादित होगा। माध्य धमनी दाब लगभग अनुशिथिलन + (प्रकुंचन − अनुशिथिलन)/3 है।
ताप थर्मिस्टर या तापयुग्म प्रोबों (मुख, मलाशय, ग्रसिका, त्वचा) से, और अवरक्त तापमापियों से मापा जाता है जो कर्णपटह या ललाट से ऊष्मीय विकिरण पढ़ते हैं। प्रवाह व आयतन: विद्युत-चुंबकीय प्रवाहमापी वाहिका के आर-पार क्षेत्र B रखता है, और व्यास d में माध्य वेग v से चलता रक्त e = Bdv प्रेरित करता है (फ़ैराडे); पराध्वनिक डॉप्लर व पारगमन-काल प्रवाहमापी ध्वनिक रूप से वेग मापते हैं; आयतन-लेखन (प्लेथिस्मोग्राफ़ी) आयतन परिवर्तन ट्रैक करता है — शिरा-अवरोधन आयतन-लेखन अंग का अंतर्प्रवाह मापता है, प्रतिबाधा आयतन-लेखन रक्त आयतन बदलने पर चालकत्व परिवर्तन का अनुसरण करता है, और प्रकाश-आयतन-लेखन प्रकाशिक अवशोषण परिवर्तन का।
श्वसन। स्पाइरोमीटर फुप्फुस आयतन व समयबद्ध निःश्वसन (FEV₁, FVC) अभिलेखित करता है; वह अवशिष्ट आयतन तक नहीं पहुँच सकता, जिसके लिए गैस तनुकरण या शरीर आयतन-लेखन चाहिए। न्यूमोटैकोग्राफ़ वायु-प्रवाह को छोटे स्थिर प्रतिरोध से गुज़ारता है — समांतर केशिकाओं वाली फ़्लाइश नली प्रवाह को स्तरीय रखती है — अतः उस पर दाब-पात प्रवाह के समानुपाती है, और प्रवाह का समाकलन आयतन देता है। कैपनोग्राफ़ी निःश्वसित CO₂ को अवरक्त अवशोषण से मापती है।
| विधि | सिद्धांत | सूत्र |
|---|---|---|
| फ़िक | ऑक्सीजन ग्रहण = रक्त प्रवाह × धमनी-शिरा O₂ अंतर | CO = V̇O₂/(C_aO₂ − C_vO₂) |
| सूचक (रंजक) तनुकरण | सूचक का ज्ञात द्रव्यमान प्रवाह से तनुकृत होता है; प्रथम-पारगमन सांद्रता वक्र के नीचे क्षेत्रफल (पुनर्परिसंचरण छोड़कर) | CO = m/∫c dt (स्टुअर्ट–हैमिल्टन) |
| ऊष्मा-तनुकरण | दाएँ अलिंद में शीत लवण-विलयन, फुप्फुसीय धमनी में थर्मिस्टर द्वारा ताप-पात संवेदित | वही रूप, रंजक द्रव्यमान के स्थान पर ऊष्मा |
| प्रतिबाधा हृद्-लेखन | प्रत्येक स्पंद के साथ वक्षीय प्रतिबाधा परिवर्तन | dZ/dt से स्पंद आयतन, अनाक्रामक रूप से |
5. नामित चिकित्सा उपकरणों के संचालन सिद्धांत
| उपकरण | कैसे कार्य करता है | परीक्षकों के प्रिय बिंदु |
|---|---|---|
| रक्तदाबमापी | फुलाने योग्य कफ़, विमोचन कपाट सहित पम्प व दाबमापी (पारद, निर्द्रव या इलेक्ट्रॉनिक); कोरोटकॉफ़ घटनाओं पर या दोलनों से दाब पढ़ा जाता है | भुजा हेतु बहुत संकरा कफ़ दाब अधिक बताता है; लगभग 2–3 mmHg प्रति सेकंड की दर से ढीला करें |
| संवातक | धनात्मक-दाब श्वास देता है, आयतन-नियंत्रित (निर्धारित ज्वारीय आयतन) या दाब-नियंत्रित (निर्धारित दाब), नियंत्रित, सहायता-नियंत्रण, SIMV या दाब-समर्थन विधाओं में | PEEP निःश्वसन के अंत में कूपिकाओं को खुला रखता है; ट्रिगरिंग रोगी का अपना प्रयास संवेदित करती है |
| हृद् गतिनिर्धारक | स्पंद जनित्र (लिथियम-आयोडीन सेल, संवेदी प्रवर्धक, समय तर्क) लीडों द्वारा अलिंद और/या निलय को उद्दीपन देता है | स्थिर-दर (अतुल्यकालिक) बनाम माँग; तीन-अक्षर कूट: गतिनिर्धारित कक्ष, संवेदित कक्ष, अनुक्रिया — VVI निलय को गतिनिर्धारित व संवेदित करता है और संवेदित स्पंद से संदमित होता है |
| विकंपनित्र | किलोवोल्ट तक आवेशित संधारित्र पैडल या पैड द्वारा वक्ष से निरावेशित होता है, पूरे हृद्-पेशी को एक साथ विध्रुवित करता है ताकि SA नोड पुनः आरंभ कर सके | संचित ऊर्जा E = ½CV²; अवमंदित-ज्या या द्विकला छिन्न-चरघातांकी तरंगरूप; हृद्-लय परिवर्तन (कार्डियोवर्ज़न) संवेदनशील T तरंग से बचने हेतु R तरंग से तुल्यकालित होता है |
| स्पंद ऑक्सीमापी | अंगुली या कर्णपालि के आर-पार लाल (लगभग 660 nm) व अवरक्त (लगभग 940 nm) LED तथा फ़ोटोडायोड; विऑक्सीहीमोग्लोबिन अधिक लाल, ऑक्सीहीमोग्लोबिन अधिक अवरक्त अवशोषित करता है | अनुपातों का अनुपात R = (AC/DC)_red/(AC/DC)_IR केवल स्पंदी धमनी भाग प्रयोग करता है, और SpO₂, R के आनुभविक अंशांकन से आता है |
| अपोहक | अर्धपारगम्य झिल्ली (खोखले तंतु) के विपरीत पक्षों पर रक्त व अपोह-द्रव प्रति-धारा में बहते हैं; यूरिया व क्रिएटिनिन सांद्रता प्रवणता के अनुसार बाहर विसरित होते हैं | अतिरिक्त जल अनुप्रस्थ-झिल्ली दाब चालित परानिस्यंदन से हटाया जाता है; हेपरिन परिपथ में स्कंदन रोकता है |
6. विद्युत पृथक्करण, सुरक्षा व विनियमन
शरीर से धारा, वोल्टता नहीं, हानि करती है, और उसका प्रभाव पथ पर निर्भर है। त्वचा पर लगे 50/60 Hz स्थूल-आघात (मैक्रोशॉक) हेतु लगभग 1 mA अनुभवगम्य है, लगभग 10 mA या अधिक व्यक्ति को छोड़ने नहीं देता, और वक्ष के आर-पार 100 mA कोटि की धाराएँ निलय तंतुविकंपन कर सकती हैं। कैथेटर या गतिनिर्धारण लीड द्वारा सीधे हृदय तक पहुँचा सूक्ष्म-आघात (माइक्रोशॉक) त्वचा व शरीर के स्थूल भाग को लाँघ जाता है, और 100 µA कोटि की धाराओं से तंतुविकंपन हो सकता है — इसीलिए हृद्-संपर्क उपकरणों की क्षरण सीमाएँ लगभग 10 µA पर रखी जाती हैं।
- पृथक्करण रोगी-संयोजित अग्र-छोर व मेन्स-संदर्भित परिपथ के बीच प्रत्येक चालक पथ तोड़ता है। प्रकाशिक पृथक्करण संकेत को LED से प्रकाश-संसूचक तक प्रकाश के रूप में भेजता है (ऑप्टोकपलर); विद्युत पृथक्करण उसे मॉडुलित वाहक पर ट्रांसफ़ॉर्मर से या छोटे धारितीय अवरोध से भेजता है। शक्ति पृथक्कृत dc-dc परिवर्तक से पार होती है।
- IEC 60601-1 उपकरणों को आघात-सुरक्षा के अनुसार वर्गीकृत करता है — वर्ग I (सुरक्षात्मक भू-संपर्क), वर्ग II (दोहरी या प्रबलित विद्युतरोधन), आंतरिक रूप से चालित — और प्रयुक्त भागों को इस अनुसार कि वे रोगी से कितने निकट संपर्क करते हैं: B, BF (अस्थायी) व CF (हृद् अस्थायी, सबसे कठोर, सीधे हृद्-अनुप्रयोग हेतु, सामान्य स्थिति में रोगी क्षरण 10 µA तक सीमित)।
- रोगी के चारों ओर सभी उपकरणों हेतु समविभव भू-संपर्क (भू-पाश रोकने हेतु), भू-दोष (अवशिष्ट-धारा) विच्छेदकों, क्रांतिक क्षेत्रों में पृथक्कृत शक्ति तंत्रों, और प्रत्येक रोगी लीड में धारा-सीमक प्रतिरोधकों से संकट घटाए जाते हैं।
विनियमन उपकरणों को जोखिम के अनुसार वर्गीकृत करता है और माँगे गए साक्ष्य को उसी अनुपात में बढ़ाता है। अमेरिकी FDA वर्ग I, II व III प्रयोग करता है; भारत में केंद्रीय औषध मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) द्वारा प्रशासित चिकित्सा उपकरण नियम, 2017 वर्ग A (निम्न जोखिम) से D (उच्च जोखिम) प्रयोग करते हैं; यूरोपीय संघ अपने चिकित्सा उपकरण विनियम के अंतर्गत विनियमन करता है। अंतरराष्ट्रीय मानक तकनीकी सामग्री रखते हैं: उपकरण निर्माता के गुणता-प्रबंधन तंत्र हेतु ISO 13485, जोखिम प्रबंधन हेतु ISO 14971, चिकित्सा विद्युत उपकरणों की विद्युत सुरक्षा व आवश्यक प्रदर्शन हेतु IEC 60601 परिवार, और जैविक मूल्यांकन हेतु ISO 10993।
मुख्य बिंदु
- चतुर्थांश सेतु V_s·GF·ε/4, पूर्ण सेतु V_s·GF·ε; Pt100 R = 100(1 + 0.00385T); NTC थर्मिस्टर R = R₀eβ(1/T − 1/T₀)।
- आइंटहोवन: I = LA − RA, II = LL − RA, III = LL − LA व II = I + III; 25 mm/s पर HR = 1500/(mm में RR)।
- कोरोटकॉफ़ आरंभ प्रकुंचन, लोप अनुशिथिलन; दोलनमितीय अधिकतम माध्य दाब के निकट।
- फ़िक CO = V̇O₂/(C_a − C_v); तनुकरण CO = m/∫c dt; EM प्रवाहमापी e = Bdv; विकंपनित्र E = ½CV²।
- सूक्ष्म-आघात देहलियाँ स्थूल-आघात से लगभग हज़ार गुना नीचे हैं; CF प्रयुक्त भाग, पृथक्करण व समविभव भू-संपर्क इसी कारण हैं।
अभ्यास प्रश्न (18)
उत्तर खोलने से पहले प्रत्येक प्रश्न हल करें। हर व्याख्या सही विकल्प के साथ लुभावना गलत विकल्प भी बताती है, क्योंकि अंक वहीं जाते हैं।
विकृति गेज का गेज गुणक परिभाषित है
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उत्तर: A — (ΔR/R)/ε
GF प्रति इकाई विकृति प्रतिरोध का भिन्नात्मक परिवर्तन (ΔR/R)/ε है, धातु पन्नी गेज हेतु लगभग 2 और अर्धचालक गेज हेतु कहीं अधिक। ΔR/ε की इकाई ओम है और यह गेज के नाममात्र प्रतिरोध पर निर्भर है, जिसे परिभाषा हटाना चाहती है।5 V पर उत्तेजित चतुर्थांश व्हीटस्टोन सेतु में एकल सक्रिय विकृति गेज (GF = 2) 500 µε अनुभव करता है। अल्प-विकृति सन्निकटन प्रयोग करते हुए सेतु निर्गत (mV में) ____ है।
संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।
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उत्तर: 1.25
V_o ≈ V_s·GF·ε/4 = 5 × 2 × 500 × 10⁻⁶/4 = 1.25 mV; यथार्थ सेतु समीकरण 1.249 mV देता है, अंतर चतुर्थांश सेतु की छोटी अरैखिकता है। 1/4 छोड़ने पर 5 mV आता है, पूर्ण-सेतु का मान।चार सक्रिय गेजों (GF = 2.1) का पूर्ण सेतु, दो तनन में व दो संपीडन में, प्रत्येक 200 µε पर, 10 V पर उत्तेजित है। निर्गत (mV में) ____ है।
संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।
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उत्तर: 4.2
चारों भुजाएँ सक्रिय व सही स्थान पर होने पर V_o = V_s·GF·ε = 10 × 2.1 × 200 × 10⁻⁶ = 4.2 mV, चतुर्थांश-सेतु के 1.05 mV का चौगुना। तनन गेजों को सम्मुख के स्थान पर आसन्न भुजाओं में रखने पर संकेत जुड़ने के बजाय निरस्त हो जाएगा।एक Pt100 RTD (0 °C पर 100 Ω, α = 0.00385 /°C) शरीर ताप 37 °C पर है। उसका प्रतिरोध (Ω में), दो दशमलव स्थानों तक, ____ है।
संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।
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उत्तर: 114.25
R = R₀(1 + αT) = 100(1 + 0.00385 × 37) = 100 × 1.14245 = 114.245 Ω, जो पूर्णांकित कर 114.25 (काटने पर 114.24) है। α = 0.0039 लेने पर 114.43 Ω; T = 310 K के साथ α को प्रति केल्विन मानने पर 219 Ω आता है, जो ताप-अंतर को निरपेक्ष ताप से भ्रमित करता है।एक NTC थर्मिस्टर का 25 °C पर R = 10 kΩ व β = 3500 K है। 37 °C पर उसका प्रतिरोध (kΩ में), दो दशमलव स्थानों तक, ____ है। 0 °C = 273.15 K लें।
संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।
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उत्तर: 6.35
R = R₂₅ exp[β(1/T − 1/T₂₅)] = 10 exp[3500(1/310.15 − 1/298.15)] = 10 exp(−0.4542) = 10 × 0.635 = 6.35 kΩ। घातांक में सेल्सियस ताप रखने से असंगत रूप से छोटा प्रतिरोध आता है, और ऋण चिह्न छोड़ने पर — युक्ति को PTC मानकर — 15.7 kΩ आता है।ECG के एक क्षण पर लीड I, 0.5 mV और लीड III, 0.7 mV पढ़ती है। उस क्षण लीड II (mV में) ____ है।
संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।
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उत्तर: 1.2
आइंटहोवन नियम: II = I + III, क्योंकि (LA − RA) + (LL − LA) = LL − RA। अतः II = 0.5 + 0.7 = 1.2 mV। दोनों को घटाना (0.2 mV) आइंटहोवन नियम को लीड परिभाषाओं से भ्रमित करना है।25 mm/s पर चलते ECG कागज़ पर क्रमिक R शिखर 20 mm दूर हैं। हृदय-दर (स्पंद प्रति मिनट में) ____ है।
संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।
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उत्तर: 75
RR = 20 mm/(25 mm/s) = 0.8 s, अतः HR = 60/0.8 = 75 bpm — समतुल्य रूप से 1500/20। 300 को 20 से भाग देना मिलीमीटरों को बड़े वर्ग मानना है और 15 देता है; 60 को 20 से भाग देने पर 3 आता है।रक्तचाप मापन की श्रवण विधि में प्रकुंचन दाब कब पढ़ा जाता है?
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उत्तर: A — कफ़ ढीला होते समय कोरोटकॉफ़ थपकी ध्वनियों के प्रथम प्रकटन पर
जब कफ़ दाब पहली बार प्रकुंचन शिखर से नीचे गिरता है, तो प्रत्येक स्पंद में रक्त आंशिक रूप से खुली धमनी से फूटता है और प्रथम थपकी ध्वनियाँ प्रकट होती हैं। उनका लोप अनुशिथिलन दाब चिह्नित करता है, और दोलन अधिकतम दोलनमितीय विधि में माध्य धमनी दाब के संगत है।एक व्यक्ति प्रति मिनट 250 mL O₂ ग्रहण करता है; धमनी रक्त प्रति लीटर 200 mL O₂ और मिश्रित शिरा रक्त प्रति लीटर 150 mL O₂ ले जाता है। फ़िक सिद्धांत से हृद् निर्गम (L/min में) ____ है।
संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।
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उत्तर: 5
CO = V̇O₂/(C_a − C_v) = 250/(200 − 150) = 250/50 = 5 L/min। केवल धमनी सामग्री से भाग देने पर 1.25 L/min आता है, जो इस तथ्य की उपेक्षा है कि शिरा रक्त अपनी अधिकांश ऑक्सीजन लिए लौटता है।एक सूचक-तनुकरण मापन में 5 mg रंजक अंतःक्षेपित किया जाता है, और पुनर्परिसंचरण हटाकर प्रथम-पारगमन सांद्रता–काल वक्र के नीचे क्षेत्रफल 50 mg·s/L है। हृद् निर्गम (L/min में) ____ है।
संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।
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उत्तर: 6
स्टुअर्ट–हैमिल्टन: CO = m/∫c dt = 5 mg/(50 mg·s/L) = 0.1 L/s = 6 L/min। उत्तर 0.1 छोड़ना सेकंड-से-मिनट रूपांतरण भूलना है; क्षेत्रफल में पुनर्परिसंचरण उभार सम्मिलित करने से वक्र बड़ा और निर्गम मिथ्या रूप से कम होगा।एक विकंपनित्र का 32 µF संधारित्र 5 kV तक आवेशित है। संचित ऊर्जा (J में) ____ है।
संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।
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उत्तर: 400
E = ½CV² = ½ × 32 × 10⁻⁶ × (5000)² = ½ × 32 × 10⁻⁶ × 25 × 10⁶ = 400 J। ½ भूलने पर 800 J, और CV = 0.16 C संचित आवेश है, ऊर्जा नहीं। संचित सारी ऊर्जा रोगी तक नहीं पहुँचती, क्योंकि आंतरिक व इलेक्ट्रोड प्रतिरोध हिस्सा लेते हैं।एक विद्युत-चुंबकीय प्रवाहमापी 5 mm आंतरिक व्यास वाली धमनी के आर-पार B = 0.03 T लगाता है जिसमें माध्य रक्त वेग 0.4 m/s है। प्रेरित वोल्टता (µV में) ____ है।
संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।
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उत्तर: 60
e = Bdv = 0.03 × 0.005 × 0.4 = 6 × 10⁻⁵ V = 60 µV — अत्यंत छोटा संकेत, इसीलिए ये प्रवाहमापी सावधान वाहक तकनीकें प्रयोग करते हैं। व्यास के स्थान पर त्रिज्या लेने पर 30 µV आता है।स्पंद ऑक्सीमापी के विषय में कौन-से कथन सही हैं?
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उत्तर: A — यह लाल (लगभग 660 nm) व अवरक्त (लगभग 940 nm) प्रकाश प्रयोग करता है; B — विऑक्सीहीमोग्लोबिन ऑक्सीहीमोग्लोबिन से अधिक लाल प्रकाश अवशोषित करता है; C — प्रत्येक तरंगदैर्ध्य पर स्पंदी (AC) संकेत को स्थिर (DC) स्तर से मानकीकृत करने से ऊतक व शिरा रक्त का योगदान हटता है
समावशोषी बिंदु के दोनों ओर की दो तरंगदैर्ध्य AC/DC अनुपातों के अनुपात को ऑक्सीकृत हीमोग्लोबिन के अंश का अनुसरण करने देती हैं, और केवल स्पंदी भाग धमनी रक्त से आता है। यह जो बताता है वह संतृप्ति SpO₂ है, आनुभविक अंशांकन से प्राप्त; pO₂ हेतु क्लार्क इलेक्ट्रोड जैसा रक्त-गैस इलेक्ट्रोड चाहिए।रोगी-संयोजित उपकरणों की विद्युत सुरक्षा के विषय में कौन-से कथन सही हैं?
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उत्तर: A — सीधे हृदय पर लगा सूक्ष्म-आघात स्थूल-आघात देहलियों से कहीं कम धाराओं पर तंतुविकंपन कर सकता है; B — प्रकार CF प्रयुक्त भाग सीधे हृद्-अनुप्रयोग हेतु हैं और उनकी क्षरण सीमाएँ सबसे कठोर हैं; C — प्रकाशिक पृथक्करण रोगी परिपथ व मेन्स-संदर्भित परिपथ के बीच गैल्वेनिक पथ हटाता है
कैथेटर द्वारा हृदय के भीतर पहुँची धारा त्वचा को लाँघ जाती है, अतः सूक्ष्म-आघात देहलियाँ 100 µA कोटि की हैं जबकि स्थूल-आघात हेतु लगभग 100 mA, इसलिए 10 µA की CF सीमा व पृथक्कृत अग्र-छोर। रोगी पर सीधा भू-संपर्क किसी भी दोष को शरीर से होकर निम्न-प्रतिरोध पथ देता है; चालित दायाँ पैर इसके स्थान पर धारा-सीमक प्रतिरोधक से कार्य करता है।एक पेसमेकर का वर्णन कूट VVI से किया गया है। यह
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उत्तर: A — निलय को गतिनिर्धारित करता है, निलय को संवेदित करता है और संवेदित निलय स्पंद से संदमित होता है
अक्षर हैं गतिनिर्धारित कक्ष, संवेदित कक्ष, संवेदन पर अनुक्रिया: V, V, I — निलय माँग पेसमेकर जो हृदय के स्वयं धड़कने तक मौन रहता है। स्थिर-दर द्वि-कक्ष गतिनिर्धारण DOO होगा, अलिंद अनुसरण VDD या DDD है, और आघात देना प्रत्यारोपणीय विकंपनित्र का कार्य है।क्लार्क इलेक्ट्रोड रक्त pO₂ किससे निर्धारित करता है?
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उत्तर: A — ध्रुवित प्लैटिनम कैथोड पर ऑक्सीजन के अपचयन से उत्पन्न धारा
यह ऐम्पियरमितीय है: झिल्ली से विसरित ऑक्सीजन लगभग −0.6 से −0.7 V पर रखे कैथोड पर अपचयित होती है, और परिणामी धारा pO₂ के समानुपाती है। काँच-झिल्ली व्यवस्था सेवरिंगहॉस pCO₂ इलेक्ट्रोड है, और दो-तरंगदैर्ध्य विधि स्पंद ऑक्सीमिति है।एक दाबविद्युत दाब संवेदक को 1 nF पुनर्निवेश धारिता व 100 MΩ पुनर्निवेश प्रतिरोध वाले आवेश प्रवर्धक से पढ़ा जाता है। मापन की निम्न-आवृत्ति −3 dB कट-ऑफ़ (Hz में), दो दशमलव स्थानों तक, ____ है।
संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।
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उत्तर: 1.59
f_L = 1/(2πR_fC_f) = 1/(2π × 10⁸ × 10⁻⁹) = 1/(2π × 0.1) = 1.59 Hz; इससे नीचे आवेश क्षरित हो जाता है, इसीलिए दाबविद्युत संवेदक स्थैतिक दाब नहीं रख सकता। 2π भूलने पर 10 Hz आता है, rad/s में कोना।अपवर्तक (LASIK-प्रकार) शल्यक्रिया में कॉर्निया के अपक्षरण हेतु कौन-सा लेज़र प्रयुक्त होता है?
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उत्तर: A — 193 nm का आर्गन-फ़्लोराइड एक्साइमर लेज़र
193 nm के गहन-पराबैंगनी फ़ोटॉन पतली सतही परत में आणविक बंध तोड़ते हैं और अत्यल्प तापन के साथ कॉर्नियल ऊतक हटाते हैं। CO₂ लेज़र जल को गर्म कर काटता है, Nd:YAG पैठकर स्कंदन करता है, और आर्गन लेज़र दृष्टिपटल प्रकाश-स्कंदन हेतु हीमोग्लोबिन द्वारा अवशोषित होता है।