छत्तीसगढ़ी भाषा और साहित्य

यह अध्याय मुख्य परीक्षा के प्रश्नपत्र I (भाषा) के भाग 3, “छत्तीसगढ़ी भाषा”, का उत्तर देता है: उसका विकास व इतिहास, साहित्य व साहित्यकार, व्याकरण, शब्द-भेद, लिंग, वचन व काल, क्षेत्रीय रूप, लोकोक्तियाँ, अनुवाद, लोकगीत व लोककथाएँ, तथा भाषा और संस्कृति का संबंध; यह भाग 1 की छत्तीसगढ़ संबंधी मदों, “हिंदी साहित्य में छत्तीसगढ़ का योगदान” तथा हिंदी से छत्तीसगढ़ी व छत्तीसगढ़ी से हिंदी अनुवाद, और प्रारंभिक परीक्षा के प्रश्नपत्र II के शीर्षक “छत्तीसगढ़ी भाषा का ज्ञान” को भी समेटता है। आयोग इन मदों की परीक्षा हिंदी व छत्तीसगढ़ी में लेता है, अंग्रेज़ी में नहीं। इसलिए इस अध्याय में देवनागरी पाठ छत्तीसगढ़ी के उदाहरण देता है, और अंग्रेज़ी पाठ उन्हें रोमन अक्षरों में छत्तीसगढ़ी शब्दों के साथ समझाता है। यहाँ पढ़ाए या पूछे गए छत्तीसगढ़ी रूप उन्हीं तक सीमित हैं जिन्हें ग्रियर्सन के भारत का भाषा-सर्वेक्षण, खंड 6 (1904) के संक्षिप्त व्याकरण व नमूनों से मिलाया जा सका, जो स्वयं हीरालाल काव्योपाध्याय के व्याकरण पर आधारित है; वर्तनी क्षेत्र व लेखक के अनुसार बदलती है, इसलिए प्रश्न कभी वर्तनी पर नहीं टिकते।

1. भाषा का स्थान, नाम और इतिहास

छत्तीसगढ़ी पूर्वी हिंदी समूह की भाषा है। मानक व्याकरण के वृत्तांत में अर्धमागधी, पश्चिम की शौरसेनी व पूर्व की मागधी के बीच की मिश्रित प्राकृत, पूर्वी हिंदी की जननी थी, जिसकी तीन मुख्य बोलियाँ हैं: अवधी, बघेली व छत्तीसगढ़ी। यह देवनागरी लिपि में लिखी जाती है। जनगणना इसे हिंदी की बोली गिनती है, पर 2007 में राज्य ने इसे अपना दर्जा दिया: छत्तीसगढ़ राजभाषा (संशोधन) विधेयक, 2007 विधानसभा में 28 नवंबर 2007 को सर्वसम्मति से पारित हुआ (संशोधन अधिनियम 2008 के अधिनियम क्रमांक 14 के रूप में सूचीबद्ध है), जिससे छत्तीसगढ़ी हिंदी के साथ राजभाषा बनी, और 28 नवंबर को छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस मनाया जाता है।

नाम। “छत्तीसगढ़” को परंपरा से “छत्तीस गढ़ों” का नाम समझाया जाता है। नाम की उत्पत्ति पर मतभेद है और कोई प्रश्न उस पर नहीं टिकता। प्रारंभिक अभिलेखों में दंतेश्वरी मंदिर (दंतेवाड़ा) के राजा दिकपाल देव के अभिलेख (लगभग 1702-1703) संस्कृत पाठ के साथ एक देशज पाठ भी रखते हैं, पर अभिलेख-विशेषज्ञ उस पाठ को हिंदी बताते हैं, इसलिए उसे निश्चित रूप से छत्तीसगढ़ी का सबसे प्राचीन अभिलेख कहना उचित नहीं।

साहित्य के तीन युग सामान्यतः माने जाते हैं: गाथा युग (लगभग 1000 से 1500), भक्ति या मध्य युग (लगभग 1500 से 1900) तथा आधुनिक युग (लगभग 1900 से)। मध्य युग तक छत्तीसगढ़ी की उपलब्ध रचनाएँ केवल पद्य में हैं; गद्य आधुनिक युग में आता है। यह विभाजन अनेक साहित्य-इतिहासकारों का है और हर युग की प्रमुख प्रवृत्ति पर आधारित है, इसलिए तिथियाँ अनुमानित हैं।

⚠️ भाषा या बोली?
उत्तर इस पर निर्भर है कि बोलने वाला कौन है। भाषा-विज्ञान व जनगणना में यह पूर्वी हिंदी की बोली है; राज्य में विधि की दृष्टि से 2007 के संशोधन से यह हिंदी के साथ राजभाषा है। ऐसा विकल्प न चुनें जो इसे भोजपुरी या ओड़िया की बोली कहे: पड़ोसी भाषाएँ इसे प्रभावित करती हैं (बहुवचन-प्रत्यय की तुलना ओड़िया से की जाती है), पर इसका परिवार पूर्वी हिंदी है।

2. क्षेत्रीय रूप

रायपुर, बिलासपुर व दुर्ग के मध्य मैदान में मूल छत्तीसगढ़ी बोली जाती है। उसके चारों ओर बोली स्थान या बोलने वाले समुदाय के आधार पर स्थानीय नाम लेती है। ग्रियर्सन का भाषा-सर्वेक्षण यह सूची देता है।

क्षेत्रीय रूपों के नाम
रूपकहाँ या किसके द्वाराटिप्पणी
लरियापूर्वी सीमा के ओड़िया-भाषी लोग छत्तीसगढ़ी को यह नाम देते हैंओड़िया से गहरा प्रभावित
खल्टाहीबालाघाट जिले का पूर्वी भागखलोटी, बालाघाट में छत्तीसगढ़ (बिलासपुर) अंचल के लिए प्रचलित नाम, से: खलोटी की भाषा
सरगुजियाउत्तर में सरगुजाउत्तरी रूप, छत्तीसगढ़ी रूपों में अपने विशिष्ट स्थान के साथ
बिंझवारी, बैगानीबिंझवार व बैगा जनजातियाँजिन जनजातियों ने अपनी मातृभाषा छोड़ दी, वे अपने नाम से जानी जाने वाली छत्तीसगढ़ी बोलते हैं
सदरी कोरवाजशपुर के कोरवाऊपर की दोनों की तरह समुदाय के नाम पर
भुलिया, कलंगासोनपुर के बुनकर; पटना के लोगदोनों रियासतें ओडिशा में गईं; बोली ओड़िया-रंजित है और लरिया भी कही जाती है
ℹ️ संपर्क भाषाएँ
बस्तर अंचल में छत्तीसगढ़ी का संपर्क हलबी, भतरी तथा द्रविड़ व मुंडा जनजातीय भाषाओं से होता है, और उत्तर में उरांवों की कुड़ुख से; ये उसे छूने वाली पड़ोसी भाषाएँ हैं, उसके रूप नहीं।

3. ध्वनियाँ और शब्द-भेद

छत्तीसगढ़ी की, बहुत-सी पूर्वी हिंदी की तरह, एक परिचित ध्वनि-आदत है कि ष व श का उच्चारण स होता है, इसलिए भाषा भासा और दोष दोस सुनाई देता है; संस्कृत स्वर ऋ का उच्चारण प्रायः रि होता है, इसलिए ऋषि रिसि सुनाई देता है।

आयोग चार शब्द-भेद भी पूछता है, जो हिंदी के ही हैं। तत्सम शब्द संस्कृत के अपरिवर्तित शब्द हैं (ग्राम, रात्रि); तद्भव शब्द संस्कृत से प्राकृत के माध्यम से परिवर्तन के साथ आए हैं (गाँव, रात); देशज शब्द वे ठेठ शब्द हैं जिनका संस्कृत स्रोत नहीं (लोटा, झंडा); विदेशी शब्द अन्य भाषाओं से आए हैं (कलम व किताब अरबी से)। छत्तीसगढ़ी में तद्भव वर्ग सबसे बड़ा है, और ऊपर की ध्वनि-आदत तत्सम शब्दों के उसमें ढलने का एक उपाय है।

4. व्याकरण: वचन, कारक, सर्वनाम और काल

वचन व लिंग। संज्ञा का बहुवचन मन जोड़कर बनता है: लइका-मन, मनुख-मन (पुरुष)। अंत बदलकर बनने वाला हिंदी जैसा बहुवचन यहाँ का सामान्य ढर्रा नहीं है। कारक संज्ञा में जुड़ने वाले परसर्गों से दिखाया जाता है, बहुवचन-प्रत्यय के बाद भी। संबंध-कारक के संज्ञा के लिंग या वचन से नहीं बदलता: किसान के बेटा, किसान के बेटी, किसान के बेटा-मन।

कारक-चिह्न
कारकचिह्नउदाहरण
कर्म व संप्रदानला (का भी)मोला
करण व अपादानले (से भी)मोर ले
प्रयोजनार्थ संप्रदानबरमोर बर
संबंधकेकिसान के बेटा
अधिकरणमाघर मा
निश्चयता (कारक नहीं)हरबिलई हर
⚠️ हर हिंदी का ने नहीं है
प्रत्यय हर निश्चयता बताता है, जैसे “वह बिल्ली”, और हिंदी के ने की तरह कर्ता का चिह्न नहीं है। इसलिए बिलई हर खइस का अर्थ “बिल्ली ने खाया” है, और क्रिया-रूप ही काल बताता है; ग्रियर्सन के अनुसार भूतकाल की रचना सदा कर्तरि होती है, हिंदी के ने जैसा कर्ता-चिह्न नहीं होता।
पुरुषवाचक सर्वनाम
पुरुषकर्तातिर्यक्संबंध
उत्तम, एकवचन (मैं)मैंमोमोर
मध्यम, एकवचन (तू)तैंतोतोर
उत्तम, बहुवचन (हम)हम-मन (या हम)हमहमर
मध्यम, बहुवचन (तुम)तुम-मन (या तुम)तुमतुम्हर
अन्य पुरुषओओओकर
काल, व्याकरण के उदाहरणों सहित
कालकैसे बनता हैउदाहरण
वर्तमानवर्तमान कृदंत (-त) + सहायक क्रिया हे (ग्रियर्सन है लिखते हैं) या हनलइका-मन पढ़त हे; हम दार भात खात हन
सामान्य भूतधातु में अंत इस (अन्य पुरुष)बिलई हर खइस; ओ कहिस
भूत-निरंतरवर्तमान कृदंत + रहिस, रहिनओमन खात रहिन
भविष्यधातु में -बे, “तू” के लिएकहाँ जाबे गा
निषेध व वर्जनाकथन के साथ नइ; आदेश के साथ झन (प्रचलित प्रयोग में छत्तीसगढ़ी के निषेध व वर्जना कण)ओ नइ जात हे; झन जा
🧠 नइ कहता है, झन रोकता है
नइ कहता है “नहीं है” (ओ नइ जात हे); झन कहता है “मत” (झन जा)।

5. अनुवाद-अभ्यास: हिंदी व छत्तीसगढ़ी

अनुवाद-प्रश्न हिंदी वाक्य देकर उसका छत्तीसगढ़ी रूप पूछते हैं, या उलटा। विधि यह है कि पहले क्रिया का ढाँचा पहचानें (त में वर्तमान, इस में भूत, रहिस के साथ निरंतर, -बे में भविष्य), फिर सर्वनाम व परसर्ग बदलें। नीचे के वाक्यों में केवल वे रूप व ढाँचे हैं जो भाषा-सर्वेक्षण से मिलाए जा सके।

वाक्य-युग्म
हिंदीछत्तीसगढ़ी
बिल्ली ने खाया।बिलई हर खइस
वे खा रहे थे।ओमन खात रहिन
तुम कहाँ जाओगे?कहाँ जाबे गा
बच्चे पढ़ रहे हैं।लइका-मन पढ़त हे
तुम्हारी बच्ची अच्छी है।तुम्हर नोनी भल हे
उसका नाम पूछो।ओकर नाम पूछ
मत जाओ।झन जा
वह नहीं जा रहा।ओ नइ जात हे
⚠️ शब्द से पहले काल देखें
सबसे आम भूल सही शब्द गलत काल में देना है: खात हे (खा रहा है), खात रहिन (खा रहे थे) और खइस (खाया) केवल क्रिया में भिन्न हैं। अभ्यास-प्रश्न का भ्रामक विकल्प प्रायः सही वाक्य होता है, पर काल या पुरुष गलत।

6. लोकोक्तियाँ, पहेलियाँ, गीत व कथाएँ

लोकोक्ति हाना है और पहेली जनउला। परीक्षा में इन पर प्रश्न किसी कहावत का अर्थ या पहेली का उत्तर पूछते हैं, इसलिए प्रत्येक रूप का भाव और उनमें निहित सामान्य लोक-ज्ञान (बुरा कारीगर औज़ार को दोष देता है; मुर्गियाँ अंडों से निकलने से पहले न गिनें) याद करें, किसी निश्चित शब्दावली को नहीं। इस अध्याय में नमूना लोकोक्तियाँ या पहेलियाँ नहीं छापी गईं, क्योंकि उनकी देवनागरी वर्तनी संग्रहों में भिन्न है और किसी दूसरे प्रामाणिक स्रोत से पुष्ट नहीं हो सकी।

लोकगीत व कथाएँ। गीतों में स्त्रियों के सुवा गीत, कर्मा गीत, ददरिया, राउत चरवाहों का बाँसगीत तथा पंडवानी गाथाएँ आते हैं। ग्रियर्सन के अनुसार हीरालाल का व्याकरण घुमंतू चारणों द्वारा सुनाए जाने वाले अनेक गीत व कथाएँ छापता है।

7. साहित्यकार व रचनाएँ; हिंदी में योगदान

छत्तीसगढ़ी व हिंदी के साहित्यकार व रचनाएँ
रचनाकाररचना व स्थानटिप्पणी
गोपाल चंद्र मिश्रखूब तमाशापरंपरा से 17वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में रतनपुर के दरबारी कवि माने जाते हैं; रचना हिंदी में (जीवन के विवरण पूरी तरह तय नहीं)
हीरालाल काव्योपाध्यायछत्तीसगढ़ी का व्याकरण, हिंदी में लिखितधमतरी के ऐंग्लो-वर्नाक्युलर स्कूल के प्रधानाध्यापक; ग्रियर्सन द्वारा अनूदित (प्रकाशित 1890); 1921 का संशोधित संस्करण लोचन प्रसाद काव्यविनोद द्वारा
पंडित सुंदरलाल शर्माछत्तीसगढ़ी दानलीला, रचना लगभग 1903छत्तीसगढ़ी का पहला प्रबंध काव्य माना जाता है; स्वतंत्रता सेनानी भी
नरेंद्र देव वर्माअरपा पैरी के धारवह गीत जिसे राज्य सरकार ने नवंबर 2019 में राज्य गीत घोषित किया; उन्होंने इसे लिखा व स्वरबद्ध किया
माधवराव सप्रेछत्तीसगढ़ मित्र (1900, पेंड्रा); एक टोकरी भर मिट्टी (1901)पत्रिका में छपी इस कहानी को पहली हिंदी कहानी कहा जाता है, जिस दावे पर विद्वान बहस करते हैं
पदुमलाल पुन्नालाल बख्शीहिंदी पत्रिका सरस्वती के संपादकखैरागढ़ के
गजानन माधव मुक्तिबोधहिंदी कविराजनांदगाँव के दिग्विजय कॉलेज में अध्यापन
श्रीकांत वर्मामगध (कविताएँ)जन्म बिलासपुर (1931); मगध पर साहित्य अकादमी पुरस्कार, 1986 में निधन के बाद 1987 में
विनोद कुमार शुक्लनौकर की कमीज़ (1979); दीवार में एक खिड़की रहती थीजन्म 1 जनवरी 1937, राजनांदगाँव; साहित्य अकादमी पुरस्कार 1999 (दीवार में एक खिड़की रहती थी पर); 59वाँ ज्ञानपीठ पुरस्कार (2024 के लिए), 22 मार्च 2025 को घोषित, छत्तीसगढ़ के किसी साहित्यकार को पहली बार
🎯 भाषा और संस्कृति एक ही पाठ्यक्रम है
आयोग “भाषा व संस्कृति का संबंध” इसलिए सूचीबद्ध करता है कि भाषा की शब्दावली ही पिछले अध्याय के पर्वों, शिल्पों व अनुष्ठानों की शब्दावली है: हरेली, तीजा, छेरछेरा, पंडवानी और नाचा। जो अभ्यर्थी कला-रूप जानता है, वह भाषा का प्रश्न उन्हीं से हल कर सकता है।
⚠️ जन्म से, या संबंध से
छत्तीसगढ़ के किसी नगर से जुड़ा साहित्यकार वहीं जन्मा हो, यह आवश्यक नहीं। मुक्तिबोध ने राजनांदगाँव में अध्यापन किया पर वे छत्तीसगढ़ में जन्मे नहीं थे; विनोद कुमार शुक्ल का जन्म राजनांदगाँव में हुआ। जो कथन दोनों को उलट दे वह असत्य है।

मुख्य बिंदु

  • छत्तीसगढ़ी अवधी व बघेली के साथ पूर्वी हिंदी की है और देवनागरी में लिखी जाती है। विधानसभा द्वारा 28 नवंबर 2007 को राजभाषा (संशोधन) विधेयक पारित करने के बाद यह हिंदी के साथ राजभाषा बनी, और 28 नवंबर छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस है।
  • साहित्य गाथा युग (लगभग 1000 से 1500), भक्ति युग (लगभग 1500 से 1900) व आधुनिक युग (लगभग 1900 से) में बँटा है।
  • रूप स्थान या समुदाय के नाम पर हैं: ओड़िया सीमा पर लरिया, बालाघाट के एक भाग में खल्टाही, सरगुजा में सरगुजिया, और बिंझवार, बैगा व कोरवा के नाम पर बिंझवारी, बैगानी व सदरी कोरवा।
  • व्याकरण: बहुवचन मन से; कारक ला, ले, बर, के, मा से; संबंध के लिंग से अपरिवर्तित; सर्वनाम मोर, तोर, हमर, तुम्हर, ओकर; वर्तमान -त के साथ हे या हन, भूत -इस, निरंतर रहिस या रहिन, भविष्य -बे; नइ निषेध करता है और झन वर्जना।
  • लोकोक्ति हाना है और पहेली जनउला; इन्हें अर्थ से परखा जाता है, किसी निश्चित वर्तनी से नहीं।
  • सुंदरलाल शर्मा की दानलीला (लगभग 1903) छत्तीसगढ़ी का पहला प्रबंध काव्य है; हीरालाल काव्योपाध्याय ने व्याकरण लिखा; माधवराव सप्रे की छत्तीसगढ़ मित्र (1900) व एक टोकरी भर मिट्टी (1901) हिंदी को छत्तीसगढ़ की आरंभिक देन हैं; विनोद कुमार शुक्ल 59वें ज्ञानपीठ विजेता हैं (मार्च 2025 में घोषित)।

अभ्यास प्रश्न (18)

उत्तर खोलने से पहले प्रत्येक प्रश्न हल करें। हर व्याख्या सही विकल्प के साथ लुभावना गलत विकल्प भी बताती है, क्योंकि अंक वहीं जाते हैं।

  1. हिंदी के मानक वर्गीकरण में छत्तीसगढ़ी किस समूह की है?

    1. पूर्वी हिंदी, अवधी के साथ
    2. पश्चिमी हिंदी, ब्रज व बुंदेली के साथ
    3. राजस्थानी, मारवाड़ी व मेवाड़ी के साथ
    4. पहाड़ी, गढ़वाली व कुमाऊँनी के साथ
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — पूर्वी हिंदी, अवधी के साथ

    छत्तीसगढ़ी अर्धमागधी से उतरी पूर्वी हिंदी की तीन मुख्य बोलियों में है, अवधी व बघेली के साथ। पश्चिमी हिंदी भ्रामक विकल्प है क्योंकि यह उस मानक हिंदी का समूह है जिसके बगल में छत्तीसगढ़ी बैठती है।
  2. पूर्वी हिंदी समूह के मानक वृत्तांत में, पश्चिम की शौरसेनी व पूर्व की मागधी के बीच की कौन-सी प्राकृत पूर्वी हिंदी की जननी मानी जाती है, जिससे छत्तीसगढ़ी संबद्ध है?

    1. शौरसेनी
    2. मागधी
    3. अर्धमागधी
    4. महाराष्ट्री
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — अर्धमागधी

    शौरसेनी व मागधी के बीच की मिश्रित प्राकृत अर्धमागधी पूर्वी हिंदी (अवधी, बघेली, छत्तीसगढ़ी) की मानक जननी है। शौरसेनी पश्चिमी हिंदी की जननी है और मागधी से बिहारी व बंगला-ओड़िया समूह निकला; भ्रम यह है कि बीच वाली प्राकृत की जगह पड़ोसी प्राकृत चुन ली जाए।
  3. पूर्वी सीमा के ओड़िया-भाषी लोग छत्तीसगढ़ी को किस नाम से पुकारते हैं?

    1. खल्टाही
    2. सरगुजिया
    3. हलबी
    4. लरिया
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — लरिया

    ओड़िया पक्ष छत्तीसगढ़ी को लरिया कहता है। खल्टाही बालाघाट के एक भाग का नाम है और सरगुजिया उत्तरी रूप है, जबकि हलबी बस्तर की पड़ोसी भाषा है, छत्तीसगढ़ी का नाम नहीं।
  4. ग्रियर्सन के भाषा-सर्वेक्षण के अनुसार “खल्टाही”, खलोटी की भाषा, छत्तीसगढ़ी के किस जिले के एक भाग में बोले जाने वाले रूप का नाम है?

    1. बालाघाट जिला
    2. सरगुजा जिला
    3. बस्तर जिला
    4. जशपुर जिला
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — बालाघाट जिला

    सर्वेक्षण खल्टाही को बालाघाट जिले के पूर्वी भाग में रखता है। सरगुजा का अपना सरगुजिया है और जशपुर कोरवा की सदरी कोरवा से जुड़ा है, इसलिए ये सबसे संभावित गलत विकल्प हैं।
  5. छत्तीसगढ़ी में संज्ञा का बहुवचन बनाने वाला प्रत्यय कौन-सा है, जैसे लइका-मन में?

    1. हर
    2. मन
    3. ला
    4. बर
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — मन

    बहुवचन संज्ञा में मन जोड़ने से बनता है। हर निश्चयता देता है, ला कर्म या संप्रदान का चिह्न है और बर प्रयोजनार्थ संप्रदान का, इसलिए इनमें से कोई बहुवचन नहीं बनाता।
  6. छत्तीसगढ़ी व्याकरण के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए। P: ले करण व अपादान का चिह्न है। Q: संबंध-कारक के आगे आने वाली संज्ञा के लिंग से नहीं बदलता। R: मा अधिकरण का चिह्न है। S: ला संबंध-कारक का चिह्न है। कौन-सा/से सही है/हैं?

    1. केवल P और Q
    2. केवल Q, R और S
    3. केवल P, Q और R
    4. केवल P, R और S
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — केवल P, Q और R

    P, Q और R सही हैं। S गलत है क्योंकि ला कर्म व संप्रदान का चिह्न है; संबंध के है। S भ्रामक कथन है क्योंकि ला बोलचाल का सबसे आम चिह्न है।
  7. कौन-सा छत्तीसगढ़ी सर्वनाम “हमारा” का अर्थ देता है?

    1. मोर
    2. ओकर
    3. तुम्हर
    4. हमर
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — हमर

    हमर उत्तम पुरुष बहुवचन का संबंध-रूप है, हमारा। मोर मेरा है, ओकर उसका और तुम्हर तुम्हारा; मोर निकटतम गलत विकल्प है क्योंकि वह भी उत्तम पुरुष है।
  8. हिंदी वाक्य “बिल्ली ने खाया” का छत्तीसगढ़ी रूप कौन-सा है?

    1. बिलई हर खात हे
    2. बिलई हर खइस
    3. बिलई हर खात रहिस
    4. बिलई हर नइ खइस
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — बिलई हर खइस

    सामान्य भूत का अंत इस है: बिलई हर खइस। खात हे वर्तमान है, खात रहिस भूत-निरंतर और नइ खइस निषेध, अतः हर एक हिंदी से काल या अर्थ-भाव में भिन्न है।
  9. कौन-सा छत्तीसगढ़ी वाक्य “वे खा रहे थे” का अर्थ देता है?

    1. ओमन दार भात खात हे
    2. ओमन खइस
    3. ओमन खात रहिन
    4. हम खात हन
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — ओमन खात रहिन

    भूत-निरंतर बहुवचन कर्ता के लिए वर्तमान कृदंत के साथ रहिन है: ओमन खात रहिन। ओमन खात हे वर्तमान है, ओमन खइस सामान्य भूत और हम खात हन हम खा रहे हैं, अतः हर एक में काल या पुरुष गलत है।
  10. कौन-सा वाक्य “मत जाओ” का अर्थ देता है?

    1. झन जा
    2. जा
    3. जाबे
    4. ओ नइ जात हे
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — झन जा

    झन आदेश को वर्जना बनाता है: झन जा। झन के बिना जा सकारात्मक आदेश (जाओ) है, जाबे भविष्य (तुम जाओगे) है, और ओ नइ जात हे कथन है कि वह नहीं जा रहा, इसलिए इन तीनों में से कोई श्रोता को जाने से नहीं रोकता।
  11. छत्तीसगढ़ी वाक्य “हम दार भात खात हन” का क्या अर्थ है?

    1. हमने दाल-भात खाया
    2. हम दाल-भात खाएँगे
    3. वे दाल-भात खा रहे थे
    4. हम दाल-भात खा रहे हैं
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — हम दाल-भात खा रहे हैं

    खात वर्तमान कृदंत है और हन वर्तमान सहायक क्रिया का उत्तम पुरुष बहुवचन, इसलिए वाक्य वर्तमान कथन है: हम खा रहे हैं। भूत व भविष्य के लिए -इस या -बे अंत चाहिए, और वे खा रहे थे के लिए रहिन।
  12. छत्तीसगढ़ी में “हाना” शब्द लोक-अभिव्यक्ति के किस रूप का नाम है?

    1. लोकोक्ति या कहावत
    2. पहेली
    3. लोरी
    4. वीर-गाथा
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — लोकोक्ति या कहावत

    हाना लोकोक्ति या कहावत है; पहेली को जनउला कहते हैं। लोरी और वीर-गाथा अलग गीत-रूप हैं। निकटतम गलत विकल्प पहेली है, क्योंकि लोकोक्तियाँ व पहेलियाँ भाषा की उक्तियों के रूप में साथ पढ़ाई जाती हैं।
  13. प्रत्येक रूप का उसके स्वरूप से मिलान कीजिए। P: हाना, Q: जनउला, R: पंडवानी। कौन-सा समूह सही है?

    1. P: पहेली; Q: लोकोक्ति; R: महाभारत की गाथा
    2. P: लोकोक्ति; Q: महाभारत की गाथा; R: पहेली
    3. P: लोकोक्ति; Q: पहेली; R: महाभारत की गाथा
    4. P: लोकोक्ति; Q: पहेली; R: रामायण की गाथा
    उत्तर देखें

    उत्तर: C — P: लोकोक्ति; Q: पहेली; R: महाभारत की गाथा

    हाना लोकोक्ति है, जनउला पहेली है और पंडवानी महाभारत कहती है। जो समूह लोकोक्ति व पहेली को बदल दे वह P व Q में गलत है, जो पंडवानी को पहेली दे वह Q व R में गलत है, और जो रामायण कहे वह R में गलत है, जो लोक-कला अध्याय का सिखाया हुआ भ्रम है।
  14. इनमें से कौन-सा छत्तीसगढ़ के राउत (यादव) चरवाहों का गीत-रूप है?

    1. स्त्रियों का सुवा गीत
    2. कर्मा गीत
    3. पंडवानी गाथा
    4. बाँसगीत
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — बाँसगीत

    बाँसगीत राउत चरवाहों का गीत है, जो बाँस की बाँसुरी के साथ गाया जाता है। सुवा स्त्रियों का तोता-गीत है, कर्मा गोंड, बैगा व उरांव समूहों का है और पंडवानी परधी की महाभारत-गाथा है; कर्मा निकटतम भ्रामक विकल्प है क्योंकि वह भी राज्य का लोकगीत है।
  15. छत्तीसगढ़ी का वह व्याकरण किसने लिखा जिसका सर जॉर्ज ग्रियर्सन ने अनुवाद किया, जो धमतरी के ऐंग्लो-वर्नाक्युलर स्कूल के प्रधानाध्यापक थे?

    1. हीरालाल काव्योपाध्याय
    2. पंडित सुंदरलाल शर्मा
    3. माधवराव सप्रे
    4. पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — हीरालाल काव्योपाध्याय

    व्याकरण हीरालाल काव्योपाध्याय ने हिंदी में लिखा, ग्रियर्सन ने अनुवाद किया (प्रकाशित 1890) और लोचन प्रसाद काव्यविनोद ने 1921 में संशोधित किया। सुंदरलाल शर्मा पहले छत्तीसगढ़ी प्रबंध काव्य के रचयिता हैं, व्याकरण के नहीं।
  16. लगभग 1903 में रचित और छत्तीसगढ़ी का पहला प्रबंध काव्य माने जाने वाले छत्तीसगढ़ी दानलीला की रचना किसने की?

    1. हीरालाल काव्योपाध्याय
    2. सुंदरलाल शर्मा
    3. विनोद कुमार शुक्ल
    4. माधवराव सप्रे
    उत्तर देखें

    उत्तर: B — सुंदरलाल शर्मा

    पंडित सुंदरलाल शर्मा ने लगभग 1903 में दानलीला रची। माधवराव सप्रे छत्तीसगढ़ मित्र पत्रिका व एक आरंभिक हिंदी कहानी के लिए स्मरण किए जाते हैं, छत्तीसगढ़ी प्रबंध काव्य के लिए नहीं, और विनोद कुमार शुक्ल आधुनिक हिंदी लेखक हैं।
  17. इन्हें कालक्रम से, सामान्यतः दी जाने वाली तिथियों के अनुसार, पहले वाले को पहले, रखिए:
    (i) पेंड्रा की छत्तीसगढ़ मित्र पत्रिका,
    (ii) विनोद कुमार शुक्ल का उपन्यास नौकर की कमीज़,
    (iii) दानलीला,
    (iv) एक टोकरी भर मिट्टी।

    1. क्रम (i), (iv), (iii), (ii)
    2. क्रम (i), (iii), (iv), (ii)
    3. क्रम (iv), (i), (iii), (ii)
    4. क्रम (ii), (i), (iv), (iii)
    उत्तर देखें

    उत्तर: A — क्रम (i), (iv), (iii), (ii)

    पत्रिका 1900 में आरंभ हुई, कहानी उसमें 1901 में छपी, दानलीला लगभग 1903 में रची गई और नौकर की कमीज़ 1979 में आई। निकटतम गलत क्रम कहानी को उसकी अपनी पत्रिका से पहले रख देता है।
  18. निम्नलिखित पर विचार कीजिए। P: माधवराव सप्रे ने 1900 में पेंड्रा से छत्तीसगढ़ मित्र पत्रिका आरंभ की। Q: विनोद कुमार शुक्ल ज्ञानपीठ पुरस्कार के 59वें प्राप्तकर्ता हैं। R: गजानन माधव मुक्तिबोध का जन्म राजनांदगाँव में हुआ। S: खैरागढ़ के पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी ने हिंदी पत्रिका सरस्वती का संपादन किया। कौन-सा/से सही है/हैं?

    1. केवल P और Q
    2. केवल Q, R और S
    3. P, Q, R और S सभी
    4. केवल P, Q और S
    उत्तर देखें

    उत्तर: D — केवल P, Q और S

    P, Q और S सही हैं। R गलत है: मुक्तिबोध ने राजनांदगाँव के दिग्विजय कॉलेज में पढ़ाया पर वहाँ जन्मे नहीं थे; राजनांदगाँव में जन्मे विनोद कुमार शुक्ल थे।