कृषि शक्ति स्रोत व अंतर्दहन इंजन: चक्र, अवयव, तंत्र, ईंधन, स्नेहक तथा निष्पादन

GATE कृषि अभियांत्रिकी (AG) पेपर के खंड 3, कृषि शक्ति, का पहला अध्याय। खंड के तीन उप-शीर्षक शक्ति के स्रोत, कृषि शक्ति (अंतर्दहन इंजन) तथा ट्रैक्टर व पावर टिलर हैं; इंजन व उसके स्रोत एक विषय हैं और इंजन वहन करने वाला ट्रैक्टर दूसरा, अतः खंड दो अध्यायों में लिखा गया है और यह पहला है। यह खेत पर शक्ति स्रोतों — मानव, पशु, यांत्रिक, विद्युत, पवन, सौर व जैवभार — और यंत्रीकरण में प्रयुक्त जैव-ईंधनों का सर्वेक्षण करता है; फिर अंतर्दहन इंजन जैसा पाठ्यक्रम सूचीबद्ध करता है: ऊष्मागतिक सिद्धांत व वायु-मानक चक्र, इंजन अवयव, ईंधन व दहन, स्नेहक व उनके गुण, ईंधन, शीतलन, स्नेहन, प्रज्वलन, विद्युत, अंतर्ग्रहण व निकास तंत्र, चयन, संचालन व रखरखाव, तथा निष्पादन आँकड़ों से शक्ति, बल-आघूर्ण, ईंधन खपत, ऊष्मा भार व शक्ति हानियों की गणना।

1. खेत पर शक्ति के स्रोत, और जैव-ईंधन

कृषि शक्ति स्रोतों की तुलना
स्रोतस्वरूपसीमा
मानवबहुमुखी, सटीक; सतत निर्गम केवल एक अश्वशक्ति के दसवें भाग की कोटि काबहुत कम शक्ति, थकान, कठिन श्रम
पशु (भारवाही)बैल पैदल चाल पर अपने शरीर-भार का लगभग दसवाँ भाग खींचता है; स्व-प्रतिस्थापी, खेत का चारा प्रयोग करता हैपूरे वर्ष खिलाना पड़ता है, सीमित घंटे कार्य, ताप तनाव
यांत्रिक (इंजन, ट्रैक्टर)उच्च, केंद्रित, चल शक्ति; संक्रियाओं की समयबद्धताईंधन लागत, पूँजी लागत, रखरखाव
विद्युतस्थिर कार्यों हेतु सस्ती, स्वच्छ, दक्ष — पंप, थ्रेशर, चक्कियाँअचल, आपूर्ति विश्वसनीयता
पवनमुफ़्त ईंधन; जल उठाना, छोटे जनित्रआंतरायिक; शक्ति पवन-चाल के घन के साथ बदलती है
सौरप्रकाश-वोल्टीय पंप व स्प्रेयर, सौर शुष्कक व जल तापककेवल दिन में, कम शक्ति घनत्व, भंडारण लागत
जैवभारबायोगैस संयंत्र, उत्पादक-गैस गैसीकारक, अवशेषों का प्रत्यक्ष दहनभारी-भरकम ईंधन, संग्रह व प्रबंधन

पवन शक्ति। घूर्णक के प्रसारित क्षेत्रफल A से होकर गतिज ऊर्जा का प्रवाह P = ½ρAV³ है। कोई घूर्णक इसे पूरा नहीं निकाल सकता, क्योंकि वायु को फिर भी निकलना होता है; सैद्धांतिक अधिकतम शक्ति गुणांक बेट्ज़ सीमा Cp = 16/27 ≈ 0.593 है, और वास्तविक घूर्णक इससे काफ़ी नीचे रहते हैं। ρ = 1.2 kg/m³, 10 m घूर्णक (A = 78.5 m²) व V = 8 m/s पर पवन 24.1 kW वहन करती है, और Cp = 0.4 वाली मशीन 9.65 kW देती है। पवन-चाल दोगुनी करने से शक्ति आठ गुना होती है।

जैव-ईंधन। बायोडीज़ल वनस्पति तेलों या पशु वसाओं के एक ऐल्कोहॉल (प्रायः मेथनॉल) के साथ उत्प्रेरक की उपस्थिति में ट्रांसएस्टरीकरण से बनता है, जिससे वसीय-अम्ल मेथिल एस्टर और उपोत्पाद के रूप में ग्लिसरॉल मिलते हैं; इसे डीज़ल के साथ मिश्रित किया जा सकता है (20 प्रतिशत बायोडीज़ल वाला मिश्रण B20 कहलाता है) और अपरिवर्तित CI इंजनों में चलाया जा सकता है, डीज़ल से कम ऊष्मीय मान, अधिक श्यानता व बेहतर स्नेहकता के साथ। गन्ने के शीरे या अनाज से बना एथेनॉल SI इंजनों हेतु पेट्रोल में मिलाया जाता है। गोबर व अवशेषों के अवायवीय पाचन से बनी बायोगैस अधिकांशतः मीथेन व कार्बन डाइऑक्साइड है, और SI इंजन या द्वि-ईंधन CI इंजन चलाती है; जैवभार के गैसीकरण से बनी उत्पादक गैस (मुख्यतः CO, H₂ व N₂) कम ऊष्मीय मान पर यही करती है।

2. ऊष्मागतिक सिद्धांत व अंतर्दहन इंजन चक्र

इंजन ईंधन की रासायनिक ऊर्जा को कार्यकारी गैस के भीतर जलाकर कार्य में बदलता है। इसका आदर्श वायु-मानक चक्र है: वायु स्थिर विशिष्ट ऊष्माओं वाली पूर्ण गैस, ऊष्मा उत्क्रमणीय ढंग से जोड़ी व निकाली गई, संपीडन व प्रसार समएन्ट्रॉपिक। ऑटो चक्र (स्फुलिंग-प्रज्वलन, SI) स्थिर आयतन पर ऊष्मा जोड़ता है और η = 1 − 1/r^(γ−1) रखता है, जो केवल संपीडन अनुपात r पर निर्भर है। डीज़ल चक्र (संपीडन-प्रज्वलन, CI) स्थिर दाब पर ऊष्मा जोड़ता है, अंतक अनुपात ρ = V₃/V₂ के साथ, और η = 1 − (1/r^(γ−1))·(ρ^γ − 1)/(γ(ρ − 1)); कोष्ठक 1 से अधिक है, अतः समान r पर ऑटो चक्र अधिक दक्ष है। द्वैत चक्र ऊष्मा आंशिक रूप से स्थिर आयतन पर और आंशिक रूप से स्थिर दाब पर जोड़ता है और दोनों के बीच रहता है। फिर भी व्यवहार में CI इंजन अधिक दक्ष हैं क्योंकि वे SI इंजनों से लगभग दोगुने संपीडन अनुपात पर चलते हैं — SI इंजन अपस्फोटन (knock) से सीमित है, CI इंजन को अपना ईंधन प्रज्वलित करने हेतु उच्च संपीडन चाहिए।

हल किया उदाहरण: r = 8 व γ = 1.4 पर ऑटो दक्षता 1 − 8^(−0.4) = 1 − 0.435 = 56.5 प्रतिशत है। r = 16 व अंतक अनुपात 2 पर डीज़ल दक्षता 1 − (1/16^0.4)(2^1.4 − 1)/(1.4 × 1) = 1 − 0.3299 × 1.1707 = 61.4 प्रतिशत है — अधिक, दोगुने संपीडन अनुपात के कारण।

चार-स्ट्रोक इंजन चूषण, संपीडन, शक्ति व निकास दो क्रैंकशाफ़्ट चक्करों में पूरा करता है, अतः प्रति सिलिंडर हर दो चक्करों में एक शक्ति-स्ट्रोक होता है और उसका कैमशाफ़्ट क्रैंकशाफ़्ट की आधी चाल पर घूमता है। दो-स्ट्रोक इंजन द्वारकों व क्रैंककेस (या ब्लोअर) अपमार्जन से चक्र एक चक्कर में पूरा करता है, प्रति चक्कर एक शक्ति-स्ट्रोक देते हुए और अपमार्जन हानियों व ईंधन-मितव्ययिता के मूल्य पर उच्च शक्ति-भार अनुपात के साथ।

3. इंजन अवयव व तंत्र; ईंधन, दहन व स्नेहक

अवयव सिलिंडर ब्लॉक व हेड, संपीडन व तेल छल्लों सहित पिस्टन, गजन पिन, संयोजी दंड, फ़्लाईव्हील सहित क्रैंकशाफ़्ट, कैमशाफ़्ट, स्प्रिंगों व रॉकरों सहित वाल्व, तथा टाइमिंग गियर हैं। उनके चारों ओर वे तंत्र हैं जिन्हें पाठ्यक्रम नामित करता है। ईंधन: SI इंजन कार्बुरेटर या द्वार-अंतःक्षेपण से वायु व ईंधन मिलाता है; CI इंजन में ईंधन टंकी, फ़िल्टर, मापन व दाबन करने वाला ईंधन-अंतःक्षेपण पंप, और गर्म संपीडित वायु में ईंधन कणित करने वाले अंतःक्षेपक होते हैं, चाल नियंत्रित करने वाले गवर्नर के साथ। शीतलन: पंखुड़ियों (fins) से वायु शीतलन, या पंप, रेडिएटर, पंखे व कार्य-ताप बनाए रखने वाले थर्मोस्टैट सहित जल शीतलन। स्नेहन: छपाक (splash), या गियर पंप से फ़िल्टरों के माध्यम से बेयरिंगों तक बल-भरण। प्रज्वलन: SI इंजनों हेतु बैटरी-कुंडली या मैग्नेटो (मैग्नेटो अपनी धारा स्वयं उत्पन्न करता है और बैटरी नहीं चाहता); CI इंजनों को प्रज्वलन तंत्र नहीं चाहिए। विद्युत: बैटरी, अल्टरनेटर या डायनेमो, स्टार्टर मोटर, बत्तियाँ। अंतर्ग्रहण व निकास: वायु शोधक (तेल-स्नान या शुष्क कागज़ तत्व, धूल भरे खेत-कार्य में अनिवार्य), मैनिफ़ोल्ड, साइलेंसर, और अनेक इंजनों पर टर्बोचार्जर।

ईंधन गुणवत्ता व असामान्य दहन
मदSI इंजन (पेट्रोल)CI इंजन (डीज़ल)
गुणवत्ता मापऑक्टेन संख्या — स्वतः-प्रज्वलन का प्रतिरोधसीटेन संख्या — स्वतः-प्रज्वलित होने की तत्परता
अपस्फोटनअंत-गैस ज्वाला से आगे स्वतः प्रज्वलित होती है (विस्फोटन), दहन के अंत मेंबहुत लंबा प्रज्वलन विलंब, अतः संचित ईंधन एक साथ जलता है, दहन के आरंभ में
उपचारउच्च-ऑक्टेन ईंधन, कम संपीडन, स्फुलिंग मंद करनाउच्च-सीटेन ईंधन, अधिक संपीडन व ताप

स्नेहक गतिशील सतहों को पृथक करते, ठंडा करते, सील करते व साफ़ करते हैं। उनके गुण: श्यानता (प्रवाह का प्रतिरोध) और श्यानता सूचकांक (ताप के साथ श्यानता कितनी कम बदलती है — उच्च VI बेहतर है); स्फुरांक (flash point) व ज्वलनांक (fire point) (सुरक्षा); बहाव बिंदु (pour point) (सबसे कम ताप जिस पर तेल अब भी बहता है); तैलीयता व अपमार्जकता। SAE श्रेणियाँ श्यानता का वर्गीकरण करती हैं; 20W-40 जैसा बहु-श्रेणी तेल ठंडे में पतले SAE 20 तेल की भाँति (W शीत हेतु) और गर्म में SAE 40 तेल की भाँति व्यवहार करता है, श्यानता-सूचकांक सुधारकों के कारण।

⚠️ उच्च ऑक्टेन व उच्च सीटेन विपरीत हैं
अच्छा पेट्रोल स्वतः-प्रज्वलन का प्रतिरोध करता है (उच्च ऑक्टेन); अच्छा डीज़ल सहजता से स्वतः प्रज्वलित होता है (उच्च सीटेन)। एक इंजन हेतु अच्छा ईंधन दूसरे हेतु ख़राब है, इसीलिए "उच्च-सीटेन ईंधन पेट्रोल इंजन में अपस्फोटन घटाता है" कहने वाला विकल्प ग़लत है।

4. शक्ति, दक्षताएँ व उनका मापन; निष्पादन वक्र

सूचित शक्ति पिस्टनों पर गैस द्वारा विकसित शक्ति है: IP = p_mi·L·A·n·k/60, p_mi सूचित माध्य प्रभावी दाब (Pa), L स्ट्रोक (m), A पिस्टन क्षेत्रफल (m²), k सिलिंडरों की संख्या, और n प्रति सिलिंडर प्रति मिनट शक्ति-स्ट्रोकों की संख्या — चार-स्ट्रोक इंजन हेतु N/2 और दो-स्ट्रोक हेतु N। डायनेमोमीटर से क्रैंकशाफ़्ट पर मापी गई ब्रेक शक्ति BP = 2πNT/60 है। घर्षण शक्ति FP = IP − BP रगड़, पंपन व सहायक उपकरण चलाने में खो जाती है, और यांत्रिक दक्षता η_m = BP/IP है। घर्षण शक्ति मोर्स परीक्षण से (बहु-सिलिंडर इंजनों हेतु, स्थिर चाल पर एक-एक सिलिंडर बंद कर BP में गिरावट मापकर), विलान रेखा से (CI इंजनों हेतु, BP के विरुद्ध ईंधन खपत को शून्य ईंधन तक बहिर्वेशित कर), या इंजन को बाहर से घुमाकर (motoring) निकाली जाती है।

ब्रेक तापीय दक्षता η_bth = BP/(ṁ_f × CV) है, और ब्रेक विशिष्ट ईंधन खपत bsfc = ṁ_f/BP, प्रायः kg/kWh में; ऊष्मीय मान को छोड़कर दोनों परस्पर व्युत्क्रम हैं, क्योंकि CV kJ/kg में होने पर η_bth = 3600/(bsfc × CV)। 42 000 kJ/kg CV वाला 5 kg/h डीज़ल (58.3 kW ईंधन ऊर्जा) जलाकर 20 kW देने वाले इंजन का bsfc = 0.25 kg/kWh और η_bth = 34.3 प्रतिशत है। ऊष्मा संतुलन ईंधन ऊर्जा के शेष का लेखा रखता है: ब्रेक शक्ति, शीतलन जल, निकास गैसों को गई ऊष्मा, और एक अलेखित शेष (विकिरण आदि)। आयतनिक दक्षता वास्तव में अंतर्गृहीत वायु की अंतर्ग्रहण दशाओं पर प्रसारित आयतन से तुलना करती है।

निष्पादन वक्र पूर्ण थ्रॉटल (या पूर्ण रैक) पर चाल के विरुद्ध बल-आघूर्ण, ब्रेक शक्ति व bsfc दर्शाते हैं। बल-आघूर्ण शक्ति से कम चाल पर शिखर पर पहुँचता है, क्योंकि बल-आघूर्ण घटने लगने के बाद भी शक्ति चाल के साथ बढ़ती रहती है; bsfc अधिकतम बल-आघूर्ण वाली चाल के निकट न्यूनतम होती है। बल-आघूर्ण बैकअप (आरक्षित बल-आघूर्ण) = (T_max − T_rated)/T_rated × 100 मापता है कि इंजन अचानक भार में बिना रुके कितनी अच्छी तरह खिंचता है — 150 N·m निर्धारित व 180 N·m शिखर बल-आघूर्ण वाले ट्रैक्टर इंजन का बैकअप 20 प्रतिशत है। गवर्नर भार परिवर्तन के विरुद्ध चाल बनाए रखता है, इसीलिए आंशिक भार पर ट्रैक्टर इंजन पूर्ण-थ्रॉटल वक्र के बजाय तीखी गवर्नर रेखा पर चलता है।

⚠️ चार-स्ट्रोक इंजन हेतु n = N/2
सूचित शक्ति शक्ति-स्ट्रोक गिनती है, चक्कर नहीं। चार-स्ट्रोक इंजन हेतु N/2 के स्थान पर N लेने से सूचित शक्ति दोगुनी हो जाती है — और फिर यांत्रिक दक्षता अपने वास्तविक मान की आधी निकलती है।

5. अंतर्दहन इंजनों का चयन, संचालन, रखरखाव व मरम्मत

इंजन उस भार हेतु चुना जाता है जिसे वह चलाता है: शाफ़्ट पर कार्य हेतु आवश्यक शक्ति, चाल-परिसर, कार्य-प्रकृति (पंप हेतु सतत, थ्रेशर हेतु उतार-चढ़ाव वाली), उपलब्ध ईंधन, और परिवेशी दशाएँ। ऊँचाई पर व गर्मी में इंजन शक्ति खोते हैं क्योंकि वायु विरल होती है, अतः स्थल-दशाओं हेतु निर्धारण को घटाया (derate) जाता है। स्थिर पंप सेट हेतु CI इंजन उसकी ईंधन-मितव्ययिता व लंबी आयु हेतु चुना जाता है; हल्के सुवाह्य कार्यों हेतु छोटा SI इंजन उसके भार व आसान आरंभ हेतु।

  • दैनिक: ईंधन, स्नेहक तेल व शीतलक स्तर जाँचें; धूल भरे कार्य में वायु शोधक साफ़ करें या जाँचें; ईंधन फ़िल्टर से पानी निकालें।
  • आवधिक: निर्माता द्वारा निर्दिष्ट घंटों पर इंजन तेल व तेल फ़िल्टर बदलें, ईंधन फ़िल्टर बदलें, पंखा-पट्टे का तनाव जाँचें, अंतःक्षेपकों की सर्विस करें और वाल्व अंतराल स्थापित करें।
  • लक्षण व कारण: काला धुआँ — अतिभार, अवरुद्ध वायु शोधक या दोषपूर्ण अंतःक्षेपण; नीला धुआँ — घिसे छल्लों या गाइडों से तेल जलना; सफ़ेद धुआँ — ईंधन में पानी या ठंडा इंजन; अति-तापन — कम शीतलक, फिसलता पंखा-पट्टा, अटका थर्मोस्टैट या परतदार रेडिएटर।
  • पूर्ण मरम्मत (overhaul): जब संपीडन, तेल खपत व ब्लो-बाय घिसे छल्ले, लाइनर व बेयरिंग दिखाएँ — पुनर्वेधन या नया लाइनर, नए छल्ले व बेयरिंग, वाल्व घिसाई।

मुख्य बिंदु

  • पवन शक्ति ½ρAV³ गुणा एक शक्ति गुणांक है जो 16/27 की बेट्ज़ सीमा से अधिक नहीं हो सकता।
  • ऑटो η = 1 − 1/r^(γ−1); समान r पर ऑटो चक्र डीज़ल से आगे है, परंतु CI इंजन कहीं अधिक r पर चलकर व्यवहार में जीतते हैं।
  • IP = p_mi·L·A·n·k/60, चार-स्ट्रोक हेतु n = N/2; BP = 2πNT/60; η_m = BP/IP।
  • η_bth = BP/(ṁ_f·CV) और bsfc = ṁ_f/BP; ऊष्मीय मान के माध्यम से वे व्युत्क्रम हैं।
  • ऑक्टेन स्वतः-प्रज्वलन के प्रतिरोध को, सीटेन उसकी तत्परता को मापता है; बायोडीज़ल ट्रांसएस्टरीकरण से बनता है।
  • बल-आघूर्ण शिखर-शक्ति की चाल से नीचे शिखर पर होता है; बल-आघूर्ण बैकअप = (T_max − T_rated)/T_rated।

अभ्यास प्रश्न (12)

उत्तर खोलने से पहले प्रत्येक प्रश्न हल करें। हर व्याख्या सही विकल्प के साथ लुभावना गलत विकल्प भी बताती है, क्योंकि अंक वहीं जाते हैं।

  1. γ = 1.4 लेते हुए, 8 संपीडन अनुपात वाले ऑटो चक्र की वायु-मानक दक्षता क्या है? उत्तर प्रतिशत में एक दशमलव स्थान तक दें।

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: 56.5

    η = 1 − 1/r^(γ−1) = 1 − 1/8^0.4 = 1 − 1/2.297 = 1 − 0.4353 = 0.5647, अर्थात् 56.5 प्रतिशत। γ − 1 के स्थान पर γ लेने पर 1 − 8^(−1.4) = 94.6 प्रतिशत आता है, जिसके निकट कोई इंजन चक्र नहीं पहुँचता।
  2. एक वायु-मानक डीज़ल चक्र का संपीडन अनुपात 16 व अंतक अनुपात 2 है। γ = 1.4 लेते हुए, उसकी दक्षता, प्रतिशत में एक दशमलव स्थान तक, क्या है?

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: 61.4

    16^0.4 = 3.031, अतः 1/r^(γ−1) = 0.3299। कोष्ठक (ρ^γ − 1)/(γ(ρ − 1)) = (2^1.4 − 1)/1.4 = (2.639 − 1)/1.4 = 1.1707। η = 1 − 0.3299 × 1.1707 = 1 − 0.3862 = 61.4 प्रतिशत। कोष्ठक छोड़ने पर r = 16 पर ऑटो मान 67.0 प्रतिशत आता है, जो डीज़ल चक्र को बढ़ा-चढ़ा देता है।
  3. एक इंजन 2000 चक्कर/मिनट पर 200 N·m बल-आघूर्ण विकसित करता है। उसकी ब्रेक शक्ति, kW में (एक दशमलव स्थान तक), क्या है?

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: 41.9

    BP = 2πNT/60 = 2π × 2000 × 200/60 = 41 888 W = 41.9 kW। 2π छोड़ने पर 6.67 kW, और N को चक्कर/सेकंड मानने (60 के बिना) पर 2513 kW आता है।
  4. एक इंजन 42 000 kJ/kg ऊष्मीय मान वाले 5 kg/h डीज़ल की खपत करते हुए 20 kW ब्रेक शक्ति देता है। उसकी ब्रेक तापीय दक्षता, प्रतिशत में एक दशमलव स्थान तक, क्या है?

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: 34.3

    ईंधन शक्ति = 5 × 42 000/3600 = 58.33 kW, अतः η_bth = 20/58.33 = 0.3429 = 34.3 प्रतिशत। kg/h को kg/s में न बदलने पर दक्षता 0.0095 प्रतिशत आती है; वही आँकड़े bsfc = 5/20 = 0.25 kg/kWh देते हैं।
  5. एक एकल-सिलिंडर चार-स्ट्रोक इंजन का व्यास 100 mm व स्ट्रोक 120 mm है, और वह 6 bar सूचित माध्य प्रभावी दाब के साथ 1500 चक्कर/मिनट पर चलता है। उसकी सूचित शक्ति, kW में (दो दशमलव स्थानों तक), क्या है?

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: 7.07

    A = π/4 × 0.1² = 7.854 × 10⁻³ m²; n = N/2 = 750 शक्ति-स्ट्रोक/मिनट। IP = p·L·A·n/60 = 6 × 10⁵ × 0.12 × 7.854 × 10⁻³ × 750/60 = 7069 W = 7.07 kW। N/2 के स्थान पर N = 1500 लेने से यह दोगुना 14.14 kW हो जाता है, चार-स्ट्रोक की मानक भूल।
  6. एक इंजन की सूचित शक्ति 25 kW व ब्रेक शक्ति 20 kW है। उसकी यांत्रिक दक्षता, प्रतिशत में, क्या है?

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: 80

    η_m = BP/IP = 20/25 = 0.80 = 80 प्रतिशत, और घर्षण शक्ति 25 − 20 = 5 kW है। IP को BP से भाग देने पर 125 प्रतिशत आता है, दक्षता हेतु असंभव।
  7. 10 m घूर्णक व्यास वाली पवन टरबाइन 8 m/s की पवन में चलती है। वायु घनत्व 1.2 kg/m³ व शक्ति गुणांक 0.4 लेते हुए, वह कितनी शक्ति देती है, kW में (दो दशमलव स्थानों तक)?

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

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    उत्तर: 9.65

    A = π/4 × 10² = 78.54 m²। पवन में शक्ति = ½ × 1.2 × 78.54 × 8³ = 24 127 W; प्रदत्त = 0.4 × 24 127 = 9651 W = 9.65 kW। V³ के स्थान पर V² लेने पर 1.21 kW आता है, और व्यास को त्रिज्या मानने पर उत्तर चार गुना हो जाता है।
  8. एक ट्रैक्टर इंजन का निर्धारित चाल पर बल-आघूर्ण 150 N·m और कम चाल पर अधिकतम बल-आघूर्ण 180 N·m है। उसका बल-आघूर्ण बैकअप, प्रतिशत में, क्या है?

    संख्यात्मक उत्तर — मान टाइप करें।

    उत्तर देखें

    उत्तर: 20

    बल-आघूर्ण बैकअप = (T_max − T_rated)/T_rated × 100 = (180 − 150)/150 × 100 = 20 प्रतिशत। अधिकतम बल-आघूर्ण से भाग देने पर 16.7 प्रतिशत आता है, जो मानक परिभाषा नहीं।
  9. किसी ईंधन की सीटेन संख्या किसका माप है?

    1. संपीडन-प्रज्वलन इंजन में प्रज्वलन गुणवत्ता
    2. स्फुलिंग-प्रज्वलन इंजन में अपस्फोटन का प्रतिरोध
    3. ऊष्मीय मान
    4. निम्न ताप पर श्यानता
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — संपीडन-प्रज्वलन इंजन में प्रज्वलन गुणवत्ता

    उच्च सीटेन संख्या का अर्थ छोटा प्रज्वलन विलंब है, अतः ईंधन CI इंजन में सहजता से स्वतः प्रज्वलित होता है और डीज़ल अपस्फोटन टलता है। SI इंजन में अपस्फोटन का प्रतिरोध ऑक्टेन संख्या है — विपरीत गुण, इसीलिए दोनों विकल्पों में इतनी बार उलट दिए जाते हैं।
  10. अंतर्दहन इंजनों के विषय में निम्न में से कौन-से कथन सही हैं?

    1. मैग्नेटो प्रज्वलन तंत्र को स्फुलिंग उत्पन्न करने हेतु बैटरी नहीं चाहिए
    2. संपीडन-प्रज्वलन इंजन में स्पार्क प्लग नहीं होता
    3. दो-स्ट्रोक इंजन में प्रति क्रैंकशाफ़्ट चक्कर एक शक्ति-स्ट्रोक होता है
    4. चार-स्ट्रोक इंजन का कैमशाफ़्ट क्रैंकशाफ़्ट की चाल पर चलता है
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — मैग्नेटो प्रज्वलन तंत्र को स्फुलिंग उत्पन्न करने हेतु बैटरी नहीं चाहिए; B — संपीडन-प्रज्वलन इंजन में स्पार्क प्लग नहीं होता; C — दो-स्ट्रोक इंजन में प्रति क्रैंकशाफ़्ट चक्कर एक शक्ति-स्ट्रोक होता है

    मैग्नेटो घूमते चुंबक से अपनी धारा स्वयं उत्पन्न करता है; CI इंजन संपीडन की ऊष्मा से ईंधन प्रज्वलित करता है; दो-स्ट्रोक इंजन अपना चक्र एक चक्कर में पूरा करता है। चार-स्ट्रोक इंजन का प्रत्येक वाल्व हर दो चक्करों में एक बार खुलता है, अतः कैमशाफ़्ट क्रैंकशाफ़्ट की आधी चाल पर घूमता है — चौथा कथन असत्य है।
  11. CI इंजन की घर्षण शक्ति निकालने की विलान रेखा विधि में होता है:

    1. स्थिर चाल पर ब्रेक शक्ति के विरुद्ध ईंधन खपत आलेखित कर शून्य ईंधन तक बहिर्वेशित करना
    2. एक-एक सिलिंडर बंद कर ब्रेक शक्ति में गिरावट मापना
    3. ईंधन बंद कर इंजन को विद्युत मोटर से चलाना
    4. ईंधन ऊर्जा से शीतलक को गई ऊष्मा घटाना
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — स्थिर चाल पर ब्रेक शक्ति के विरुद्ध ईंधन खपत आलेखित कर शून्य ईंधन तक बहिर्वेशित करना

    स्थिर चाल पर ईंधन खपत ब्रेक शक्ति के साथ लगभग रैखिक रूप से बढ़ती है; रेखा को शून्य ईंधन तक बढ़ाने पर ऋणात्मक ब्रेक शक्ति मिलती है जिसका परिमाण घर्षण शक्ति है। सिलिंडर बंद करना मोर्स परीक्षण है, और इंजन को घुमाना मोटरिंग — दोनों वैध विधियाँ, परंतु विलान की नहीं।
  12. बायोडीज़ल वनस्पति तेलों से मुख्यतः किसके द्वारा बनाया जाता है?

    1. उत्प्रेरक की उपस्थिति में ऐल्कोहॉल के साथ ट्रांसएस्टरीकरण
    2. अवायवीय पाचन
    3. यीस्ट द्वारा शर्कराओं का किण्वन
    4. सीमित वायु के साथ गैसीकरण
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — उत्प्रेरक की उपस्थिति में ऐल्कोहॉल के साथ ट्रांसएस्टरीकरण

    ट्रांसएस्टरीकरण ट्राइग्लिसराइड के ग्लिसरॉल आधार को मेथनॉल से बदल देता है, जिससे पतले मेथिल एस्टर मिलते हैं जिन्हें CI इंजन जला सकता है, और ग्लिसरॉल उपोत्पाद है। अवायवीय पाचन बायोगैस, यीस्ट किण्वन एथेनॉल और गैसीकरण उत्पादक गैस देता है।